कोरोना और जीवनशैली

कोरोना और जीवनशैली मनुष्य की जीवनशैली का इतिहास बहुत ही प्राचीन है।आदि मानव से लेकर आज तक मनुष्य ने जीवन की जुगुप्सा और जिज्ञासा की आग में अनेकानेक संघर्षों की आहुति दी है।जीवन की यात्रा जिजीविषा का पर्याय है।मनुष्य का जीवन अन्य प्राणियों से भिन्न है यह आदिकाल में ही स्पष्ट हो गया था,जब मनुष्य…

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“आपदा आन पड़ी “

“आपदा आन पड़ी “ विकट आपदा आन पड़ी ,सकल विश्व घबराया है काल का भेष रख कर के , कोरोना वायरस आया है वुहान की पैदा इश ये, विश्व के लिए बड़ा खतरा है छूने से होते संक्रमित ,बीमार भयंकर करता है भीड़ से दूरी बना कर, बचानी अपनी काया है काल का भेष रख…

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बदलाव बचाव के लिए

बदलाव बचाव के लिए हर जगह कोरोना वायरस का ही नाम है। इसकी अभी कोई भी दवाई नहीं इजाद की गई है ।पहले भी वायरस हुआ करते थे। कुछ मजबूत वायरस जैसे कि चिकन पॉक्स और पोलियो की हुए हैं जिन्हें खत्म करने में सालों लग गए और उनकी वैक्सीनेशन तैयार हो पाई। इसी तरह…

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मुहिम

मुहिम रेस्तराँ की चौड़ी खिड़कियों से भूरी पहाड़ी दिख रही थी। पेड़ों से विहीन ये पहाड़ियाँ मनुष्य के लालच को आईना दिखा रही थी। जंगल कटने से अल्मोड़ा जैसी जगह में भी पानी की किल्लत हो गई थी। बाथरूम में “पर्यावरण की रक्षा करें” का कार्ड था-कम पानी इस्तेमाल करें। ये आने वाली भयावहता को…

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“राष्ट्रपिता”

“राष्ट्रपिता” किसने जाना था कि सत्य के प्रतीक बन जाओगे अहिंसा के मसीहा भारत की तकदीर बना जाओगे ! किसने समझा था तुम्हे एक दुबली सी काया देगा भारत को आजादी का स्वरुप ! आज नत हम भारतवासी तुम्हारी अद्भुत सीख को याद करे बापू समय के इस चक्र में संसार को समझना होगा संकल्प…

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नारी : कल , आज और कल

नारी : कल , आज और कल नारी ….ईश्वर के समान व्यापक और अपने आप में सम्पूर्ण एक ऐसा शब्द है , जिसमें समाहित है जीवन चक्र के गतिशील रहने के समस्त कारण । सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन , गति और अस्तित्व इन्हीं दो शब्दों से है । ईश्वर जो हमारे अंदर और बाहर की…

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चिट्ठिया हो तो

चिट्ठिया हो तो …….. सुजाता ने कमरे की इकलौती खिड़की खोली। पिछले तीन दिनों से सुजाता इसी कमरे में ही पड़ी रहती है। इस पीली तीन मंजिली इमारत में खिड़कियाँ और दरवाजे बहुत कम हैं। सुजाता जब यहाँ तीन रात पहले आई थी, तो रात आठ बजे का समय था। टेबल के पीछे एक दुरूस्त…

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अयोध्या:इतिहास के आईने में

अयोध्या:इतिहास के आईने में हे राम, जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकाव्य ! तुम्हारे बस की नहीं उस अविवेक पर विजय जिसके दस बीस नहीं अब लाखों सर – लाखों हाथ हैं, और विभीषण भी अब न जाने किसके साथ है. इससे बड़ा क्या हो सकता है हमारा दुर्भाग्य एक विवादित स्थल में…

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यूँ रखें अपने दिल का ख़्याल

यूँ रखें अपने दिल का ख़्याल   अस्पताल में व्यस्त दिन के बाद ओपीडी और सीसीयू में हृदय रोगियों का इलाज करने के बाद रात करीब 10 बजे घर वापस आ सके। अपना डिनर करते समय मुझे अस्पताल की आपात स्थिति से फोन आया कि एक 35 वर्षीय पुरुष को दिल का दौरा पड़ा है…

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क्षितिज की ओर

क्षितिज की ओर     मुग्ध हो कर देख रहा हूं और बह रहा हूं अस्तित्व की बाढ़ में तेरी अविजित मुस्कान इधर झनझनाती तंत्रियों में शुरू सामूहिक गान।   तू झुलसा रही मेरे अहं को मेरी दुर्बलता को उमड़ रहा न जाने क्या झुकती नज़र, कभी उठती नज़र पर इसके माने क्या? फुलवारी कुछ…

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