अनुत्तरित प्रश्न

अनुत्तरित प्रश्न एक बार फिर… नहीं..नहीं.. इस बार आने दो मुझे। .. क्यों नहीं आने देती हो… मैं आना चाहता हूँ… नहीं वह सब नहीं होगा जिसका तुम्हें भय है… तुम बहुत अच्छी हो। .. वह भी बहुत समझदार है… देखा नहीं उसने अपनी जिम्मेदारियां कितनी खूबसूरती से निभाईं हैं… … माना उसका विश्वास उठ…

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भई अपनी तो बस अब हो ली !!

भई अपनी तो बस अब हो ली !! धूल उड़ाना रंग लगाना धमाचौकड़ी खूब मचाना , रंगो से भरी पिचकारी से अपनों गैरों को रंग जाना, अब कहां वो बेफिक्री के रंग कहां अब दिल के हमजोली, अब कहां वो बचपन की होली वो मस्तीखोरी वो हंसी -ठिठोली!! मां के हाथ के वो दही बड़े…

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जब टूट गया था बांध 

जब टूट गया था बांध  कहीं दूर आंखों की पुतलियों के क्षितिज के पार जब टूट गया था बांध उस रोज…. नमक… समुद्र हो गया था.. मन डूबा था अथाह जलराशि की सीमाहीन धैर्य तोड़ती सीमाएं एक सीप के एहसासों के कवच में जा समायी थी और जन्म हो गया था एक स्वेत बिंदु मोती…

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मैं और मेरी दुनिया

मैं और मेरी दुनिया अति उल्लास से आत्मकथा लिखने बैठी थी । पहले तो लगा कि आज लॉटरी निकल गयी । स्व- कथा लिखनी है । लेखनी को गति मिल जाएगी । आज आत्म- जीवनी लिख सभी को बता दूंगी कि हमने किला फ़तेह कर ली । अपनी गाथा से चकाचौंध कर दूंगी दुनिया को…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिन्दी भारत की हर श्वास है, इक नवीन विश्व की आस है। तन में बहता अरुण रक्त है, हर भारतवासी इसका भक्त है। हिंदी प्रेम-विजय की बोली, मानवता पनपी इसकी झोली। यही ग्रीष्म-शीत ऋतु बसंती, माँ देवी के माथे की बिंदी। वर्ण से शब्द, शब्द से वाक्य, हर भाव में भाषा महान है।…

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नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा

  नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा भारतीय शिक्षा का इतिहास अगर देखा जाए तो यह तब से है जब से भारतीय सभ्यता का इतिहास है । सभ्यता के साथ साथ निरंतर भारत में शिक्षा की अविरल धारा प्रवाहित होती ही रही है । आज से पूर्व भारतीय समाज में शिक्षा की रूपरेखा जो थी…

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मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश

मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश मैं अपनी कर्मस्थली की ओर गतियमान देखती जाती हूं, प्रकृति के खुले आंगन में, अनेकों की संख्या में खड़े , पत्र विहिन शाखाओं को धारण किए हुए महुआ के वृक्षों को। मानो बांहें फैलाए खड़े हों, अपनी प्रेयसी के इंतजार में। पत्तियाँ सूख कर ताम्रपत्र बन गई हैं और…

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प्रभु राम की अयोध्यापुरी

प्रभु राम की अयोध्यापुरी अयोध्या में राम लला की घर वापसी पर प्रभु राम को समर्पित कुछ पंक्तियाँ आज अयोध्या धाम सजा है दीपों से राम हर दीप में जगमग करता है प्रभु का नाम धरती पुण्य दिशायें गुँजे देखो है आकाश पावन सरजू लहर कहे पुनीत हुआ ये काम । भारतवर्ष के इतिहास में…

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आवाज़ दो हम एक हैं !

आवाज़ दो हम एक हैं ! भौगोलिक सीमाओं से घिरे ज़मीन के टुकड़ों से सिर्फ देश निर्मित होते हैं। देश कोई भी हो, स्थायी नहीं होता। समय के साथ उसकी सीमाएं,उसका स्वरुप बनता और बिगड़ता रहता है। अपने ही देश का इतिहास देखिए तो इसका आकार और इसकी सीमाएं लगातार परिवर्तित होती रही हैं। असंख्य…

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फ्लोरेंस नाइटिंगेल

फ्लोरेंस नाइटिंगेल महिलाएँ केवल जन्मदात्री होकर पालन पोषण ही नहीं करतीं वरन जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने कड़ी मेहनत व त्याग से अपनी योग्यताओं को सिद्ध किया है। विश्व भर की ऐसी महिलाओं की लंबी सूची में एक नाम निस्वार्थ फ्लोरेंस नाइटिंगेल का भी स्वर्णाक्षरों में अंकित है। निज सुख को ताक पर रख…

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