आतंक

आतंक घर के कोने में पड़ा मकड़े का जाला,देता है गवाही, कि वर्षों से यह मकान खाली पड़ा है, आस पास के दीवारों पर पड़े खुन के छींटे, धूल की मोटी परतों के बावजूद, उसे साफ़ – साफ़ दिख पा रहे हैं। नन्हीं गुड़िया सी वह, चैन की नींद सो रही थी, अपने नर्म गर्म…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- बीजू पटनायक

बीजू पटनायक रत्नगर्भा  भारत भूमि ने अपने गौरव के अनुरूप अनेक मानव रत्नों को जन्म दिया है जिनकी कीर्ति अक्षुण्ण रहेगी वरन्  यूँ कहें कि आगामी समय में वे प्रेरणा के स्त्रोत्र बन वांछनीय मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम होंगे। ऐसे ही एक असाधारण व्यक्तित्व का नाम बीजू पटनायक है । वे एक सच्चे स्वतंत्रता…

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दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू

दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का नाम सिर्फ साबरमती आश्रम से ही नहीं जुड़ा है ।यह बात शायद काफी लोगों की जानकारी से अछूती हो सकती है। बात कुछ यूं निकली और जब मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में बुजुर्गों के बीच सिमट कर रह गई। बापू का लगाव और…

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लौ बन कर मैं जलती हूँ 

लौ बन कर मैं जलती हूँ      दीपक बन जाएँ यादें पुरानी लौ बन कर मैं जलती हूँ दो हज़ार बाईस बस था जैसा भी था जैसे तैसे बीत गया कुछ अच्छा होने की आशा में ना जाने क्या क्या रीत गया पाँव पखारूँ अश्रू के गंगाजल से ,लो अब मैं चलती हूँ दीपक…

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सूरज की ऊर्जा.. बरगद की छांव .. मेरे पापा

सूरज की ऊर्जा.. बरगद की छांव .. मेरे पापा सूरज कभी भी अपने आने का शोर नहीं मचाता, वो तो चुपचाप पूर्व दिशा में प्रकट हो जाता है और उसी से सम्पूर्ण विश्व ऊर्जावान हो उठता है। विशाल बरगद का वृक्ष कभी भी शोर मचा कर अपनी विशालता का बखान नहीं करता, उसकी उपस्थिति ही…

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“नारी तुम”

“नारी तुम” हम नारी हैं, एक शक्ति हैं, इस गौरवशाली देश के, सदियों से देश का गौरव हैं, सदैव सर्वोच्च धरोहर हैं, इस जीवन को व्यर्थ न करो, नारी जीवन को सार्थक करो, हिम्मत को अपना साथी बनाकर, हर मंजिल को फतह करो, उठो लड़ो और आगे बढ़ो, हर संकट का हरण करो, नारी हैं…

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बारिश

बारिश!! शनिचरी को बारिश पसंद नहीं है! ये बुड़बक बारिश जब -जब आता है। वह खेत खलिहान घूमने नहीं जा पाती है। शनिचरी को बारिश पसंद नहीं है! मे मे करती उसकी सभी..बकरियाँ घर वापस आ जाती हैं बस एक झोपड़ी है फूस की उसमें वह रहेगी या उसकी बकरियाँ शनिचरी को बारिश पसंद नहीं…

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मेरे यादों में भागलपुर

मेरे यादों में भागलपुर गंगा किनारे बसा भागलपुर बिहार का एक साधारण सा शहर पर मेरे लिए बेहद महत्व पूर्ण …..मेरे पापा माँ की शादी भागलपुर में १९५९  जून में हुई थी जब नाना वहाँ मजिस्ट्रेट थे .पापा की पहली नौकरी टी एन बी कोलेज भागलपुर में ही हुई और उनकी पहली संतान यानि मेरा…

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