प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

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तपती रेत

तपती रेत   “चाची, सामने से हट जाइए…” गाँव वालों की भीड़ रूकमा चाची के आंगन में इकट्ठी थी। “आज इस डायन को नहीं छोड़ेंगे,” भीड़ की आवाज थी। “इसे मैला पिलाकर ही दम लेंगे।” दूसरी रौबदार आवाज आई। “हाँ… हाँ, आज मार ही डालो इस पापिन को!” घृणा से भरी आवाजें गूंज उठीं। “वहीं…

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मैं और वो

मैं और वो दो इंसान दो वजूद दो व्यक्तित्व अलग परिवेश शहर अलग अजनबी अनजाने बंध गए बंधन में हुए जीवनसाथी बना रिश्ता पवित्र प्यार का इज़हार इकरार एतबार नौनिहाल परिवार जीवनरूपी नैया में हुए सवार हौले हौले गतिशील बहार ही बहार कभी दौड़ी , हवा के रूख के विपरीत कभी बसंती बयार कभी झेलती…

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Amma

Amma My mother was full of natural grace, Strong, beautiful dynamic pace, Moulded her children with iron hands, Not like footprints on seashore sands. Like four seasons of the year, Changed her moods without fear, Protected her creations from heat or rain, No storm could discourage or make her vain. Like a hawk she watched…

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दीया

दीया अंतस में दीया जलता है । बाहर में दीया जलता है । मन के दीप से ही अब तो । घर घर में दीया जलता है ।। देश में दीपोत्सव मनता है । अंतस बाहर गम हटता है । आओ घर घर दीप जलाएँ । कलुषता का तम हटता है ।। दीपक शुद्धता है…

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नवजात शिशु की देखभाल

  नवजात शिशु की देखभाल शिशु का टीकाकरण जन्म के समय- हैपीटाईटिस बी ,बी.सी.जी और पोलियो का टीका दो माह बाद- पोलियो, डी.पी.टी,एच.आई.बी और हैपीटाईटिस बी तीसरे माह में -पोलियो और डी.पी.टी चौथी माह में -पोलियो और डी.पी.टी और एच.आई.वी पांचवी माह में -पोलियो छठे माह में- हैपीटाईटिस और एच.आई.वी नौवे माह में -खसरा बारहवे…

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सिंदूर की रेखा

सिंदूर की रेखा   आज चंद्रमुखी 65 वर्षीय महिला, अपने किरायेदार विक्की बाबू के साथ बैंक जा रही थी, वर्ष में एक बार लाइफ सर्टिफिकेट के लिए जरूरी होता है जाना।तिमंजले घर मे चार किरायेदारों के परिवार के साथ अकेली ही जीवन बीता रही हैं।   सुबह 11 बजे बैंक पहुँच गयी। पूछताछ करने के…

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साथी हाथ बढ़ाना !

साथी हाथ बढ़ाना ! श्रमिक हमारी सभ्यता-संस्कृति के निर्माता भी हैं और वाहक भी। हजारों सालों तक मनुवादी संस्कृति ने उन्हें वर्ण-व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर रखा। उन्हें शूद्र, दास और अछूत घोषित कर उनके श्रम को तिरस्कृत करने की कोशिश की गई। सामंती व्यवस्था ने गुलाम और बंधुआ बनाकर उनकी मेहनत का शोषण…

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साँझ

साँझ गाड़ी तेजी से पटना से राजगीर की ओर बढ़ रही थी। हल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी। आषाढ़ का महीना चढ़ा ही था। मोना सुबह आठ बजे पति राजेश के साथ घर से निकली थी। राजेश को ऑफिस के कार्य से वहाँ तीन दिनों के लिए रूकना था। मोना की एक सहेली रीना राजगीर…

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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद महान साहित्यकार युग दृष्टा, कालजई कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर हार्दिक नमन। मुंशी प्रेमचंद जी की कहानियां आज भी प्रसांगिक है। प्रेमचंद जी सर्वांगीण संपूर्णता के कुशल कथाकार कहे जाते हैं। प्रेमचंद जी कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे उन्होंने पहले उर्दू में लिखा फिर हिंदी में लिखने लगे उन्होंने बहुत…

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