आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम

आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड में आदित्यपुर क्षेत्र आता है l बीसवीं सदी तक आदित्यपुर में गाँव का वजूद मौजूद था l पेड़-पौधे थे, हरियाली थी और साफ-सुथरे जल स्त्रोत मौजूद थेl वर्तमान समय में आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में यह सब कुछ धूमिल…

Read More

धीरे धीरे रे मना

धीरे धीरे रे मना “अरे चुन्नू ! क्या सारा दिन खेलते रहोगे। आज तो सूरज उगते ही अपना क्रिकेट बल्ला सम्भाल लिया। पता है, बारह माही परीक्षा सर पर आ गई है।पढ़ाई के लिए स्कूल ने तुम्हें छुट्टी दे रखी है।और मैं भी तुम्हारे लिए घर पर हूँ, ऑफिस से छुट्टी लेकर। छः माही का…

Read More

आजादी के पहले का हिंदुस्तान चाहिए

आजादी के पहले का हिंदुस्तान चाहिए हमें कश्मीर नहीं पूरा पाकिस्तान चाहिए, आजादी से पहले का हिंदुस्तान चाहिए। हम हैं अमन के रखवाले युद्ध छेड़ते नहीं पर हम छेड़ने वालों को कभी छोड़ते नहीं तुमने जो की मक्कारी उसे कैसे सहेंगे पुलवामा का बदला अब हम लेकर रहेंगे हमें अब और नहीं बेटों का बलिदान…

Read More

नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन

नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन जिनका व्यक्तित्व सुगंधित फूलों का बगीचा है, जिनकी शाब्दिक अभिव्यक्ति में शांति का संदेश है, जिनकी कलम किसी अदृश्य को सदृश्य से जोड़ती है, जिनकी भावाभिव्यक्ति में उन्मुक्त कंठ की जादूगरी है , जिनके शब्दों में खो जाता है सुनने वाले का मन ऐसे स्वनाम धन्य है आदरणीय शांति…

Read More

रोज डे

रोज डे “अरे, रूको – रूको”, सुमेर ने बाईक रोक दी। “यह तुम्हारी कौन लगती है, बहन?” बीस से चालीस लोगों के हुजूम और उनके आक्रामक रुख को देख गुलाबी ठंढ़ के मौसम में भी सुमेर को पसीना आ गया, उसने बाईक रोकी और दोनों बाईक से नीचे उतर गए। “जी नहीं…”, हेलमेट उतारते हुए…

Read More

नैतिक शिक्षा की आवश्यकता

नैतिक शिक्षा की आवश्यकता भारत माता ग्राम वासिनी,आज आजादी के 70 साल बाद भी यह तस्वीर नही बदली है,आज भी गरीबों के आँसू को देख भारतमाता कराहती है ।अपने करोड़ों बच्चों के नग्न तन को देख क्षुब्ध होती है।कभी हमने गहराई से सोचा कि इतने दिनों बाद अपने ही शासन में भी क्यों हमारी स्थिति…

Read More

पर्यावरण संरक्षण

“पर्यावरण संरक्षण “ धरती कहे पुकार के जरा देख मुझे संतान मेरे अपने ह्रदय के प्यार से अपनी चक्षु की नमी से कब समझोगे मेरा प्रेम जो सदा है समर्पित तुम्हारे लिए सदियों से और तुम लुटते हो मेरा सौन्दर्य मेरी मुस्कान चीर देते हो मुझे मेरी ये पीड़ा जो समझोगे कभी मैं हूँ इंतजार…

Read More

सम्मान

सम्मान कुली ने मनोरमा से रुपये लिए और अपनी पहली बोहनी को मस्तक पर लगाकर ट्रेन से नीचे उतर गया | खुशी के कमल मन में सजाए मनोरमा पहली बार छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इलाहाबाद से दिल्ली जा रही थी | पास वाली सीट पर बैठा युवक मोबाइल में न…

Read More