रोना मत 

रोना मत  सुबह-सुबह जाड़े की सुनहरी गुनगुनी धूप में रंजन जी अपने सफेद मुलायम शाल ओढ़े आराम कुर्सी पर बैठ चाय के आने का इंतजार कर रहे थे। मौसमी फूलों से पूरा बगीचा खिल रहा था। गमले करीने से सजे हुए थे। रंजन जी को बागवानी का बहुत शौक था, परन्तु नौकरी की वजह से…

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बचपन: उजला पक्ष

बचपन: उजला पक्ष उम्र के इस पड़ाव पर बचपन याद करना अच्छा लग रहा है। मेरा जन्म अपने बाबा के घर गोरखपुर में हुआ। हमारे बचपन में घर में खाने-पीने की सामग्री भरपूर होती थी मसलन दाल-चावल, आटा, दूध-दही मगर सजावट या प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं था। हम बहुत अमीर नहीं थे पर…

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एक पिता का संघर्ष

एक पिता का संघर्ष “बड़े भाग्य से बेटियाँ मिलती है।” ये कहते हुए माखनलाल जी अपनी पत्नी कमला के करीब बैठ गए। कमला :- “वो तो ठीक है मुझे खुद पहली सन्तान बेटी चाहिए लेकिन सासू माँ और ससुर जी वो तो लड़की का जन्म लेना बुरा समझते हैं।” माखनलाल :- “अरे चिंता ना करो…

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मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज

‘मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज’ इंसान की विनम्रता है कि पंचतत्त्वों से निर्मित अपने शरीर को वह मिट्टी मानता है,अपने आराध्यों की कल्पना भी वह मिट्टी से ही साकार करता है,किंतु इन मूर्तियों के लिए मिट्टी एकत्रित करना खासा मुश्किल भरा काम है। नवरात्र में जगतजननी मां दुर्गा की मूर्ति के लिए दस…

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लक्ष्मी 

    लक्ष्मी    बहुत प्यार करता था घनश्याम अपनी नई नवेली दुल्हन लक्ष्मी से और क्यों न करे, लक्ष्मी थी ही सर्वगुण – सम्पन्न। एक तरफ तो सास – ससुर का मान सम्मान रखती,मन भर सेवा करती तो दूसरी तरफ पूरे गांव में पहली मैट्रिक पास बहु थी ,पूरा गांव उसका आदर करता था।…

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डाॅ उमा सिंह किसलय की कविताएं

डाॅ उमा सिंह किसलय की कविताएं १.मैं धार हूँ नदिया की मैं धार हूं नदिया की रंग तरंग में बहती हूं संग संग दो किनारों के मैं बीच में बहती हूं है जटिल बहुत पथ ये अवरोध कई पग में धारा टकराती है हर संकट से मग में नदिया की सनक यही सागर से मिलना…

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औरत ,औरत की दुश्मन

प्रायः यह जुमला सुनने को मिल ही जाता है जब कभी किसी औरत को दूसरी औरत द्वारा प्रताड़ित या परेशान किया जाता है। काफ़ी लोगों का यह मानना है कि अधिकतर औरत ही औरत की परेशानी का कारण होती है। यदि हम आस – पास नज़र डालें और औरतों के प्रति हो रहे अपराधों के…

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जीवन और संघर्ष

जीवन और संघर्ष विश्वव्यापी कोरोना महामारी ने यह तो समझा ही दिया है कि स्वास्थ्य ही धन है।स्वास्थ्य के अभाव में सभी सुख सु्विधाएँ व्यर्थ हैं।स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का उपभोग कर सकता हैव इच्छित लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ लोग मौसम,खानपान व स्थान परिवर्तन से बहुत जल्दी प्रभावित…

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हिंदी ऐसी भी

हिंदी ऐसी भी “सुनिये, आप मेरा मोबाइल दुकान पर जाकर दिखा लाओ। इसमें बहुत दिनों से राहुल का फोन नहीं आ रहा। शायद अमेरिका का नेट यहाँ काम नहीं कर रहा।”, वेणु हाथ में लिए मोबाइल को किशोरजी को देते हुए बोली। “अरे वेणु..”, कहते हुए किशोरजी बोलते हुए चुप हो गए और मोबाइल लेकर…

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पिता एक उम्मीद

पिता एक उम्मीद पिता -चाँद सितारों में निखर उम्मीद की किरण बन जाते है। नई उम्मीद के साथ ख़ुशियों जहाँ बसा जाते हैं । पिता,पिता के प्यार से गूँजती सारा भु मंडल हैं । उदगार सजा रखा धरती मैया है । पिता- बच्चों के दिल किताबों में प्यार सजा रखा हैं । पन्ने की हरकत…

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