Mother’s Tears

Mother’s Tears Her face is full of fine lines It becomes more obvious when her heart is touched Her body, which was already old, looked more and more fragile When her soul covered with sweat Her hands were shaking, her voice was boisterous When the tears melted Pandemic, tackle his dream come true Her dream…

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यूँ करें परीक्षा की तैयारी

यूँ करें परीक्षा की तैयारी पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित करने के कुछ उपाय जब आप पढ़ाई करने बैठते हैं, तो किताबों में मौजूद इतनी सारी जानकारी को कैसे अपने मन में बिठाते हैं? क्या आप पढ़ाई करने के सही तरीक़ो को जानना चाहते हैं? इस के लिए आप को पढ़ाई करने की अच्छी आदतों का…

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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद मुझे नहीं लगता जिनकी रुचि साहित्य में होगी वो इस नाम से वाकिफ नहीं होंगे !! मुंशी प्रेमचंद मेरे प्रिय कथाकारों में से एक हैं सच कहूं तो उनकी कहानी “पूस की रात”और “ईदगाह”जब विद्यालय जीवन में पढ़ा था तभी से उनकी मुरीद हो गई!! कहना ग़लत नहीं होगा कि अगर लिखने- पढ़ने…

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भ्रमजाल

भ्रमजाल  हेलो !….सुरीली ?? हां!.. “कौन बोल रहा है?” “आवाज भी नहीं पहचानती हो क्या ?”- कुछ ऊंची आवाज में मानसी बोली। सुरीली सकपकाई और बोली-” यह नंबर सेव नहीं था, मैडम!” “जानती हूं ,मेरा फोन तो तुम उठा नहीं रही हो इसीलिए दूसरे नंबर से कॉल किया। खैर, छोड़ो यह सब , काम पर…

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इसे कहते हैं ज़िंदगी

इसे कहते हैं ज़िंदगी वैसे तो मैं एक लेखिका हूँ लिखना पेशा नहीं जूनून है मेरा लेकिन अपनी जिंदगी के बारे में लिखने बैठी हूँ तो बीती जिंदगी का हर लम्हाँ एक एक करके नजरों के सामने आ गया है।क्या लिखूँ और क्या नहीं ,हर लम्हें की अपनी खूबसूरती हैं और महत्ता है।बात अपने जन्म…

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गुरु बिना ज्ञान नहीं

गुरु बिना ज्ञान नहीं शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने बचपन की याद आना स्वाभाविक है। कुछ ऐसे गुरुओं से हम मिलते हैं जो जीवन में एक याद छोड़ जाते हैं।ऐसे ही मेरे हिंदी के एक टीचर जी थे उन्हीं से संबंधित एक घटना अपने स्कूल के दिनों की याद ताजा कर जाती है।अनुशासन का…

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हिन्दी हमारा मान है

हिन्दी हमारा मान है शीघ्र ही हिन्दी बनेगी, अब हमारी राष्ट्र-भाषा। हो यही विश्वास मन में, हम तनिक छोड़ें न आशा।। एक दिन यह बात सचमुच, सत्य होकर ही रहेगी। हिंद की भाषा किसी दिन, विश्व की भाषा बनेगी।। मान हिन्दी का रखेंगे, शान कम होने न देंगे। अन्य भाषा-भाव को भी, हम उचित सम्मान…

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आजादी

आजादी क्या?? क्या कहा – ५० रूपये, दिमाग तो सही है तेरा।” काव्या ने जोर से कहा तो रिक्शा चालक ने भी कहा-“हाँ ,मैडम! कुछ अधिक नहीं मांग रहा। पचास रूपये बिल्कुल सही है। मुझे दे दें तो मैं आगे जाऊँ।” काव्या ने कहा “बिल्कुल नहीं दूंगी।२० रूपये लो।अब निकलो यहाँ से।” रिक्शे वाले ने…

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हां मैं प्रेम में हूं

हां मैं प्रेम में हूं प्रेम में हूँ..! हां मैं प्रेम में हूं..! स्वयं के..! और लगता मुझे… ये सारा संसार है प्रेममय…! शबनमी रेशमी एक सूत.. एक धागा महीन सा..! जुड़ता जोड़ता… रूहों की खुशबूओं से.. रूहों को… और रूहानियत से.. सराबोर ये ब्रम्हांड…! कल कल करता झरने सा…! अकूत स्तोत्र के खजानों संग……

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