बेटी और बैल

बेटी और बैल बिहार के बेगुसराय में एक गरीब किसान ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए अपने खेत और दो बैल बेच दिया- यह कल के राष्ट्रीय समाचार में था। उसे बाद उसके घर नेताओं की लाइन लग गयी, यह दिखने के लिए कि वो कितने सम्बद्ध हैं- उसकी गरीबी से और कितने प्रभावित…

Read More

अमीना का चूल्हा

अमीना का चूल्हा बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती इलाके का एक छोटा सा गांव है गोलाखाली। नारियल, सुपारी और सुंदरी वृक्ष से सजे इस गांव में कुल मिलाकर छत्तिस घर बसा है । यहां के ज्यादातर लोग मछुआरे हैं जो निम्न वित्तीय श्रेणी में आते हैं। गांव के पश्चिम छोर के अंत में एक झोपड़ी…

Read More

काहे बिहाए बिदेश

काहे बिहाए बिदेश गाँव का चबूतरा जो हमेशा गुलजार रहता था, आज सुनसान है। वहाँ हमेशा एक भीड़ हुआ करती थी, खोमचे वाले, बस पकड़ने वाले, फेरी वाले। सुस्ताने की एक वही जगह थी। पीपल का बड़ा पेड़ और चारों तरफ बड़ा चबूतरा। एक हैंड पम्प भी लगा हुआ है। दरअसल कल ही सरकारी दफ्तर…

Read More

सुहानी बारिश

सुहानी बारिश “मुनियाँ के दद्दा !…… सो गये का ?” पत्नी ने झिंझोड़ कर पूछा तो करवट ले कर उठते हुए रामदीन बोला …. “नहीं री नींद कहाँ आवेगी …. तीन दिनों से पानी पड़ रहो है ….. बच्चन के पेट में अन्न का दानों भी नहीं गयो । समझ नहीं आ रहो का करें”…

Read More

भोर की प्रतीक्षा

भोर की प्रतीक्षा आज प्लेटफार्म पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी ,शायद कोई रैली जा रही थी ..पटना ,लोग दल के दल उमड़े चले आ रहे थे ,हाथों में झंडे ,छोटे बड़े झोले ,गठरियाँ लादे हुए …मुफ्त में यात्रा कर ,कुछ रूपये बचाने के लिए बेबस मजबूर लोग भी थे।तो कुछ ऐसे लोग भी थे…

Read More

अहमियत

अहमियत नाजों से पली मधु को शादी से पहले इस बात की भनक तक न थी कि शादी के बाद जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा l संयुक्त परिवार की बेटी मधु के आँखों में आँसू देख उसके बड़े ताऊ आसमान सिर पर उठा लेते थे l इसलिए परिवार के सभी बच्चे मधु…

Read More

बड़ी बहू

बड़ी बहू “अरे सुनती हो अम्मा! सोनू मोनू के लिए बड़ा अच्छा रिश्ता मिल रहा है।” राम प्रसाद जी ने मां को बड़ी प्रसन्नता से बताया। उनका एक एक अंग उनकी प्रसन्नता को प्रकट कर रहा था। मां अपनी बहू को आंख के इशारे से पास में बुलाती हुई बोली,”अरे किसने बताया है रिश्ता और…

Read More

नारी सशक्तिकरण का स्वरूप – “सौत”

नारी सशक्तिकरण का स्वरूप – “सौत” हिंदी साहित्य में जब भी कहानी की चर्चा होगी, वह मुंशी प्रेमचंद जी का नाम लिए बिना हमेशा अधूरी ही रहेगी। उनकी कहानियों में समाज के सामान्य वर्ग; जिनमें छोटे, दबे कुचले, सहमे और सताए लोगों से जुड़ी समस्याओं का विशेष स्थान रहा है। अपने जीवन-काल में जिस आर्थिक…

Read More

आज भी जिंदा है होरी

आज भी जिंदा है होरी त्रासदी सामान्य मनुष्य के जीवन का एक अनिवार्य अंग है। सुख और दुख दोनों ही जीवन के दो पहलू हैं। आशावादी कलाकार जीवन के दुख में क्षणों में भी आने वाले सुख की किरण देखता है और निराशावादी इस द्विधा में जीवन में दुखाक्रांत क्षणों को ही देखता है और…

Read More

द्विचाली

द्विचाली उठ जाग मुसाफिर भोर भयो अब रैन कहाँ जो सोवत है………खर्र खरर्र इसी गाने को गुनगुनाते हुए शिक्षिका सावित्री शीक के झाड़ू से झाड़ू लगा रही थी जहाँ उसके साथ संगत कर रहे थे शीक के झाड़ू की खरर्र खर्र चिड़ये चुनमुन की चहचहाहट और खेतों की ओर जाते गोधन की टनर् टनर् घंटी।…

Read More