माँ

माँ मैंने कितना ही उसका दिल तोड़ा फिर भी वह मुझे दिल का टुकड़ा कहती रही मैंने कितना भी उसे बुरा भला कहा फिर भी वह मुझे सूरज चंदा कहती रही मैंने कितना ही उसे सताया फिर भी वह मेरी राहों के कंकड़-कांटे चुनती रही क्योंकि वह मां थी शक्ति भर उसने हर विपदा से…

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जीते भारतवर्ष

जीते भारतवर्ष बेटे की शहादत पर गर्व के साथ-साथ… दुःख और दर्द के अथाह सागर में डूबा परिवार, बहुत आक्रोशित है हर हाल में लेना चाहता है बदला दुश्मन देश से…. लेकिन फ़िर भी उस परिवार का पिता नहीं चाहता है वो युद्ध वो नहीं चाहता किसी और पिता के कंधों को सहना पड़े जवान…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी:भारतीय राजनीति के अजातशत्रु भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अपने नाम के ही समान अटल एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, प्रखर राजनीतिज्ञ, नि:स्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, सशक्त वक्ता, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। अपने प्रारंभिक जीवन में खुद का परिचय देते लिखते है – “हिन्दू तन मन, हिन्दू जीवन, रग रग हिन्दू…

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Deteriorating Situation In Sri Lanka

Deteriorating Situation In Sri Lanka It’s the unfortunate period of political and acute economic crisis in some countries of Indian Sub- continent. Afghanistan reverted to Taliban rule from 15th August 2021 but after so many months common man is struggling for fulfilling his basic needs and children too are suffering on nutrition front.Women in general…

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मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है

मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है बात उन दिनों की है जब मैं स्कूली छात्र था। गांव में सरकारी स्कूल की पढ़ाई का स्तर बहुत अच्छा था । हमारे सभी शिक्षक बेहद कुशल और ज्ञानवान थे। मुझे हिंदी अध्यापक ज्यादा पसंद थे क्योंकि उनका समझाने का ढंग बेहद सरल और रोचक था। एक दिन उन्होंने…

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फिर नयी सुबह तो आयेगी ‌

फिर नयी सुबह तो आयेगी ‌ दिसंबर की शीत लहर और एक वायरस ने चीन के वुहान शहर को अपने आलिंगन में ले लिया और फिर उसका आगोश कसता गया,बढ़ता गया।सुना गया कि वुहान की प्रयोग शाला में किसी छीना झपटी में यह वायरस लाखों लाख की संख्या में ज़मीन पर गिरा तो आदमी के…

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दिव्या माथुर की कविताओं में मानवीय चेतना के संघर्षों की आँच

दिव्या माथुर की कविताओं में मानवीय चेतना के संघर्षों की आँच कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में एक स्थापित हस्ताक्षर दिव्या माथुर समकाल की चर्चित कवयित्री भी हैं। नई कविता की टकराहटें हों या छंदबद्ध गीतों की मधुर तानाकशी, छोटी बड़ी बहर की ग़ज़लें या नज़्में, उनके अपने मौलिक व भावनात्मक बिम्ब-प्रतीक पाठक-मन को सहजता…

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मेरे अंतस के बुद्ध

मेरे अंतस के बुद्ध बुद्ध ना सिर्फ कपिलवस्तु में थे और ना ही मात्र कुशीनारा में, बल्कि वो तो सदैव से ही साधनारत थे मेरे भी मन की सुप्त गुफाओं में, क्योंकि महसूस करती हूं मैंने भी अक्सर वो असहनीय वेदना जो बूढ़े , बीमार और लाचार को देख कर उमड़ती है, गरीबों की दयनीयता…

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