ये विषाणु

ये विषाणु कुछ कह रहा है ये विषाणु : मैं कारण भी परिणाम भी, बरसों से धुंधलाये नयनों से जो आज हुआ है नज़ारा, निर्मल नीलाम्बर , सुंदर प्यारा, दिए जा रहा प्रमाण भी। जीवन के पांचों मूल तत्वों से किया कितना ही खिलवाड़, बन्द कर दिया सघन चिकित्सालय के वार्ड। पिता अंतरिक्ष को ही…

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दिव्या जी को जितना मैंने जाना

दिव्या जी को जितना मैंने जाना मिलना मिलाना कहते हैं ईश्वर के हाथों का खेल है और जीवन के किस मोड़ पर किसी ऐसी शख्सियत से भेंट करवा दें कि लगे जैसे आपको तो बहुत पहले से जानते हैं| प्रवासी हिंदी साहित्य लेखन की प्रतिनिधि साहित्यकार जिनका रचना संसार बहुआयामी है, सुश्री दिव्या माथुर जी…

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साड़ी वाला दिन

साड़ी वाला दिन लैक्टो-केलामाइन,बोरोलीन,केयो-कार्पिन जैसी माँ के जमाने की चीजों की तरह ही माँ और मां की पोशाक में भी कोई अंतर नहीं आता कभी, यही मैं समझती रही सदा, क्योंकि माँ को हमेशा साड़ी में ही देखा । हां ! थोड़ा सा बदलाव तब नजर आता जब वो बाहर जाने की अलग साड़ी पहनतीं…

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बदलते स्वरूप में आज के पिता

बदलते स्वरूप में आज के पिता आज फादर्स डे है। माँ और पिता ये दोनों ही रिश्ते समाज में सर्वोपरि हैं। इन रिश्तों का कोई मोल नहीं है। पिता द्वारा अपने बच्चों के प्रति प्रेम का इज़हार कई तरीकों से किया जाता है, पर बेटों-बेटियों द्वारा पिता के प्रति इज़हार का यह दिवस अनूठा है।…

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पीतल

पीतल “सच कहता हूँ मुझे ज़रा भी याद न रहा” शाम के धुंधलके में एकाएक कौंधे निशा के सवालिया अंदाज पर पीयूष ने थोड़ी हैरानी के साथ अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा। “पूरे चार साल बाद आए हो इसके बाद भी” निशा ने बनावटी गुस्से से आँखे तरेंरी। “बस यही तो ग़लती हो गयी,मुझे ज़रा…

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मज़दूर

मज़दूर हालातों से होकर मजबूर ही बनता है कोई मज़दूर पेट की आग बुझाने को ही रहता है घर से कोसों दूर करता है मेहनत इतनी पड़ जाते हैं छाले हाथ पांवों में रहता है फिर भी वो सदा तनाव और अभावों में गर इस जहां में मज़दूर ना कोई होता ना होती गगनचुंबी इमारतें…

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अंतस् का संवाद …

अंतस् का संवाद … तेरा तेरे अंतस् से होता हुआ संवाद हूँ ! या कह लो मैं शिक्षक हूँ , या कहो उस्ताद हूँ ! अंभ अगोचर पथ कंटकमय , हिय तनू आक्रांत तो सत्य सनित मैं संबल सा नित काटता अवसाद हूँ ! मैं ही गीता की थाती हूँ , धौम्य का भी रूप…

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जीना सिखाती ज़िन्दगी

जीना सिखाती ज़िन्दगी आज पहली बार अज़ीब सी मनःस्थिति है। लोग न जाने कैसे बड़ी बड़ी बातें कर लेते हैं किसी के बारे में भी मेरे साथ कभी भी कोई बुरा व्यवहार करता है तो मुझे बुरा लगता है। कोशिश रहती है कि मेरी तऱफ से कभी कोई आहत न हो।पर जब अति हो जाती…

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मां की ममता

मां की ममता माँ मेरी माँ तूँ ममता की मूरत है, निश्छल और प्यारी हसीं तेरी सूरत है, वो एहसास आज भी मेरे पास है….. जब तूँ मुझे हर पल अपने आँचल में ही छुपा कर रखना चाहती थी, क्यूंकि तुम्हे डर था की किसी की नज़र न लग जाये मुझे,… मैं बड़ी हो गयी…

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