राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर रामधारी सिंह दिनकर जिन्हें हम ‘जनकवि’ और ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से भी जानतें हैं और जो बिहार ही नहीं वरन् पूरे भारत के साहित्यिक आकाश में सूर्य के समान दैदिप्यमान नक्षत्र थें, हैं और रहेंगे… यथा नाम तथा गुण…. । यूं तो दिनकर की ख्याति एक वीर रस के कवि के…

Read More

शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में

शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में “मुझे क्या गर्व हो ,अपनी विभा का, चिता का धूलिकण हूँ, क्षार हूँ मैं। पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं।” कौन है ऐसा स्वपरिचय देता हुआ? अरे वह तो ,सरस्वती का वरद पुत्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाम जिसका हुआ। ‘राम’ को धारण…

Read More

और कितने कुरुक्षेत्र

और कितने कुरुक्षेत्र आज ऑफिस में बड़ी गहमा-गहमी थी। पूरे दो घंटे की माथापच्ची के बाद आकाश ने कम्पनी के बारे में एक प्रस्तुति तैयार की थी। उसे एक बढ़िया मौका मिलेगा अपनी प्रतिभा दिखाने का। दरअसल, ये कम्पनी नई ही बनी थी। चार साल पहले कनाडा से स्वदेश लौटे श्री मनोज बख्शी ने शुरु…

Read More

मुक्ति

मुक्ति नन्हीं के गांव में एक घर के आगे बड़ा-सा खलिहान था । शाम के समय उसके सारे संगी-साथी वहां जमा होकर खेलते थे। खलिहान वाले घर की लड़की भी उन बच्चों में शामिल थी। नाम था गंगा। गंगा उम्र में सब बच्चों से बड़ी थी। रिश्ते में वह किसी की बुआ लगती थी तो…

Read More

शत शत नमन

शत शत नमन मन में इन दिनों एक बड़ी शांत सी निश्चिंतता है, पितर पक्ष जो चल रहा है! जो चले गए , वो इन दिनों आ गए हैं थोड़े से और करीब। बस यह एहसास कि इन सोलह दिनों में वो आसपास हैं, आसान सी कर दी है जिंदगी । महसूस होता है कि…

Read More

मातृरुपेण हिंदी

मातृरुपेण हिंदी हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने ज्ञान-विज्ञान,वेद-ऋचाओं, और! कर्त्तव्यों का एहसास कराया, सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा, देश विदेश को जोड़े रखा,…

Read More

हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिंदी हमारी भाषा हैं। हिंद की परिभाषा हैं। हिन्दी हमारी संस्कृति हैं। संस्कार का सुविचार हैं पहले तो थी दबी-दबी सी। अब सिर ताने खड़ी हैं। सहमी सी हिंदी मेरी। आज सरपट दौड़ रही हैं। राह अपनी खुद बनाती, समृद्ध हो रही भाषा हैं। जुड़ रही है हिन्दी हमारी नई टेक्नोलॉजी से। क्षेत्रों…

Read More

हिन्दी और हम

हिन्दी और हम आज हिंदी दिवस है, इस दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गयी हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की राजभाषा घोषित किया था। हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए तत्कालीन भारतीय सरकार ने प्रतिवर्ष १४ सितम्बर,१९४९ को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का अनुरोध किया था। वर्ष…

Read More

सादा जीवन उच्च विचार

सादा जीवन उच्च विचार आज १४ सितंबर २०२० ,जब सम्पूर्ण देश हिंदी दिवस के रूप में माना रहा है।सभी के जहन में यह बात उठती है कि इसके पीछे कारण क्या था।आज बताते हुए हर्ष हो रहा है कि मेरे परिवार में मेरे पिताजी की तीसरे व सबसे छोटी बहन के ससुर जी की जन्म…

Read More

हिंदी साहित्य में ग्रामीण लोकप्रिय और कालजयी कहानियां

हिंदी साहित्य में ग्रामीण लोकप्रिय और कालजयी कहानियां आज 14 सितंबर यानी हिंदी दिवस है। हिंदी दिवस मनाने का औचित्य हिंदी के उपयोग को और अधिक बढ़ावा देने से पूर्ण होता है। हिंदी साहित्य अपनी सभी विधाओं में इतना समृद्ध है कि यहां पर उन सबका एक साथ जिक्र कर पाना संभव नहीं होगा। इसलिए…

Read More