बिन पिता के
बिन पिता के स्वाभिमान, सुरक्षा, स्नेह, समर्पण वटवृक्ष सी छाया जिसने की अर्पण चरणों में जिसके सब कर्म धर्म समझाया जिसने जीवन का मर्म माँ के जीवन के, जो थे परिभाषा मिली उन्हीं से अदम्य जिजीविषा निष्ठा, कर्त्तव्य, पोषण, अनुशासन मूल मंत्र सा जिसने, फूंका अंतर्मन बिन तुम्हारे अधूरा हर संकल्प तुम बिन दूजा न…
बदला सावन
बदला सावन इस बार सावन, कुछ बदला-बदला है। ना उमंग है,ना तरंग है। लागे सब देखो वेरंग है। चारों ओर हाहाकार मचा है। मुँह खोल बिकराल खड़ा है इस बार सावन, कुछ बदला बदला है। बगियाँ फूलों से भरी, पर सूनी-सूनी हैं। ताल-तलैया तृप्त हुऐ, पर प्यासी-प्यासी हैं। इस बार सावन, कुछ बदला-बदला हैं। काले-काले…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-सरोजिनी नायडू
विरासत: श्रीमती सरोजिनी नायडू भारतवर्ष के अमृतमहोत्सव पर यह कहना कदाचित अतिशयोक्ति नहीं होगा कि हर वर्तमान की नींव इतिहास में ही रखी जाती है, विशेषकर कला, संस्कृति, विज्ञान की। कृषि के क्षेत्र से लेकर औद्योगिकीकरण, तकनीकीकरण से डिजिटाइजेशन, मानवाधिकार के क्षेत्र में स्त्री पुरुष को सामाजिक, मानसिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र में समान अधिकार का…
इश्क रूमानियत से रूहानियत तक
मेरा मेहबूब नज़ाकत वो कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनपर हम मर मिटे हैं उनपर हमारा दिल है हारा हर मंज़र में वो दिखते है उनसे ही सब नज़ारा उन बिन सांस भी आए ना हमें है यह गवारा नज़ाकत कहाँ मिलती किसी को अब दोबारा जिनकी हसरतों के बूते ख्वाब रातों में…
ब्लड प्रेशर का नियंत्रण अपने हाथों में लें
ब्लड प्रेशर का नियंत्रण अपने हाथों में लें आज के समय में उच्च रक्तचाप एक आम समस्या बनती जा रही है और आंकड़े डराने वाले हैं ।आपको जानकर हैरानी होगी कि अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें यह पता नहीं कि उन्हें ब्लड प्रेशर की शिकायत है। यही नहीं जिन्हें ब्लड प्रेशर पता भी…
अतिथि एक दिन का
अतिथि एक दिन का अच्छी भली सो रही थी और सपनों में ,पर्वतों के पार दूर कहीं क्षितिज पर सैर कर रही थी कि अचानक ही धीमे से तेज … और भी तेज होती “खट – खट” की आवाज़ ने आराम करती हुई पलकों को जबरदस्ती खोल ही दिया । मैं भी किसी प्रकार उनींदी…
लड़ाई अस्तित्व की
लड़ाई अस्तित्व की भारत एक अनूठा देश है जहाँ अभी भी लड़कों के जन्म पर बधाईयाँ दी जाती हैं और लड़कियों के जन्म पर मातम मनाया जाता है। जन्म से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती हुई लड़कियाँ अपने हिस्से की जमीन और आसमान को तलाशती रहती हैं। भारतीय संविधान जो कि 1950 से लागू…
मातृत्व की कुर्सी
मातृत्व की कुर्सी शरीर पर निशान हैं कुछ जो सर्जरी के है मातृत्व के जो स्थाई है रहेंगे ताउम्र..अच्छे लगते हैं शायद मेरी संपूर्णता को इंगित करते.. !! हर स्त्री के जो माँ है…!! स्त्री के ममत्व को परिभाषित करते, स्त्री पुरूष के भेदभाव से कोसो दूर..वे निशान जो नही जानते पुरूष औऱ स्त्री में…