संस्कार

संस्कार वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीर पराई जाने रे.. नरसी मेहता का भजन नेपथ्य में कहीं चल रहा था । ” पर दु:खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे..” सरला बेन भी साथ में गुनगुनाने लगीं । मिहिका सामने बैठी अपनी वृद्धा विधवा माँ के चेहरे की रुहानियत और मासूमियत को…

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इश्क रूमानियत से रूहानियत तक

  मेरा मेहबूब नज़ाकत वो कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनपर हम मर मिटे हैं उनपर हमारा दिल है हारा हर मंज़र में वो दिखते है उनसे ही सब नज़ारा उन बिन सांस भी आए ना हमें है यह गवारा नज़ाकत कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनकी हसरतों के बूते ख्वाब रातों में…

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शादी एक गुनाह

शादी एक गुनाह अभी पूजा करने के लिए आसन बिछा कर शांत चित्त होकर बैठी ही थी कि बाहर दो महिलाओं की तेज़ आवाज़ में बात करने की चिरपरिचित आवाज़ आने लगी। फ़िर भी उधर से अपना मन हटाकर मै पूजा करने लगी थोड़ी देर के बाद उन दोनों में से एक महिला ज़ोर ज़ोर…

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बिन पानी सब सून

बिन पानी सब सून (जल संचय: एक परिचर्चा) “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून’- पानी रोमांस भी है, रोमांच भी है। पानी के बिना जीवन की कोई कहानी संभव नही है। मंगल ग्रह पर जीवन ढूँढ़ने निकले वैज्ञानिक भी पानी की ही तलाश कर रहे हैं। पानी यानि जीवन की अमूल्य धरोहर और जीवन…

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एक गुफ़्तगु

एक गुफ़्तगु जिंदगी के पल के साथ सोचूँ बैठु आज तुम्हें लेकर रूबरू गुलाबी इस ठण्ड की चटक धुप में थोड़ी देर…! हो हाथ में गर्म अदरक की कड़क चाय और उलझाऊँ तुम्हें कुछ सवालो के चक्रव्यूह में…! बाँटू कुछ तजुर्बे अपने और पूछूँ कुछ तुम्हारे तरीके जिंदगी के फ़लसफ़े पर करना चाहूँ एक गुफ्तगूं…!…

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नारी : कल , आज और कल

नारी : कल , आज और कल नारी ….ईश्वर के समान व्यापक और अपने आप में सम्पूर्ण एक ऐसा शब्द है , जिसमें समाहित है जीवन चक्र के गतिशील रहने के समस्त कारण । सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन , गति और अस्तित्व इन्हीं दो शब्दों से है । ईश्वर जो हमारे अंदर और बाहर की…

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Collect the Miracles

Collect the Miracles The night is crawling Up to my bed, And “King of Queens” Is all I’ve said. The lights of Manhattan Are on my screen, The jazz is cool, And the river clean. The palm tree’s swaying Behind my back, So all I’m saying Is: “There’s nothing I lack!” Wife and child, Home…

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पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें

पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें आओ मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हम हरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें। ग्लोबल वार्मिंग जो हो रहा भूमंडल नाशक है, पेड़ों के काटने से जो बनी स्तिथी नाजुक है. आओ मिलकर कोई उपाए हम त्वरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर…

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रूपांतर

रूपांतर सोचती है सारा काम निपटा कर ही जाए पर हो नहीं पाता उससे। बॉस के दिए फ़ाइलों की संख्या कम है पर बहुत कुछ निपटाना है उनमें। काम मिलता उसे ज़्यादा है, जानती है वह, क्योंकि ज़िम्मेदार है, कर्त्तव्यनिष्ठ है। हरिनारायण बॉस ज़रूर हैं पर उसका कष्ट समझते हैं समझाते भी हैं। एकल अभिभावक…

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