विषाद

विषाद बड़ी मुश्किल से वीजा मिला था – तीन महीनों के लिए। स्टुडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम में। ऑक्सफोर्ड की बात ही अलग है। तीन महीने काम, फिर एक महीने के लिए रश्मि आ जाएगी और वो थोड़ा घूम लेंगे। इंग्लैंड जाने का उसका बहुत पुराना सपना था और वह किसी भी तरह उसको हासिल करना चाहता…

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संघर्ष अदृश्य शत्रु से

संघर्ष अदृश्य शत्रु से कोविद 19 एक सूक्ष्म जीवाणु जो वैश्विक आपदा के रूप में समस्त विश्व के मानव जाति को धीरे धीरे अपने शिकंजे में जकड़ता जा रहा है।एक अदृश्य शत्रु आज मानव सभ्यता के समक्ष एक चुनौती है, न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक…

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हरेला

हरेला आज सोलह जुलाई है। इस दिन हमारे उत्तराखंड का राजकीय पर्व हरेला मनाया जाता है। पर्व की परंपरा यह रही है कि परिवार के मुखिया एक टोकरी में मिट्टी डालकर उसमें गेहूं, जौ, मक्का, उड़द, गहत, सरसों, चना बो देते हैं। नवें दिन डिकर पूजा यानी गुड़ाई होती है। दसवें दिन हरेला काटा जाता…

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एक निमंत्रण मानसून को

एक निमंत्रण मानसून को आसमान मे तक, श्याम बादलोँ को, दे दिया उन्हें नेह निमंत्रण। आ मानसून आ, बहा ले जा अपने साथ, पिशाचिनी कोरोना को। जिसने कितनी माँओं से उनके बच्चें छीने, और कितने बच्चों से छिना, उनके पिता का दुलार। जिसके कुचक्र में फँसकर कराह रही हेै आदमजात। आ मानसून आ, बहा ले…

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विजयी भारत

विजयी भारत आप में से बहुतों ने १९६२ का युद्ध देखा होगा व उसकी कहानियां भी सुनी होंगी।मेरे भी ज़हन में आज कई दिनों से वो १९७५ का पाकिस्तान व भारत के युद्ध जिसके “सायरन” की गूंज,वो मेरे घर की छत से जहाजों की फर्राटेदार उड़ानें और उस पर हम दोनों बहनों को मां और…

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एक अलग सा सावन

एक अलग सा सावन अब के सावन बारिश कुछ अलग सी फुहार लेे आई है बिरह से सींची बूंदों को बहने से अखियां न रोक पाई है न खिल रही इन हाथो में मेहंदी की लाली न दील के बगीचे में सजती कदंब की डाली हरी चूड़ियां आजकल गुमसुम सी है रहती न जाने उसकी…

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बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन

बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन (१) बादलों के संग क्यों उड़ने लगा है मन कल्पना के जाल क्यों बुनने लगा है मन इन्द्रधनुषी स्वप्न के संग रात भर , बीन के तारों सदृस बजने लगा हैं मन ? हरित वर्णा हो गई है सांवरी धरती , बादलों के प्यार ने क्या चातुरी…

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