मेरी कहानी

मेरी कहानी आत्मकथा ! कैसा विचित्र सा शब्द है ? आत्मा तो शाश्वत है, अनादि है अनंत है। स्वयं पूर्ण ब्रह्म है । उसकी क्या कथा हो सकती है? मेरी, तेरी, सारे जीव-जंतु की यहाँ तक कि पेड़ पौधों की भी आत्मा तो एक ही है । संभवतः बात हो रही है इस नीरजा नामक…

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A Successful Woman

A Successful Woman What is success? Is it a subjective feeling of contentment with a job well done? A target achieved and a goal reached after overcoming obstacles? Or is it an evaluation by others, based on certain accepted benchmarks? Is it achievable at every little milestone of life? Or is it a lifetime achievement…

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भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !!

भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !! किसी काल-विशेष के साहित्य में उस युग की विशेषताएँ प्रतिबिंबित होती रहती है। उसमें मूल मानवीय प्रवृत्ति और जातीय सांस्कृतिक स्थितियों एवं सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों के चित्र भी देखे जा सकते हैं। यदि साहित्य समाज का दर्पण है तो इसमें देश तथा समाज की राजनीतिक स्थिति का विवरण,…

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औरत ने जन्म दिया मर्दों को

“औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया… जिस कोख से उसने जन्म लिया उस कोख का कारोबार किया!!” साहिर लुधियानवी की चुभती पंक्तियाँ, मुज़फ़्फ़रपुर कांड को भली भाँति दर्शाती है!..आज के परिवेश में देश में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है…महिलाओं का शोषण दिनों दिन बढता जा रहा…

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दीया

दीया अंतस में दीया जलता है । बाहर में दीया जलता है । मन के दीप से ही अब तो । घर घर में दीया जलता है ।। देश में दीपोत्सव मनता है । अंतस बाहर गम हटता है । आओ घर घर दीप जलाएँ । कलुषता का तम हटता है ।। दीपक शुद्धता है…

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परिणति

परिणति   अभी थोड़ी देर पहले जाकर घर का काम निपटा है। चलो अच्छा हुआ महरी भी आकर चली गई। चैन की सांस ली मैंने।अब दो घंटों की छुट्टी। रोहित चार बजे तक आएगा और उसके पापा आठ बजे तक।अपने कमरे में आकर मैंने एक पत्रिका उठाई और पेज पलटने लगी।तभी मोबाइल बज उठा।किसका हो…

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उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है

उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ? सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोता क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ?…

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रोशनी : इधर-उधर से

रोशनी : इधर-उधर से हमारे देश भारत में इतनी विविधताएँ हैं कि सबको शब्दों में समेटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। अब देश के ही कितने नाम हैं – जम्बूद्वीप, भारतवर्ष, इंडिया, हिन्दुस्तान, हिंद और सबके साथ ही कितनी कहानियाँ जुड़ी हैं। दरअसल भारत आस्था का देश है और किवदंतियों का भी। जितने पर्व –…

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बसंत पंचमी की अनमोल याद

                                            बसंत पंचमी की अनमोल याद यूं तो बसंत पंचमी पर्व प्रति वर्ष एक नई ऊर्जा, उत्साह और उमंग लेकर आता है और एक नई स्वर्णिम स्मृति की छाप हृदय पर छोड़ जाता है,…

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