संघर्ष अदृश्य शत्रु से

संघर्ष अदृश्य शत्रु से कोविद 19 एक सूक्ष्म जीवाणु जो वैश्विक आपदा के रूप में समस्त विश्व के मानव जाति को धीरे धीरे अपने शिकंजे में जकड़ता जा रहा है।एक अदृश्य शत्रु आज मानव सभ्यता के समक्ष एक चुनौती है, न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक…

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मेरे पापा सुपरमैन

मेरे पापा सुपरमैन फादर्स डे पर पापा, चलो मैं एक कविता सुनाती हूं। क्या हो आप हमारे लिए यह दुनिया को बदलाती हूं। हमारे पापा सुपरमैन हर विपदा से लड़ जाते हैं। हो जाए हम वीक तो स्ट्रांग उन्हें हम पाते हैं। घर समाज और रिश्तेदारी बखूबी निभाते हैं। वो हमारे पापा जी, जो माथुर…

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My life

MY LIFE VULNERABLE CONSCIOUSNESS As the moments are gone and the time is playing blindflies with the empty moments of the eternity the consciousness is speechless looking for a truth, an answer to the endless questions… (Collection of poems , Dreams of Oasis (Amphictyon of Hellenism, Department of Literature, Thessaloniki, 2014 . The collection was…

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घर में भेड़िये

घर में भेड़िये   रात भर इमली दर्द से कराहती रही,पोर पोर फोड़े की तरह पिरा रहा था।उसे जानवरों की तरह पीटा गया।कसूर—नारी निकेतन की संचालिका के पति को उसने चाँटा मारा। उसकी हवस की टपकती लार के विरोध में —- “माई,हमको ये बापू बहुत मारता है,चिमटी काटता है,उसकी बात न माने तो हाथ मरोड़ता…

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राममंदिर :भव्य मंदिर निर्माण

राममंदिर :भव्य मंदिर निर्माण अयोध्या, जिसे कभी पृथ्वी की अमरावती और पवित्र सप्तपुरी कहा जाता था, वेदों और पुराणों सहित विभिन्न ग्रंथों ने इसकी प्रशंसा की है। किंवदंती है कि अयोध्या में भगवान श्री राम की जन्मभूमि का निर्माण स्वयं देवताओं ने किया था और महाराजा मनु ने इस पवित्र शहर में पृथ्वी पर मनुष्यों…

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हिंदी है हमारी मातृभाषा

हिंदी है हमारी मातृभाषा नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। चाहे हो जीवन में आशा, चाहे हो मन में निराशा, मिली हर अभिव्यक्ति को परिभाषा इतनी अथाह मेरी मातृभाषा ।। नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। हर सपने को शब्दों में बुना , हिंदी भाषा…

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सोंधी मिट्टी का बिहार

सोंधी मिट्टी का बिहार दिशा – दिशा में लोकरंग का तार-तार है, महका-महका सोंधी मिट्टी का बिहार है ………………………………………… कहीं गूंजते आल्हा ऊदल के अफसाने, कजरी, झूमर और फगुआ के मस्त तराने, चौपालों में चैता घाटों की बहार है। उपर्युक्त बिहार गीत की रचयिता डाॉ शांति जैन ने अपनी रचना के माध्यम से एक आम…

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ऐ वतन

ऐ वतन ऐ वतन! मेरे भारत! तेरी माटी से बनी हूँ मैं तेरी आबो हवा में ही मैं जिंदा हूँ मेरी साँसों में बसी है तेरी खुशबू रूह में इश्क हकीकी ख़ुदाया तेरा है नहीं दरकार मुझे मौसमों की तरहा प्यार के इज़हार की मेरा हर दिन मुबारक है तेरी आगोश में हर पल महफूज़…

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हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।।

हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।। देश स्वतंत्र नहीं था तो लोगों के हृदय में राष्ट्र जागरण की भावनाएं हिलोर मारती थी लोग हिन्दी के प्रति समर्पित थे केवल वे परिवार ही जो या तो अंग्रेजों के पिट्ठू थे या अंग्रेजों के द्वारा कराई गई कमाई से मोटे हुए जा रहे थे अंग्रेज़ी पढ़ते थे…

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