पूर्ण स्वराज के प्रणेता

पूर्ण स्वराज के प्रणेता “मरण” और “स्मरण”- इन दो शब्दों में यों तो “स्” अक्षर का ही अंतर है, परन्तु, इस छोटे से शब्द को कमाने के लिए जीवनपर्यंत लोकहित और आदर्शवादी विचारधाराओं पर चलना पड़ता है,जिसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक।1अगस्त,2020 को उनके पुण्यतिथि की शताब्दी मनायी गयी।बहुआयामी प्रतिभा के धनी लोकमान्य…

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माँ! तेरी दुआ चाहिए

माँ! तेरी दुआ चाहिए ज़िन्दगी है क्या ….. ? गर पता चाहिए। बस दुआओं का इक सिलसिला चाहिए।। ज़िन्दगी के मसाइल से लड़ता रहूँ। ये ख़ुदा! मुझ को वो हौसला चाहिए।। ज़िन्दगी मौत से छीन लाऊँगा मैं। उमर भर माँ, तेरा आसरा चाहिए।। आ कभी मिल मिरे माँ से, फिर बता। मुझ को क्यों, ज़न्नत…

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जाना है बहुत दूर

जाना है बहुत दूर आज उम्र के इस पड़ाव पर आकर अपने बारे में कुछ सोचने की कोशिश करती हो तो मेरा बचपन सबसे पहले मुझे याद आता है । मेरा जन्म कलकत्ता में हुआ था। मेरे माता पिता शिक्षित और बहुत संस्कारवान थे । परिवार में कोई चीज की कमी नहीं थी और हमें…

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जीना सिखाती ज़िन्दगी

जीना सिखाती ज़िन्दगी आज पहली बार अज़ीब सी मनःस्थिति है। लोग न जाने कैसे बड़ी बड़ी बातें कर लेते हैं किसी के बारे में भी मेरे साथ कभी भी कोई बुरा व्यवहार करता है तो मुझे बुरा लगता है। कोशिश रहती है कि मेरी तऱफ से कभी कोई आहत न हो।पर जब अति हो जाती…

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उम्मीद की ज्योति

  उम्मीद की ज्योति जीवन परिचय की बात हो तो शायद ही पूरी हो पाए जीवन से मुक्कमल या भली भांति परिचित होना , मगर चुकी यह औपचारिकता है अपना परिचय देना तो यही कहूंगी कि मेरा जन्म गया जिला के गांव पूरा में दिनांक बीस नवंबर को हुआ, सौभाग्यशाली हूँ कि मैं उस घर…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राव तुलाराम

अमर स्वाधीनता सेनानी राजा राव तुलाराम सिंह भारत का इतिहास वीरों की गाथाओं से भरा पड़ा है। इतिहास में यूँ तो बहुत से स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। उनमें कुछ सेनानियों ने अपनी वीरता संकल्प और दृढ़ निश्चय के बल पर अंग्रेजों को लोहे के चने चबाये और…

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वीरांगना बीना दास

वीरांगना बीना दास आज से ठीक 88 वर्ष पूर्व 6 फरवरी 1932 का दिन था, जब कलकत्ता विश्वविद्यालय के कनवोकेशन हाल में बैठे सैकड़ों लोग एक युवती द्वारा लगातार चलायी जा रही गोलियों से स्तब्ध रह गए, जिनका निशाना कोई और नहीं बल्कि बंगाल का तत्कालीन गवर्नर स्टेनले जैक्सन था। हालाँकि जैक्सन बच गया पर…

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पेच्ची

पेच्ची कितना मुश्किल है जीवन का यथार्थ ये तो सभी जानते हैं। इतना कि दुःख ही सत्य लगता है सुख नहीं! हाट की चहल-पहल व धूल के बीच पेच्ची उदास बैठी है।साथ में लचकी खड़ी है।उसकी बड़ी-बड़ी आँखें ख़ुशी व्यक्त कर रहीं हैं या उदासी कहना कठिन है। सत्य यही है कि दोनों की आँखों…

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