कैक्टस

कैक्टस मन को किसी करवट चैन नहीं मिल रहा।बहुत चाव था,बेटे को डॉक्टर बनाने का।क्या कमी की मैंने।अच्छी से अच्छी कोचिंग दिलवाई। कोचिंग सेंटर आने-जाने के लिये,साहेबज़ादे अड़ गये,बाइक चाहिये,वो भी दिलवाई। ये दूसरा साल था मेडिकल के एंट्रेंस एक्जाम में बैठने का उसका।इस वर्ष भी क्लीयर न कर पाया।उसकी इन असफलताओं का भले ही…

Read More

निर्मला : एक औरत

निर्मला : एक औरत मुंशी प्रेमचंद, जो कि कलम के सिपाही, के नाम से भी जाने जाते हैं, ने हिन्दी साहित्य की अभूतपूर्व सेवा की है। उर्दू और हिन्दी में लिखी उनकी 300 कहानियों और करीब 45 उपन्यासों ने सौ वर्षों से अधिक समय से साहित्य प्रेमियों को गुदगुदाया है, उत्साहित किया है, प्रेरित किया…

Read More

भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-अहिल्याबाई होल्कर

अहिल्याबाई होल्कर वैसे तो भारत की वीर भूमि पर बहुत से शूरवीरों ने जन्म लिया, मगर कुछ ऐसे भी शूरवीर हुए जो हमेशा के लिए अमर हो गए, जिनमें से एक नाम अहिल्याबाई होल्कर का है, महाराष्ट्र के अहमदनगर के चौंडी गाँव में सन् 1725  में जन्मीं अहिल्याबाई होल्कर के पिता माकोंजी शिंदे सम्मानित धांगर…

Read More

The Wintertime Lover

The Wintertime Lover Skipping through the surface of pond, your smile greets me with solemn pride, a relentless poker-faced killer. nonchalant and composed. The four- leaf clover sprang up from the earth, longing for your gentle touch. Alas, you turned away in disdain for such a young love in bud. A flicker of hope came…

Read More

दिव्या माथुर का रचना संसार

दिव्या माथुर का रचना संसार दिनांक 19 दिसम्बर 2021 को केन्द्रीय हिंदी संस्थान, विश्व हिंदी सचिवालय, वैश्विक हिंदी परिवार एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त ऑनलाइन आयोजन में प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर का रचना संसार विषय पर एक साहित्यिक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रवासी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल किशोर…

Read More

एक निमंत्रण मानसून को

एक निमंत्रण मानसून को आसमान मे तक, श्याम बादलोँ को, दे दिया उन्हें नेह निमंत्रण। आ मानसून आ, बहा ले जा अपने साथ, पिशाचिनी कोरोना को। जिसने कितनी माँओं से उनके बच्चें छीने, और कितने बच्चों से छिना, उनके पिता का दुलार। जिसके कुचक्र में फँसकर कराह रही हेै आदमजात। आ मानसून आ, बहा ले…

Read More

राष्ट्रीयचेतना की सशक्त कवयित्री:सरोजिनी नायडू 

राष्ट्रीयचेतना की सशक्त कवयित्री:सरोजिनी नायडू    “ऊँची उठती हूँ मैं, कि पहुँचूँ नियत डारने तक टूटे ये पंख लिए,मैं चढ़ती हूँ ऊपर तारों तक |” इन पंक्तियों की रचयिता स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना की भूमिका निभाने वाली सरोजिनी नायडू ने साहित्य जगत और काव्य क्षेत्र में अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से अपूर्व योगदान दिया।13…

Read More

डाॅ रजनी झा की कविताएं

डाॅ रजनी झा की कविताएं 1.प्रेम (सीता) सीता चकित हो गयी थी विवश व्यथित हो गयी थी सजल नयन लक्षमण को देख खता अपनी पुछ रही थी। आर्यपुत्र ने क्यों सजा दिया अपने से क्यों दूजा किया चौदह वर्ष वन मे संग रखा अब क्यों अपने से दूर किया? निरूत्तर लक्षमण सर झुका खड़े रहे…

Read More

लंग कैंसर

      लंग कैंसर पुरी दुनिया में होने वाले कैंसरों में सबसे अधिक लंग कैंसर के रोगी ही होते हैं ।हमारा शरीर अनेक प्रकार के अलग-अलग कोशिकाओं से निर्मित है, साधारणतः हमारा शरीर आवश्यकतानुसार नई कोशिकाओं के उत्पादन को नियंत्रित करता है ,जब कुछ कोशिकाएँ उत्पादन की नियंत्रण से बाहर हो जाए, बदलना शुरू…

Read More