एकल परिवार

एकल परिवार   नीलेश बहुत अच्छी कंपनी में मैनेजर था। वह अपनी सहकर्मी रीटा को पसंद करता था। माता-पिता भी दोनों की शादी के लिए तैयार हो गए… और रजिस्ट्रर्ड शादी करवाकर 150-200 लोगों को पार्टी दे दी। क्योंकि माता-पिता दोनों ही अपने नौकरी एवं कार्यक्षेत्र में व्यस्त होने की वजह से शादी की व्यवस्थाओं…

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उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है

उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ? सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोता क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ?…

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Christmas Eve

Christmas Eve Long ago, in a far off land On a cool dark night A sudden music of choir grand A surprising wondrous sight! The angels delivered a message – A message to humankind A message in heavenly language From the heavenly Father kind: ‘Let there be Peace on earth Let humanity sing and rejoice…

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महामारी में भी ओछी राजनीति

महामारी में भी ओछी राजनीति एक बड़े शायर का शेर है लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे, पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे। उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद, और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।। महाभारत काल में अखंड भारत के मुख्यत: 16 महाजनपदों कुरु, पंचाल, शूरसेन,…

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भाषा किसकी है?

भाषा किसकी है? 14 सितम्बर यानी ‘हिंदी दिवस’ फिर आने वाला है। इस कोरोना महामारी में कहाँ नया बैनर बनेगा? पिछले साल के बैनर में 2019 में केवल 19 को 20 करके काम चलाया जा सकता है, पर्यावरण की दृष्टि से संसाधन भी बचेगा, दफ्तर के बड़े बाबू ने सोचा। हर साल की गिनी-चुनी प्रतियोगिताएं…

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ईश्वर की चेतावनी

ईश्वर की चेतावनी ये कोरोना एक रोग नहीं जो विषाणु से फैला है, ये कुदरत का कहर है जो जानलेवा और विषैला है!! ये हम सबका फैलाया जहर है जो एक दिन का प्रतिफल नहीं सदियों का नतीजा है विष जो हमारे दिल में था जो आज जाकर निकला है!! कांप गए हम बस इतने…

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डॉ विनीता कुमारी की कविताएं

  डॉ विनीता कुमारी की कविताएं 1.भारत की नारी कवि नहीं, कवयित्री नहीं, भारत की नारी मैं हृदय की बात सुनाती हूं। वैदिक जीवन – दर्शन का, भारत के वीर शहीदों का, वतन के राष्ट्रगीतों का, मैं वंदनगान करती हूं। भारत की नारी मैं, हृदय की बात सुनाती हूं। गोरे घर छोड़ गए, लोगों को…

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प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

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बड़े शहर का छोटा सा गांव

बड़े शहर का छोटा सा गांव नई दिल्ली में छोटा सा गांव क़ुतुब मीनार से मात्र कुछ मिनट की दूरी पर। कीकर के पेड़ मीलों तक, साथ में चारों ओर हरियाली।सड़के भी २० बरस पहले निकली ,चारो ओर से घनी हरियाली में फैला हुआ।जहां आबादी संभ्रांत परिवार जाटों की ,अपने में मस्त होकर जीने वालों…

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‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’

‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’ सावन के मौसम में बड़े पैमाने पर वर्षा होती है जिसे मानसून कहा जाता है. “मानसून में तीन अलग-अलग कारक शामिल होते हैं – हवा, जमीन और समुद्र। मानसून का वर्णन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। ऋग्वेद और सिलप्पाधीकरम, गाथासप्तशती , अर्थशास्त्र, मेघदूत, हर्षचरित्र जैसे…

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