स्वच्छता तन-मन और उपवन की

स्वच्छता तन-मन और उपवन की उठो चलो आगे बढ़ो, कि विश्व तुझको देखता । वक्त की है पुकार ये, फिर कौन तुझको रोकता? स्वच्छ बना इस धरा को, करके योगदान तुम । बन जा प्रहरी इस उपवन का, खड़े जिस दिशा में तुम। स्वच्छता से स्वस्थता आएगी, हमारे भारत देश में। बढ़ेगा हर कदम फिर,…

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आरोहण

आरोहण उस दिन पता नहीं मैं किस कार्य से कार्यालय की ओर गई थी । ऐसे अमूमन मैं कक्षाओं में ही उलझी रहती हूँ और कार्यालय की ओर जाना संभवतः तभी हो पता है – जब तक मुझे कोई आवश्यक कार्य न आन पड़े । बहुत याद करने पर भी उस दिन कार्यालय की ओर…

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“आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “

 ” आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “ आजादी के बहत्तर साल , बोल कर देखिए , एक सुकून और गर्व का एहसास होगा , 15 अगस्त 2019 को हमारा देश आजादी की बहत्तरहवीं वर्षगाँठ मनाएगा। बहुत मुश्किलों और संघर्षों के दौर से निकल कर आज हम उस जगह हैं जहाँ हम ये कह सकते हैं…

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लॉकडाउन और कोरोना वारियर्स की चुनौतियां

लॉकडाउन और कोरोना वारियर्स की चुनौतियां हम होंगे कामयाब,हम होंगे कामयाब एक दिन मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,हम होंगे कामयाब एक दिन आज पूरा विश्व कोरोना नामक प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, और इस पर विजय पाने के लिए संघर्षरत देशों के लिए एक कठिन चुनौती बन गया है, चीन से निकल…

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ऋचा वर्मा की कविताएं

ऋचा वर्मा की कविताएं १.इस बार का बसंत इस बार के बसंत में खिले पलाश ने, बिल्कुल नहीं लुभाया हमें ये पलाश के फूल लगते हैं छींटे से रक्त के, पत्रविहिन पलाश के गाछ, मानो देहविहिन बहते लहू, न है इंतजार अमलतास के पीले फूलों का, जो चमका करतें हैं सोने की तरह, आजकल भय…

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शहीद-ए-आजम

शहीद-ए-आजम ” वेदना में एक शक्ति है, जो दृष्टि देती है। जो यातना में है, वह द्रष्टा हो सकता है।”- यह अज्ञेय द्वारा रचित “शेखर एक जीवनी- भाग एक” पुस्तक की पहली पंक्ति है। सत्य है, वेदना मनुष्य को अन्याय का प्रतिकार करना, उसके विरुद्ध मोर्चा लेना और कभी -कभी जान की कीमत लगा कर…

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वे

वे   दो विपरीत  बहते छोरों को अचानक गठबंधन में बाँध दिया गया ऐसे, जैसे कोई हादसा अचानक हो जाए न प्यार था न परिचय बस दो अजनबी… न वो सूरज था न वो किरन न वो दिया था न वो बाती। न वो चाँद था और न वो चाँदनी एकदम विपरीत थे वे दोनों……

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- श्यामाप्रसाद मुखर्जी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी व्यक्तिगत जीवन-श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल के प्रतिष्ठित परिवार में जन्म ।१९२१ में बी॰ए॰ किया। १९२६ में लंदन से लॉ किया। ३३ वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के कुलपति (कलकत्ता विश्व विध्यालय) बनने का गौरव प्राप्त किया। अभिभावक- आशुतोष मुखर्जी और जोगमाया देवी। जीवन साथी-सुधा देवी। संतान-अनुतोष,देबातोष,सबिता,आरती शिक्षा- लॉ कैरियर- स्वतंत्र…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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