मैं बोल रही हूँ

मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्‍म होने में एक घंटा और था। स्‍मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्‍छी खासी भीड़ थी। ज्‍यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्‍यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…

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कोरोना वाॅरियर्स की चुनौतियाँ

कोरोना वाॅरियर्स की चुनौतियाँ वैश्विक महामारी कोविड 19(कोरोना) ने संपूर्ण विश्व में उथल-पुथल मचा रखी है । विश्व शक्ति का प्रतीक माने जाने वाले, मेडिकल साइंस के महारथी, संपन्न, नामी देश भी इसकी विभीषिका के समक्ष ठिगने दिखाई दे रहे हैं।समस्त वैज्ञानिक प्रयोग,उन्नति नाकाफी साबित हो रहे हैं ।शेर की तरह दहाड़ कर पूरे विश्व…

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रीता रानी की कविताएं

रीता रानी की कविताएं 1.अनुपात – समानुपात किसी भी शोक को सभी ने अपने-अपने पाव में नापा , प्रविष्ट हुए सब अपनी- अपनी खोह में , दुख की कालिमा को देखने के लिए । थोड़ी देर के लिए शोक समानुपातिक हो गया , इस तरह व्यक्तिगत होकर भी वह सार्वजनीन हो गया ।   समाज…

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न्याय

न्याय शहर के पाॅश इलाके में बड़ी कोठी, गेट पर खड़े चौकीदार,घर में नौकर- चाकर, शान और शौकत, सजा हुआ बगीचा, किसी चीज की भी कमी नहीं, होगी भी क्यों ना, यहां के डी.एम का जो बंगला था।दरवाजे पर बड़ा सा नेम प्लेट लगा था सुनहरे तख्त पर काले अक्षरों में लिखा था “अनामिका चौधरी”…

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Awakening

Awakening conscience which flows through the veins doesn’t allow forgetting about oneself despite this you sleep with the hard sleep of Jonas you don’t dump the world on the other side of your eyelids you remain motionless dying while alive Izabela Zubko Poetess, journalist and translator Warsaw, Poland translate by: Anna Meysztowicz 0

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शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस एक सतत प्रक्रिया है विद्यार्थी और शिक्षक होना। एक श्रेष्ठ शिक्षक कल एक जिज्ञासु विद्यार्थी था।जिज्ञासा सीखने की अदम्य इच्छा है और जन्म से ही इस प्रवृत्ति के साथ हम धरती पर आते हैं। शिशु के सीखने की सतत क्रिया उसकी जिज्ञासा का ही प्रतिफल है।इसमें दो मत नहीं कि परिवार ही होता…

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आत्मिक प्रेम

आत्मिक प्रेम   राजमहल का उद्यान- प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों से होती हुई तितलियों की परिक्रमा, मधुप का गूँजन, सरोवर की शीतलता और शीतल मंद सुरभित वायु उस रमणी को याद करने पर मजबूर कर दिया, जिसकी चर्चा तीनों लोकों में है। निषध देश का राजकुमार नल अंतःपुर के उद्यान में…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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महात्मा गाँधी और उनकी प्रासंगिकता

  महात्मा गाँधी और उनकी प्रासंगिकता     परिचय.. मोहनदास करमचंद गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को वर्तमान गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले के मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी एवं उनकी माता का नाम पुतलीबाई था। वे अपने तीन भाईयों में सबसे छोटे थे।पिता ब्रिटिश राज में काठियावाड़…

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हिन्दी पर अन्य भाषा का प्रभाव

हिन्दी पर अन्य भाषा का प्रभाव अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां दिन भर में सिर्फ एक हिंदी की कक्षा होती है स्वाभाविक है कि बच्चे अंग्रेजी ही ज्यादा सुनते हैं और बोलते हैं . . इन बच्चों की जुबान पर हिगलिंश हावी हो गई है। एक भी वाक्य बिल्ला…

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