THE SEA GETS TOGETHER ME

THE SEA GETS TOGETHER ME The sea gets together me with infinity. He untangles everyone heavy thoughts. They get dressed in my lunar room conceived destinies. And white sheets. I’m not looking for anyone’s consolation. Guardian of Fire send me One Creator. And the bright misfortune is house of my feelings vast. Rozalia Aleksandrova Writer…

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प्रतिबंध

प्रतिबंध बेटियां खिलखिलाती रहनी चाहिए बेटियों के खिलखिलाने से बसते हैं घर बेटियां मुस्कुराती रहनी चाहिए बेटियों के मुस्कुराने से बसते हैं घर.. पर बेटियों को खुलकर मुस्कुराने या फिर खिलखिलाने की इजाज़त ही कब थी? लड़कियां यू़ँ बिना बात के खीं खीं करती अच्छी नहीं लगती यहीं तो कहते रहे मां बापू चुनिया और…

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COVID AND HEALTH

COVID AND HEALTH As the world continues to deal with the COVID-19 pandemic at least a third of the global population continues to find itself under a so-called ‘lockdown’, while others are having to follow some form of social distancing. While many countries are considering plans to lift restrictions in the coming months, this will…

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दिनकर जी की जयंती पर विशेष

दिनकर जी की जयंती पर विशेष हिंदी में दिनकर-काव्य की राष्ट्रीयता अथवा राष्ट्रीय चेतना पर विद्वानों और शोधकर्ताओं ने विविध कोणों से प्रकाश डाला है। लेकिन इस राष्ट्रीय चेतना की आधारभूमि उनकी युग चेतना का मूल्यांकन कभी भी गंभीर विवेचना का विषय नहीं बनाया गया।इस युग चेतना की व्याख्या, परिज्ञान और मूल्यांकन के बिना राष्ट्रीय…

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रोना मत 

रोना मत  सुबह-सुबह जाड़े की सुनहरी गुनगुनी धूप में रंजन जी अपने सफेद मुलायम शाल ओढ़े आराम कुर्सी पर बैठ चाय के आने का इंतजार कर रहे थे। मौसमी फूलों से पूरा बगीचा खिल रहा था। गमले करीने से सजे हुए थे। रंजन जी को बागवानी का बहुत शौक था, परन्तु नौकरी की वजह से…

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नारीशक्ति बनाम नारीवाद

नारीशक्ति बनाम नारीवाद दुनिया की आधी आबादी स्त्री;सृजन की स्वामिनी, सृष्टि की सारथी ,पृथ्वी सी पोषिका, हवा सी जीवनदायिनी ,महक की भाँति मनाहाल्दिका, सुमन की तरह सौंदर्यसम, हरियाली की भाँति हर्षिका, वर्षा की तरह नवजीवनवर्धिका परंतु कालक्रम में कई बार और कितनी जगह विसंगतियों के समक्ष खड़ी। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:” कई जगह…

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कुछ कही कुछ अनकही 

कुछ कही कुछ अनकही    एक थी केतकी ,पहाड़ों की खुशनुमा वादियों में अपने रूप रंग की खुशबू बिखेरती,हिरनी सी कुलांचें भरती, इस बुग्याल से उस बुग्याल तक दौड़ती चली जाती थी बस अपने आप में खोई हुई,अपने आप में मगन।दीन दुनिया से कोई वास्ता न था बस अपनी ही धुन में किसी भी टीले…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राव तुलाराम

अमर स्वाधीनता सेनानी राजा राव तुलाराम सिंह भारत का इतिहास वीरों की गाथाओं से भरा पड़ा है। इतिहास में यूँ तो बहुत से स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। उनमें कुछ सेनानियों ने अपनी वीरता संकल्प और दृढ़ निश्चय के बल पर अंग्रेजों को लोहे के चने चबाये और…

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जोखू जिन्दा है

जोखू जिन्दा है अभिजात्य वर्ग का एक युवक ट्रेन में यात्रा कर रहा था। मुंशी प्रेमचंद की कहानियों की किताब में रमा वह “ठाकुर का कुंआ” कहानी पर अटक गया। कहानी पढ़ते-पढ़ते वह असहज होने लगा। गंगी और जोखू उसके भीतर उतरते चले गए। गले मे खुश्की भरने लगी। उसने बैग में पानी की बोतल…

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