मैं बोल रही हूँ
मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्म होने में एक घंटा और था। स्मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्छी खासी भीड़ थी। ज्यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…