शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में

शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में “मुझे क्या गर्व हो ,अपनी विभा का, चिता का धूलिकण हूँ, क्षार हूँ मैं। पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं।” कौन है ऐसा स्वपरिचय देता हुआ? अरे वह तो ,सरस्वती का वरद पुत्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाम जिसका हुआ। ‘राम’ को धारण…

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Collect the Miracles

Collect the Miracles The night is crawling Up to my bed, And “King of Queens” Is all I’ve said. The lights of Manhattan Are on my screen, The jazz is cool, And the river clean. The palm tree’s swaying Behind my back, So all I’m saying Is: “There’s nothing I lack!” Wife and child, Home…

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दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ??

दसवें दिन ‘माँ दुर्गा’ क्यों नहीं ?? हर बार नवरात्र समाप्त होते ही दसवें दिन ‘श्रीराम’ एक नायक के रूप में उभरकर सामने आते हैं, और ‘रावण’ खलनायक के रूप में पेश किया जाता है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी देखा जाता है। मैंने शायद एक-दो बार ही रावण…

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शादी एक गुनाह

शादी एक गुनाह अभी पूजा करने के लिए आसन बिछा कर शांत चित्त होकर बैठी ही थी कि बाहर दो महिलाओं की तेज़ आवाज़ में बात करने की चिरपरिचित आवाज़ आने लगी। फ़िर भी उधर से अपना मन हटाकर मै पूजा करने लगी थोड़ी देर के बाद उन दोनों में से एक महिला ज़ोर ज़ोर…

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खनक चूड़ियों की

खनक चूड़ियों की माँ, आज खो गयी हूँ तुम्हारी यादों में लेटी हूँ कुछ पल सुकून से तुम्हारी यादों को समेटे अपने अंतर्मन में। मुझे याद है जब मैं छोटी थी मुझे परियों की सी फ्रॉक पहना बालों में रिबन और आँखों में काजल लगा मुझे प्यार से निहारती थी, और इस डर से कि…

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गृहस्वामिनी इंटरनेशनल सुपर अचीवर्स

गृहस्वामिनी इंटरनेशनल सुपर अचीवर्स नाम – शार्दुला नोगजा उम्र – ५२ साल शिक्षा – मास्टर्स ( कम्पयूटेशनल अभियांत्रिकी), जर्मनी; स्नातक ( इलेक्ट्रिकल अभियांत्रिकी-ऑनर्स), कोटा, राजस्थान उपलब्धियाँ: प्रतिष्ठित हिन्दी कवयित्री; संपादक कविताई सिंगापुर की संस्थापक कविता की पाठशाला की सह-संचालक विश्वरंग महोत्सव २०२० की सिंगापुर फ़ेस्टिवल डारेक्टर अंतराष्ट्रीय साहित्य धारा सम्मान-२०१९ तेल और उर्जा क्षेत्र में…

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महामारी के दिनों में प्यार !

महामारी के दिनों में प्यार ! कुछ दिनों पहले एक खबर पढ़ी थी कि बिहार के सिवान के एक प्रेमी को मुंगेर में रहने वाली अपनी प्रेमिका याद आई तो वह लॉकडाउन को धत्ता बताते हुए पैदल ही निकल पड़ा मुंगेर की ओर। करीब तीन सौ किमी की पदयात्रा कर वह अपने गंतव्य तक तो…

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नवसृजन

नवसृजन “प्रकृति जैसे बदला ले रही है” टेलीविजन पे उद्घोषिका बारबार यह वाक्य बोले जा रही थी। यह सुनकर नियति सोच में पड़ गई “क्या माँ अपने संतानों से बदला लेती है?” परंतु परिस्थिति ऐसी तो ज़रूर है कि माँ अपने संतानों को मिल रहे कुकर्मों के फल को सकपकाकर, मूकदर्शक बन देख रही है।…

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प्रतीक्षा

    प्रतीक्षा     आभास पाकर धुंधली छवि का आकार लेता प्रिय रूप तुम्हारा द्वार की ओट से ताकती अपलक हर पल रहता है इंतजार तुम्हारा।   क्यों झेलती मैं विरह की व्यथा? जब बसे हो हृदय में कमल बन रोक लेती मैं तुम्हें आवाज देकर बस देख लेते गर तुम पलटकर।   प्राण…

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शाश्वत प्रेम

शाश्वत प्रेम मचलती-बलखाती नदियाँ, किनारों से टकराती नदिया, अपनी रवानगी में बहती चली जाती है मौन सागर में समाने को। खुद को खो कर कुछ पाना है, हार में ही जीत है यह कहती जाती है नदियाँ! गुलाब खिला है खुश्बूओं से सुवासित है। पर खो देता है अपनी सुगंध मुरझाने पर। आखिर वो खुश्बू…

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