कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद जी इस युग के महान कथा सम्राट हैं । मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित उनका जीवन परिचय करता है। आदर्शोनुमुख, यथार्थवाद , प्रेमचंद साहित्य की मुख्य विशेषता है । इनके जीवन का सफर बहुत कठिन था पर उनका आत्मबल ,उनका आत्मविश्वास ,इतना प्रबल था कि उन्होंने हर आंधी तूफान को…
इस्तीफा
इस्तीफा हिन्दी कथा साहित्य की प्रथम सीढ़ी प्रेमचंद की कहानियों से प्रारम्भ हुई प्रतीत होती है। तीसरी- चौथी कक्षा से प्रेमचन्द की कहानियाँ जैसे’ बूढी काकी ‘, हामिद का चिमटा ‘, नमक का दरोगा आदि से शुरू होते- होते आत्माराम, कफन, इस्तीफा आदि कहानियों के द्वारा’उच्च स्तर की कक्षाओं तक अपनी अमिट छाप छोड़ती चलती…
रामोतार की फोटो
रामोतार की फोटो “लो आ गए बड़के भैया की मोटर… राम- राम बड़के भैया! राम-राम चाची ! बड़ी दीदी राम-राम !” धारीदार पाटरे का पैजामा, फुल शर्ट को बाहों में लपेटे ,कंधे पर लाल रंग का अंगौछा डालें वह लगभग चार फुट पांच इंच का, रंग पक्का यह अदना सा व्यक्तित्व सबका अभिवादन कर रहा…
मन्त्र
मन्त्र आदर्शोन्मुख यथार्थवाद के पक्षधर मुंशी प्रेमचंद जी अपनी मनोवैज्ञानिक धारणा को प्रतिष्ठित करके पाठकों के जिस तरह से सम्मुख रखते थे वह अपने आप में विचारणीय है । प्रेमचंद की अमूल्य योगदान से आज कहानी विधा विषय का स्वरूप आदर्शवाद शिल्प की दृष्टि से नए-नए आयामों को आत्मसात करती हुई संतोषजनक पड़ावों को तय…
नशा
नशा कथासम्राट् मुंशी प्रेमचंदको मेरा नमन । ३१जुलाई सन् १८८०में वाराणसी के लमही गॉंव में जन्मे धनपत राय का जीवन परिवार की ज़िम्मेदारी,विमाता के क्रोध और गरीबी में बीता ।उनके ही शब्दों में-“पॉंव में जूते नथे,देह पर साबुत कपड़े न थे,महँगाई अलग थी ।दस रुपये मासिक वेतन पर एक स्कूल में नौकरी की ।” एक…
गाड़ी के दो पहिए
गाड़ी के दो पहिए शोभा रसोई में से आवाज़ दे कर पीयू को बुला रही थी कि “बेटा, रसोई में आकर थोड़ी मेरी काम में मदद कर दे। थोड़ी सी बदाम काट कर दे दे।” पीयू रसोई में अपनी मस्ती में उछलते हुए पहुंची और बोली “क्या मां, आप क्या कर रही हो?” शोभा ने…