सौम चन्द्रिका

सौम चन्द्रिका गरल गरल हुआ वदन सुधाविहीन सिंधु मन। जल रहा नयन नयन धुआं धुआं धरा गगन।। स्वार्थ छद्म से यहाँ चिनी गई इमारतें मूक प्राणियों के कत्ल से सजी इबादतें नाम पर विकास के हरा भरा भी कट रहा वक्ष भूमि का लहूलुहान जैसे फट रहा कर्णभेदती बिगाड़ती रही ध्वनि: पवन मूल से उखड़…

Read More

गुरु वंदना

गुरु वंदना गुरुजनों के ज्ञान को , तू देना सदा सम्मान । दुख संताप वे हर लेगें , ऐसे वे इंसान ।। लोभ दौलत का तुझको है तो,विद्या धन एकत्र कर। चोर न चोरी कर सके , तू चाहे सर्वत्र भर।। विद्या और कल्याण की दौलत, लूट सके तो लूट। कोई न जाने किस पल…

Read More

The Wintertime Lover

The Wintertime Lover Skipping through the surface of pond, your smile greets me with solemn pride, a relentless poker-faced killer. nonchalant and composed. The four- leaf clover sprang up from the earth, longing for your gentle touch. Alas, you turned away in disdain for such a young love in bud. A flicker of hope came…

Read More

जय श्री राम

जय श्री राम   आई है बेला अति पावन घर आ गए मेरे रघुनंदन बह रही भक्ति की है धारा राममय हुआ है जग सारा   भगवा ओढ़ लिया नील गगन ने रच दिया इतिहास आज धरा ने बिगुल बज गई अब राम युग की हुई प्राण-प्रतिष्ठा राम लला की   देख मूरत श्री राम…

Read More

Unexpected days

Unexpected days We are living in unexpected days, the whole world seized by a primary instinct of self-preservation has locked itself in and is trying to escape death. States are destitute, unprepared and obsessed with winning more and more, they behave without humanity. No cologne to put on our hands or disinfectant, not even simple…

Read More

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में माँ जीवन का सार हो तुम मेरी ताल लय मीठी धुन हो मेरी तेरे जैसे बनना है, सदा रहूँ कदमों में तेरी। सदा नयन में बसती हो मेरी हृदय में विराजती मेरी जीवन से और कोई चाहत नहीं परछाई बनना है तेरी। हो धरा सी क्षमाशीला जानकी सदृश…

Read More

भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सैम मानेकशॉ

एक अद्वितीय योद्धा-सैम होर्मूसजी फ़्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ हम सब भारतीय सेना की वीरता और पराक्रम की हमेशा प्रशंसा करते हैं जब भी सेना कोई ऐसा काम करती है जिससे हमारे देश का सामर्थ्य दिखता हैं तो हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। कुछ ऐसे ही थे सैम मानेकशॉ जिन्हें देश का पहला फील्ड…

Read More

कासे कहूं अपने जिया की

कासे कहूं अपने जिया की   हल्की हल्की सावन की रिमझिम फुहारें पड़ रही थी, मौसम बहुत खुशगवार था । नीता का मन चाय पीने का हो रहा था पर अपने लिये चाय बनाने में आलस आ रहा था इसलिये बैठकर अखबार पढ़ने लगी, हालांकि अखबार में कुछ पढ़ने के लिये होता ही कहाँ है…

Read More

राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी साहित्य और राष्ट्र के गौरव “राष्ट्र कवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर जी”की जयंती के अवसर पर उन्हें ‌अपने अविस्मरणीय पल के श्रद्धासुमन अर्पित कर रही ‌हूँ। उन्हें शत-शत नमन।ऐसी‌ महान‌ व्यक्ति का एक संस्मरण मेरे विद्यार्थी जीवन ‌का है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी दिनकर जी का साक्षात्कार, अपनापन और…

Read More