“कलम आज उनकी जय बोल “

“कलम आज उनकी जय बोल “ प्राण हाथों मे हैं लेकर रहते निडर दुश्मन से भीड़ हैं जाते रक्षा थल वायु जल में करते देश पे जान न्यौछावर जय बोल कलम आज उनकी जय बोल दृढ़ संकल्प वीरता भाषा उनके त्याग तपस्या से वे ना मुख मोड़े निश्छल जीत उनके मन लुभाये माता भारती उनके…

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रोटी ,कपड़ा और मकान

रोटी ,कपड़ा और मकान कदम बढ़ चले कदम ना चिलचिलाती धुप ना भींगने का डर. सर्द हवाएं भी नही हिलाती दम नही चुभती मिलता जो भी हो दर्द लिंग से परे पत्थर तोड़े या चढ़ जाएँ ऊँची इमारते ना अँधेरे का भय बहुत कुछ को नकारते हमसब हैं निकलते हंसते खिलखिलाते अपने खोली से अपनी…

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शरद का चांद ..डाकिया अनकही बातों का

“शरद का चांद ..डाकिया अनकही बातों का ” जाने किस बात पर घबराई सी खरगोश की तरह दुबकी फिरती वह जब-तब घर से बाहर निकल बगीचे में चली आती। गमलों की ओर मुंह किये नीची नजर में फूलों के साथ खामोशी से लगातार बात करती रहती । खिले-खिले स्थिर फूलों को देखकर वह अक्सर सोचती…

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एमिली डिकेंसन – नई धारा की कवयित्री

एमिली डिकेंसन – नई धारा की कवयित्री “मै कोई भी नहीं, तुम कौन हो क्या तुम भी, कोई नहीं हो ? एमिली डिकेंसन की इस कविता से आशय निकाल सकते हैं कि एमिली बहुत ही अकेली और अपने जमाने में अलग किस्म की कवयित्री रही होंगी । अकेलेपन को उन्होंने अपना साथी बनाया और बहुत…

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क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल

क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल   यह तीर्थ महातीर्थों का है.. मत कहो इसे काला पानी.. तुम सुनो यहाँ की धरती के.. कण कण से गाथा बलिदानी. प्रखर राष्ट्रभक्ति की ये पंक्तियां भारत वर्ष के स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी श्री गणेश दामोदर सावरकर जी के होठों पर तब भी सजी हुई थी…

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इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….

  इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….   इश्क, प्रेम का वह रूप है जिसमें कोई किसी में लीन हो जाना चाहता है …. फिर चाहे वह अपनी अंतरात्मा हो या अपना ईश्वर ! इश्क यानी प्रेम भक्ति का भी एक प्यारा रूप है जो समर्पण माँगता है तभी तो उसका सफर रूमानियत…

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Another Taj Mahal

Another Taj Mahal Nestled below the lower Himalayas and the Barail ranges are the emerald green hills of Mizoram. Verdant forests, azure blue sky, brown and green rolling hills and sparkling waterfalls impart this magnificent land of the Mizos (Ram means land in Mizo) a unique charm. Sandwiched between Tripura on its west and Myanmar…

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बसंत

बसंत “सकल बन फूल रही सरसों, टेसू फूले अम्बुआ बौरे, कोयल कूकत डार डार, और गोरी करत सिंगार, मालनियाँ घरवा ले आयी करसों।” अमीर खुसरो का जाना माना कलाम, जो उन्होंने तेहरवीं और चौदहवीं शताब्दियों के बीच लिखा, और जो आज भी संगीत प्रेमियों के मानस में गूँज रहा है | राग बहार में लयबद्ध…

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माँ

माँ संस्कारों के दिव्य अलंकरण की शक्ति है माँ । स्नेह भरे संबल का सुखद स्पंदन है माँ । जीवन की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर धैर्य से आगे बढ़ने की शिक्षा है माँ । जिन्दगी की कटु अनुभूतियों की मधुर अभिव्यक्ति है माँ । तुझ में है हम हममें हो तुम हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व की पहचान…

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