भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी

भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी टी.टी. कृष्णामाचारी का प्रारंभिक जीवन हमारा देश सन् 1947 में अंग्रेज़ों की अधीनता से स्वतंत्र हुआ। तब विविधताओं से सम्पन्न भारत के शासन संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से भारत के संविधान के निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। संविधान निर्माण के लिए…

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हम हिन्दुस्तानी की है शान

हम हिन्दुस्तानी की है शान प्यारी “मां” की बिंदी । सबकी प्यारी हिंदी।। भारत वर्ष में चारों ओर बोलने वाली अनगिनत भाषाओं में यह कहना की कौन सी भाषा अधिक व कौन सी कम बोली जाती है। उत्तर भारत में हमेशा से ही हिन्दी बोली जाती हैं कि । अनेकों लेखक ,कवि ,संतों ने हिंदी…

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मानसून स्किन केयर

मानसून स्किन केयर मानसून के मौसम में स्किन का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है क्योंकि तेज हवाएं त्वचा का तेल और नमी सोख लेती है। इन दिनों ग्लोइंग स्किन और खूबसूरती को बनाएं रखने के लिए पौष्टिक आहार, ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, उबटन के साथ नैचुरल तरीके भी इस्तेमाल करने की जरूरत है। आज हम…

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विषाद

विषाद बड़ी मुश्किल से वीजा मिला था – तीन महीनों के लिए। स्टुडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम में। ऑक्सफोर्ड की बात ही अलग है। तीन महीने काम, फिर एक महीने के लिए रश्मि आ जाएगी और वो थोड़ा घूम लेंगे। इंग्लैंड जाने का उसका बहुत पुराना सपना था और वह किसी भी तरह उसको हासिल करना चाहता…

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शार्दुला नोगजा की कविताएँ

शार्दुला नोगजा की कविताएँ     सर्वे सन्तु निरामया! दी रचा स्वर्णिम धरा ने अल्पना ओ समय के रथ ज़रा मद्धम चलो! है सकूरा और जूही की गली ओ सुगन्धा चाँदनी में न जलो!   जैसे पूर्वाभास से भयभीत हो जल छिड़क माँ मंत्र बुद-बुद बोलती मानवों के क्षेम को व्याकुल धरा गाँठ अदरक,  हरिद्रा…

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रजनीगंधा

रजनीगंधा कल सांझ का दिया जलाने गई थी तुलसी तले घर के आंगन में, तभी मस्त हवा के झोंके ने बिखेर दी रजनीगंधा की सुगंध पूरे आंगन में। वो रजनीगंधा जिसे तुमने बड़े प्यार से लगाया था हमारे आंगन में, और कहा था, “प्रिये गुजारेंगे गर्मियों की रातें इस प्यारे से आंगन में”। पर, तुम्हें…

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माँ मेरी अनमोल

माँ मेरी अनमोल माँ तू अनमोल है, जीवनदायिनी है । तूने मुझे अपने प्रेम से, अपने संस्कारों से, अपने ज्ञान से , अपनी ममता से सीचा । धरती पर गर्व से चलना तूने सिखाया, गुरु बनकर पहला ज्ञान तूने दिया । ईश्वर की तरह आखिरी सांसों तक हाथ मेरा थामे रखा, इतनी गहरी तेरी ममता…

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क्षमायाचना

क्षमायाचना हे नेता सुभाष बोस जी-तुम्हे शत शत नमन्न हमारा है। गुनाहगार ये है देश आपका-जिसने यूं मौन को धारा है।। तेरे क्रान्ति के जज़्बे को-और हम तेरे साहस को भूल गए। हम तो उन्हे भी भूले हैं-जो हंस हंसकर फांसी झूल गए।। आज़ादी के दिवानों का-नही हमने है कोई प्रतिकार किया। प्रतिकार तो क्या…

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मेरी कहानी

मेरी कहानी आत्मकथा ! कैसा विचित्र सा शब्द है ? आत्मा तो शाश्वत है, अनादि है अनंत है। स्वयं पूर्ण ब्रह्म है । उसकी क्या कथा हो सकती है? मेरी, तेरी, सारे जीव-जंतु की यहाँ तक कि पेड़ पौधों की भी आत्मा तो एक ही है । संभवतः बात हो रही है इस नीरजा नामक…

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