बस इतना सा

बस इतना सा नाम – सीमा भाटिया जन्मतिथि – 5 फरवरी, 1969 शिक्षा – स्नातकोत्तर (हिन्दी) लेखन की विधाएँ – गद्य और पद्य दोनों में प्रकाशित पुस्तकें – सांझा संग्रह_ संदल सुगंध, लम्हों से लफ्ज़ों तक, सहोदरी सोपान, अल्फाज़ ए एहसास (काव्य संग्रह) सफर संवेदनाओं का,आसपास से गुजरते हुए, लघुतम-महत्तम, सहोदरी लघुकथा २, लघुकथा कलश,…

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बचपन और बारिश

बचपन और बारिश याद आता है मुझको अपना गुज़रा ज़माना वो बारिश का मौसम और बचपन सुहाना स्कूल में रेनी डे होने पर मेरा खुश हो जाना रास्ते में फिर छप छप करते हुए आना छींटे पड़ने पर लोगों का बड़बड़ाना फिर साॅरी बोल मेरा जल्दी से भाग जाना घर आकर बारिश के पानी से…

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प्यार

प्यार प्रेम प्यार इश्क़ उल्फत शब्द अनेक , मतलब एक, अनुभूति एक, अभिव्यक्ति अनेक। ईश्वर से प्यार, एहसास ए उल्फत खुदा से, देता है सुकून महफ़ूज़ रहने का अहसास। एक माँ का प्यार, दुलार, ममत्व, वात्सल्य से भरे आँखों से कर देता है व्यक्त, शब्दों का नहीं है मोहताज। एक शिशु का प्यार, अस्फुट ,…

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मज़दूर की बेटी 

मज़दूर की बेटी विनायक अंकल आप मेरे पापा बनोगे? शैली के अप्रत्याशित सवाल से बुरी तरह से हड़बड़ा गए थे विनायक जी अरे बेटा मै तुम्हारे पिता जैसा ही हूँ ख़ुद को संयत करते हुए विनायक जी ने ज़वाब दिया। पिता जैसा होने में और पिता होने में काफ़ी फर्क़ होता है अंकल शैली की…

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प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है

प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है बलि देहाती, कर्जा वामन लात है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है आंगुर-आंगुर दाम जोड़ता बीज उधारी कितनी आई ट्रेक्टर का भाड़ा कितना है डीज़ल की कितनी भरवाई गिरवी कटने से पहले उत्पाद है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है नए आंकड़े, नई रिपोर्टें भूख रेख…

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नागरिकता संशोधन कानून

नागरिकता संशोधन कानून   नागरिकता संशोधन कानून के बारे पढें और समझे । एक बहुत बड़ी भ्रांति फैलाई जा रही है कि यह बिल माइनॉरिटी के खिलाफ है, यह बिल विशेषकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है।किसी के बहकावे में ना आएं।हम एक हैं हमें कुछ राजनीतिक दलों के बहकावे में नहीं आना है। नागरिकता (संशोधन)…

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महिला सशक्तिकरण/सक्षमीकरण

महिला सशक्तिकरण/सक्षमीकरण वैसे भी महिला सशक्तिकरण पर लिखना ही अपने आप को “अबला” साबित करना है, हमे अपने आप पर लिखना ही एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है.. क्यों?? लिखने पर पाबन्दी नही है, खुब लिखे पर,खुद के लिए दया, विफल नारी, आश्रित,कहकर मत लिखिए, “नारी”ईश्वर की अनुपम और सर्वश्रेष्ठ कृति,सृजन करने वाली,और जब वह सृजन…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर

विरोधाभास की विलक्षणता: दिव्या माथुर जब पहली बार वातायन से जुड़ने वाली थी तो दिव्या जी से बात हुई, शब्दों में खरापन और स्नेह दोनों एक साथ थे, और ऐसा बहुत कम होता है।वैसे दिव्या जी के कई गुण हैं जो परस्पर विरोधाभास लिए प्रतीत होते हैं पर बहुत ही सरलता से उनमें समाहित हैं,चाहे…

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रुदाली-गुलाबो

“रुदाली-गुलाबो” रुदाली अपने समय की चर्चित फिल्म रही है। फिल्म देखने वालों को पता है कि राजस्थान में रुदाली उन महिलाओं को कहा जाता है जो रईस लोगों के मरने पर रोने का स्वांग करती हैं। जो जितना बड़ा स्वांग रच सके वह उतनी बड़ी रुदाली , और जिसके न रहने पर रोने का स्वांग…

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