हमारी धरती, हमारा स्वास्थ्य

हमारी धरती, हमारा स्वास्थ्य मानव शरीर पंचतत्वों से निर्मित है। जल, गगन, समीर, अग्नि, और पृथ्वी यानि कि भूमि। इन्हीं पंचत्तवों से पैदा होकर हम फिर इन्हीं में विलीन हो जाते हैं। उपनिषदों में, वेदों में तथा सभी धार्मिक ग्रंथों में वातावरण – धरती, जंगल, वायु, नदी की चर्चा एक मित्र की तरह होती है।…

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माँ

माँ तुम देतीं देतीं और बस देती ही रहीं ममता दी, प्यार दिया, संरक्षण और अधिकार भी, पीड़ा सहकर मुस्कुराने की कला, लांछनों, आक्रोशों को पी जाने की अदा, माँ कहाँ से लाई इतना बड़ा दिल कि हमारी माफ़ न कर सकने वाली भूलों पर भी, कभी न दी सजा. चोट हमें लगती थी, भर…

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ग्रामीण परिवेश और मुंशी प्रेमचंद

ग्रामीण परिवेश और मुंशी प्रेमचंद गाँव के सजीव, जीवंत और सामयिक चित्रण करने में कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कोई सानी नहीं है। उस समय के परिवेश में गाँव एक अभिन्‍न अंग था व्यक्ति और समाज के जीवन में। कभी-कभी लगता है कि घड़ी को मुंशी प्रेमचंद के समय में मोड़ दिया जाए,…

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माँ

माँ मुझे याद है आपको अक्सर तीज त्योहार पर पूछती थी कि क्या चाहिए आपको और आपका हमेशा एक ही जवाब होता था…. मुझे मेरे सभी बच्चों की खुशहाली चाहिए। सच में माँ कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहती, वो ख़ुश होती है, बच्चों को उनके मन पसंद खाना खिलाकर, वो ख़ुश होती बच्चों के…

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आज बिरज में, होरी रे रसिया

आज बिरज में, होरी रे रसिया होटल के कमरे की बालकनी से समुद्र की मचलती लहरों में खोई बैठी थी कात्यायनी। शुभेन्दु ने आकर कहा ‘हम कल नहीं जा सकते गोवा से।’ लेकिन क्यों… हमारी टिकट तो कन्फर्म है। पूछा कात्यायनी ने। वो … राजभवन से यह आमंत्रण आया है। होली मिलन समारोह में आपका…

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पहली कविता

पहली कविता बचपन के भावाें को सहेज अपने नन्हें हाथाें से लिखी मैने तितलियाें पर एक कविता । खुशी से थिरकती ,उछलती पहुॅंची पिता के पास कहा- पिता देखाे मैंने की है रचना लिखी है मैने कविता , पिता ने हॅंसकर माथा चूम लिया कहा,मेरी लाड़ली है यह मेरी प्यारी सुन्दर कविता । यह सुन…

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हरेक औरत

हरेक औरत एक वक्त ऐसी जगह पहुँच ही जाती है हरेक औरत , जहाँ खुद चुनने पड़ते हैं उसे राह के काँटे खुद बुनना पड़ता है ख्वाहिशों के धागे खुद लिखना पड़ता है तकदीर का किस्सा खुद ढूँढना पड़ता है अपने हक का हिस्सा खुद सहलाने पड़ते हैं जखम तन के खुद सुलझाने पड़ते हैं…

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चीखती खामोशियाँ

चीखती खामोशियाँ उतारो ” साली”के सारे कपड़े और पूरी तरह निर्वस्त्र करके पेड़ पर बांध कर कोड़े से मारो , पंच परमेश्वर में से एक ने ये राय दी , ….तभी दूसरे ने कहा नही इसके मुँह काला करके पूरे गाँव मे घुमाया जाय , इसी तरह जिसके जो मन मे आया फैसला सुना रहे…

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