सूना बैठक

सूना बैठक ना पीड़ा ना बीमारी ना संहार कोरोना लाया है पर्यावरण का बहार हवा स्वच्छ, नदियाँ स्वच्छ , पक्षी विचरण कर रहे स्वछन्द, ईश्वर की मार देख इंसान, कल तक जो करता था अहंकार, आज वही इंसान दुबक कर बैठा है आज बेबस, चक्र है यह ईश्वर का कि………….. जिंदगी ने दिखाया ये रंग…

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Father’s Day

मेरे बाबूजी भोले भाले ,सीधे-साधे, सबसे अच्छे बाबूजी थे । दृढ़ प्रतिज्ञ, उज्जवल चरित्र, कर्म योग के योगी थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे। अनुशासित जीवन था उनका। उच्च कोटि के शुद्ध विचार। न्याय सदा करते थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे । गहराई से सोच समझ कर कर, बात समय पर करते…

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रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना

रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना युगधर्मा, शोषण के विरुद्ध विद्रोह को अपनी कलम की वाणी बनाने वाले , जीवन रस को ओज और आशावादिता से पूरित करने वाले, सौंदर्य और प्रेम के चित्र को भी अपने कलम की कूची से रंगने वाले रामधारी सिंह ‘दिनकर’  हिन्दी के एक प्रमुख राष्ट्रवादी एवं प्रगतिवादी…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राव तुलाराम

अमर स्वाधीनता सेनानी राजा राव तुलाराम सिंह भारत का इतिहास वीरों की गाथाओं से भरा पड़ा है। इतिहास में यूँ तो बहुत से स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। उनमें कुछ सेनानियों ने अपनी वीरता संकल्प और दृढ़ निश्चय के बल पर अंग्रेजों को लोहे के चने चबाये और…

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अम्फन के बाद की शाम

अम्फन के बाद की शाम आज शाम आकाश , उजले-नीले बादलों से आच्छादित। यूँ प्रतीत हो रहा जैसे मानो, प्रकृति अपने आलय के छत को, सजा रही अनेक गुब्बारों से। जो हवा के साथ गतियमान हैं, कभी बदलते आकार, रंग कभी। सजावट की गुणवत्ता नाप रहे हो जैसे , किसी गृहस्वामिनी के गृह -सज्जा के…

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युगदृष्टा प्रेमचंद

युगदृष्टा प्रेमचंद प्रेमचंद युग भारत की दासता का युग था। उस समय देश का जीवन जीर्ण शीर्ण हो गया था ।आडंबर और सामंतवाद का बोलबाला था। वह भारत की अधोगति का समय था किंतु धीरे धीरे अंग्रेजों के अधीन होते हुए भी देश में पुनरुत्थान की भावना जागृत होने लगी।प्रेमचंदजी ने एक सजग, ईमानदार और…

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आओ बुद्ध हो जाएं

आओ बुद्ध हो जाएं आओ बुद्ध हो जाएं क्षण भर के लिए उतारकर बोझ संबोधनों का,जिम्मेदारियों का,ओढ़ ले पलभर के लिए उन्मुक्तता उस विहंग भाँति जो बेशक़ उड़ान भरता है अपने नीड़ ख़ातिर विस्तृत आसमाँ में…!! माना बुद्ध होना आसान नही हम स्त्रियों को,नही त्याग सकती वे अपने निर्वाण हेतु घर की दहलीज़, एकांतवास नही…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- गुलजारी लाल नंदा

ईमानदारी की एक मिसाल-गुलज़ारी लाल नंदा किसी घर में एक बुजुर्ग व्यक्ति अकेले किराया पर रहते थे ।वह अत्यंत निर्धन थे तथा कुछ महीनों से किराया भी नहीं दे पा रहे थे ।अंततः एक दिन मकान मालिक ने उन बुजुर्ग का सारा सामान सड़क पर फेंक दिया ।सामान भी क्या ,दो चार बर्तन और दो…

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