नारी : कल , आज और कल

नारी : कल , आज और कल नारी ….ईश्वर के समान व्यापक और अपने आप में सम्पूर्ण एक ऐसा शब्द है , जिसमें समाहित है जीवन चक्र के गतिशील रहने के समस्त कारण । सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन , गति और अस्तित्व इन्हीं दो शब्दों से है । ईश्वर जो हमारे अंदर और बाहर की…

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हम सब एक चमन के फूल

हम सब एक चमन के फूल साक्षी है इतिहास हमारा गए नहीं हम भूल, हम सब एक चमन के फूल हम सब एक चमन के फूल। हम हैं हिंदू,हम हैं मुस्लिम,हम हैं सिख ईसाई, जाति धर्म के झूठे झगड़ों में हम पढ़े ना भाई, गीता,ग्रंथ,कुरान,बाइबिल सबका एक ही मूल, हम सब एक चमन के फूल…

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मैं आप की बेटी हूँ

मैं आपकी बेटी हूँ मैं उन सब बेटियों की तरफ से लिख रही हूँ जिन्हें अपनी बात रखने का कभी मौका नहीं मिला। कभी संकोचवश, कभी आदतन। घर की दहलीज के भीतर रहने वाली बेटियाँ, कदमताल पर आगे चलने वाली बेटियाँ — कुछ व्यथाएँ अनकही रह गई। लेकिन बाबा, अब्बू, बाबू जी, पापा की लाड़ली…

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दुविधा’

‘दुविधा’ आज है नारी दिवस सुबह से ही लगा है तांता बधाई संदेशों का पर मैं हो रही हूँ दो चार दुविधा से मौका खुशी का है या फिर गम का नही कर पा रही तय मैं जब झांकती हूँ भूतकाल में देखती हूँ तृप्ता , मरियम, यशोदा, जीजा बाई होती हूॅ गर्वित कि मैं…

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सूरज की ऊर्जा.. बरगद की छांव .. मेरे पापा

सूरज की ऊर्जा.. बरगद की छांव .. मेरे पापा सूरज कभी भी अपने आने का शोर नहीं मचाता, वो तो चुपचाप पूर्व दिशा में प्रकट हो जाता है और उसी से सम्पूर्ण विश्व ऊर्जावान हो उठता है। विशाल बरगद का वृक्ष कभी भी शोर मचा कर अपनी विशालता का बखान नहीं करता, उसकी उपस्थिति ही…

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हम स्वतंत्र हैं

हम स्वतंत्र हैं हम स्वतंत्र हैं…. क्योंकि….. प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस…. हर्षोल्लास से मना रहे हैं। सड़कें गड्ढों से पटी पड़ी तो क्या??? रेल-बस ठसाठस भरी हुई तो क्या??? बुलेट ट्रेन तो आ रही है हम स्वतंत्र हैं… गरीबी, अशिक्षा, मंहगाई अब बहुरूपिये हो चले, सरकारी आंकड़ों में… नज़र ना आएंगे… वैसे यत्र-तत्र-सर्वत्र नज़र ही नज़र…

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डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम

डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम (Dating the Era Of Lord Ram) मुझे याद है अक्टूबर 1991 का वो दिन जब मुझे पता चला कि मै गुर्दे के कैंसर से पीड़ित हूँ।एक सप्ताह के अंदर ही मेरा दांया गुर्दा ऑपरेशन के जरिए निकाल दिया गया।अपेक्षाओं के विपरीत विषाद की यह केवल शुरुआत भर थी। पांच…

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फ्योंली से अनमोल कोई फूल नही

फ्योंली से अनमोल कोई फूल नही यह तब की बात है जब यह माना जाता था कि हिसंक से हिंसक वन्यजीव भी मानव मांस नहीं खाते हैं। उसी जमाने में एक बहुत प्यारी सी लड़की हुई थी -फ्योंली। उसे प्रकृति से बहुत प्रेम था। यूं ही विचरते-विचरते एक दिन वह किसी जंगल में भटक गई।…

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