ईमानदार कोशिश करें

ईमानदार कोशिश करें आजादी के सत्तर साल बाद भी हम कई परेशानियों से जूझ रहे हैं ।सपने में भी जिसके बारे में हम सोचना नहीं चाहते, उस से दो -चार होना पड़ रहा है । दीमक की तरह चाट कर देश को खोखला करने वाली बुराइयाँ हमारे खून में रच-बस गयी हैं ।इनसे निजात पाना…

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जाले

जाले “अरे! धीरे…धीरे।” “हाँ, धीरे ही चल रही हूँ,” चमाचम चमकते टाइल्स की फर्श पर फिसल-फिसल जा रहे थे स्तुति के पैर। मोहित ने उसको कंधों से थाम लिया। “एकदम घबराना नहीं है मिनी।…सिस्टर! डॉ. अमला कितने बजे तक….?” “बस पंद्रह मिनट बाद।” संक्षिप्त उत्तर! रिसेप्शनिस्ट बिजी। बारी-बारी से बजते कॉल को रिसीव करती रिसेप्शनिस्ट…

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तुम सक्षम हो माही!

तुम सक्षम हो माही!   दिन बीतते चले जाते हैं कई दफा यूँ ,जैसे सिर्फ घड़ी की सुईयां सरक रहीं हैं अपनी नियति के अनुसार .. पर वक़्त थम गया है कहीं पर और आपका मन मस्तिष्क भी, एक अजीब सी नीरवता चारों ओर संलिप्त है इसीलिए बहुत कुछ घटित होता रहता है आपके आसपास,…

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नया सफर 

नया सफर  राधा ने नए शहर में अपनी नई नौकरी के पहले दिन के लिए खुद को तैयार किया। बचपन में पिता के निधन के बाद, उसकी माँ ने उसे अकेले पाला था। रिश्तों का उसका अनुभव सीमित था। समुद्र तट पर बसे इस छोटे से शहर में एक वृद्धाश्रम था, जिसका नाम था ‘शांतिवन’…

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नज़रिया

नज़रिया   कोरोना काल में समय कैसे गुजर जाता है पता ही नही चलता, एक दिन नीलू ने सोचा कि क्यों ना आज सुबह सुबह माया दीदी से बात की जाये ,फोन उठाया –दीदी कैसे हो,जीजाजी कैसे है,आपके शहर में कोरोना की स्थिति कैसी है? माया –अरे साँस तो लेने दो,कितने सवाल करोगी?? हम सब लोग…

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जयति जय माँ शारदे

जयति जय माँ शारदे जयति जय माँ शारदे। जयति जय माँ शारदे। मां बागेश्वरी,वीणापाणि, ज्ञान की देवी,हँसवाहिनी, बुद्धि का मां वर दे, जयति जय माँ शारदे। जयति जय माँ शारदे। धवल वस्त्र है, सौम्य स्वरूपा, कमलदलआसन,विद्द्यारूपा, चरणों में ये शीश झुका दूँ, तन,मन, धन सर्वश्व लुटा दूँ, अंधकार इस पूरे जग का, ज्योतिर्मय कर हर…

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सकारात्मक मानसिकता

सकारात्मक मानसिकता देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।कितने लोगों की कुर्बानी से हमें स्वतंत्रता मिली है ।आज उन शहीदों को कोटि कोटि नमन।इस स्वाधीनता का दुरुपयोग किसी को नहीं करना चाहिए। आज हमारा देश बहुत तरक्की कर रहा है, प्रत्येक क्षेत्र में ही।एक ओर जहाँ हम चाँद पर पहुंच कर विकास के…

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प्लास्टिक के फुल

प्लास्टिक के फुल शिखा की आज क्लास नहीं थी। लेकिन तब भी वह आज कॉलेज आई थी। स्टाफरूम में अपना बैग रखकर वह बैठ गई थी। ये ऑल गर्ल्स कॉलेज’ है और ज्यादातर प्राध्यापिकाएँ महिला ही हैं। इकक्‍्का-दुक्का ऑफिस स्टाफ, कम्प्यूटर डाटा विशेषज्ञ और अर्थशाक्त्र के प्रोफेसर डॉ. भगत को छोडकर। जब उसने कॉलेज ज्वाइन…

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विनायक पूजन

विनायक पूजन तीज त्यौहार की रौनक कुछ ऐसी आई , संग पार्वती गजानन लाई। कितनी अद्भुत लीला है, बरसो बाद ये नज़ारा है। ना ही ढोल और ताशे है, ना ही बाप्पा का नारा है। सूनी आंखें पंडाल नदारत, मंदिर में मीलों की सूनी कतार नदारत। ना वो मोदक ना वो वेंडी , मूर्तिकारो के…

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विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर

विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर जब पहली बार वातायन से जुड़ने वाली थी तो दिव्या जी से बात हुई, शब्दों में खरापन और स्नेह दोनों एक साथ थे, और ऐसा बहुत कम होता है।वैसे दिव्या जी के कई गुण हैं जो परस्पर विरोधाभास लिए प्रतीत होते हैं पर बहुत ही सरलता से उनमें समाहित हैं,चाहे…

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