चौथा कंधा   

चौथा कंधा      रवि को आशा थी कि इस महीने के बाद लॉक डाउन खुल जाएगा और जिंदगी फिर पटरी पर आ जाएगी। मगर 6 हफ्ते लॉकडाउन और बढ़ने से उसकी चिंता बढ़ गई । उसने साजिद से कहा “हमने क्या सोचा था क्या हो गया ? यदि लॉकडाउन इसके बाद भी बढ़ा दिया…

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मजदूर

मजदूर परेशानी हो या आँधी हो दिन रात श्रम करते हैं। बोझा सर पे लेकर चलते हम मजदूर नहीं थकते हैं।। फिर भी दो जून की रोटी को कभी कभी तरसते हैं। मैं मजदूर हूं हां बहुत मजबूर हूं बस यही कहते हैं।। ग़रीबी कहो या लाचारी , किस्मत की है मारी । तपते तन…

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बसंत लाया संदेशा प्रेम का

बसंत लाया संदेशा प्रेम का ज्ञान कला की देवी है देती यही वरदान। हुआ था अवतरण वीणावादिनी का दिया ब्रह्मा, विष्णु ने मां सरस्वती को बागेश्वरी, भगवती, शारदा नाम । जब शबरी ने पांवड़े बिछाये किया रघु का इंतज़ार, खाए जूठे बेर प्रभु ने है वही पावन मास महान। जिसमे मनाती है कुदरत भी अपने…

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अयोध्या की ऐतिहासिकता

अयोध्या की ऐतिहासिकता   अयोध्या की ऐतिहासिकता को समझने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि अयोध्या शब्द “अयुद्धा” का बिगड़ा हुआ रूप है ।अयोध्या के अस्तित्व का इतिहास आरंभ होता है सूर्यपुत्र वैवस्वत मनु द्वारा इसे बसाए जाने से। विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ रामायण में उल्लेख है कि — अयोध्या नाम नगरी तत्रासीत लोक…

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जिंदगी एक एवरेस्ट है

  जिंदगी एक एवरेस्ट है एवरेस्ट के शिखर पर फतह पाने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ,सही महिलाओं के लिए एक आदर्श व प्रेरणास्रोत हैं। उनके अचीवमेंट के पीछे उनका निरंतर संघर्ष, प्रयास, मेहनत, लगन और चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और साहस के करने की प्रकृति के कारण ही संभव हो पाया है…

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माँ! अब मैं जान गई हूँ

माँ! अब मैं जान गई हूँ नन्ही-सी मुन्नी उम्र में छोटी है तो क्या हुआ चौदह-पंद्रह साल की छोटी-सी उम्र में उसको प्यार,लड़ाई और गालीगलौज़ सब समझ आता है। दिल्ली की एक गन्दी बस्ती में छोटी-सी खोली है उनकी। उस खोली में रहने वाले पांच प्राणी, माँ-बाबा,मुन्नी और उसके दो छोटे भाई नंदू और छोटू|…

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गणतंत्रता दिवस

गणतंत्रता दिवस सोनू रोज़ ही सिग्नल पर कभी गुब्बारे, कभी पैन ,कभी मूँगफली बेचता दिख जाया करता था और मैं उससे बिना ज़रूरत के भी चीज़ें खरीद लिया करती । सोनू की उम्र लगभग दस साल होगी। एक अनकहा सा खिंचाव महसूस होने लगा था मुझे उसके प्रति। पर आज वह कहीं नहीं दिखा। हरी…

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माँ शारदे की रहे कृपा

माँ शारदे की रहे कृपा पीले पत्तों से झरे गम सारे खिली खुशियां बन नव कलियां आया लेकर नव हर्ष नव उत्साह बसन्त ये खिली पीली सरसों चमकी सूरज की लालिमा खिली कोपलें कोमल कोमल नई पत्तियों से हुआ श्रृंगार पेड़ों का बसंत आया बन खुशियों भरे नव जीवन का दूत माँ शारदे की रहे…

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