आरोहण

आरोहण उस दिन पता नहीं मैं किस कार्य से कार्यालय की ओर गई थी । ऐसे अमूमन मैं कक्षाओं में ही उलझी रहती हूँ और कार्यालय की ओर जाना संभवतः तभी हो पता है – जब तक मुझे कोई आवश्यक कार्य न आन पड़े । बहुत याद करने पर भी उस दिन कार्यालय की ओर…

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स्त्री-शिक्षा पर गांधी जी की अवधारणा

स्त्री-शिक्षा पर गांधी जी की अवधारणा गांधी जी सदैव कहा करते थे कि एक आदमी को पढ़ाओगे तो एक व्यक्ति शिक्षित होगा। एक स्त्री को पढ़ाओगे तो पूरा परिवार शिक्षित होगा। “गांधीजी शिक्षा के माध्यम से महिलाओं की मुक्ति में विश्वास रखते थे और उन्होंने भारतीय समाज के कायाकल्प की दिशा में चलायी गयी राजनीतिक…

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माँ! अब मैं जान गई हूँ

माँ! अब मैं जान गई हूँ नन्ही-सी मुन्नी उम्र में छोटी है तो क्या हुआ चौदह-पंद्रह साल की छोटी-सी उम्र में उसको प्यार,लड़ाई और गालीगलौज़ सब समझ आता है। दिल्ली की एक गन्दी बस्ती में छोटी-सी खोली है उनकी। उस खोली में रहने वाले पांच प्राणी, माँ-बाबा,मुन्नी और उसके दो छोटे भाई नंदू और छोटू|…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-अमर्त्य सेन

डॉ अमर्त्य सेन अमर्त्य सेन अर्थशास्त्री हैं। इनका अध्ययन,चिंतन और अनुसंधान अद्वितीय है।बचपन से ही प्रतिभावान एवं कुशाग्रबुद्धि  थे। इनका जन्म 3 नवंबर 1933 में बंगाल के शांति-निकेतन  में हुआ था। सेन के पिता का नाम आशुतोष सेन था और मां का नाम अमिता सेन । अमर्त्य सेन के पिता ढाका विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र…

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गृहस्वामिनी दीपोत्सव

  गृहस्वामिनी दीपोत्सव गृहस्वामिनी परिवार के प्रत्येक सदस्य ने अपने परिवार के साथ साथ एक दूसरे से तस्वीरे शेयर कर मनाई दीपावली। एक दीप तुम प्यार का, रखना दिल के द्वार, यही दीप का अर्थ है, यही पर्व का सार।। दीप हृदय में कर गये, खुशियों का बौछार, आज प्रेम से हम करें, दीपों का…

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तू धरती पर ख़ुदा है माँ

तू धरती पर ख़ुदा है माँ, पंछी को छाया देती पेड़ों की डाली है तू माँ. सूरज से रोशन होते चेहरे की लाली है तू, पौधों को जीवन देती है मिट्टी की क्यारी है तू. सबसे अलग सबसे जुदा, माँ सबसे न्यारी है तू. तू रोशनी का खुदा है माँ, बंजर धरा पर बारिश की…

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लघुकथा- माँ के साथ फोटो

लघुकथा- माँ के साथ फोटो बड़ा ही अजीब आदमी है हमारा बॉस। अभी पिछले साल ही ट्रांसफर होकर आया था। उसका हर काम ही अलग निराला होता है, जाने कहाँ से उसे क्या विचार आ जाते हैं, बड़ी IIM से MBA करके आया हुआ है, उसकी नियुक्ति,ऑफिस में कर्मचारियों में बढ़ते हुए डिप्रेशन को कम…

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Τurbulence

Τurbulence Deafening sounds surround us Strong winds, painful… Anger overcomes our flesh Eternal the cycle of life We are immersed in absolute darkness We can not catch up The endless journey And the last hymn accompanies us Salvation in a Godless homeland is unbearable… Dr. Sofia Skleida Writer Athens, Greece 0

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उस अमवा की छांव में

अमवा की छांव में चल साथी चउसलकर बैठेंगे उस अमवा की छांव में,.. चल थोड़ा जीकर आते हैं हम यादों के गांव में,.. कैसे तुम मिलने आए थे शादी का करके इरादा,.. वो पल जब करके गए थे तुम जल्दी आने का वादा,.. वो मस्तियां वो शोर शराबा हमारी शादी के चाव में,.. चल थोड़ा…

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मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है

मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है बात उन दिनों की है जब मैं स्कूली छात्र था। गांव में सरकारी स्कूल की पढ़ाई का स्तर बहुत अच्छा था । हमारे सभी शिक्षक बेहद कुशल और ज्ञानवान थे। मुझे हिंदी अध्यापक ज्यादा पसंद थे क्योंकि उनका समझाने का ढंग बेहद सरल और रोचक था। एक दिन उन्होंने…

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