सुबह, दोपहर और शाम

सुबह, दोपहर और शाम दिसम्बर का अंतिम सप्ताह भारत के उत्तरी भाग में सिहरन, ठिठुरन, धूप की गर्मी, कम्बल और रजाई के मखमली अहसास और आग की तपन का होता है। और इसी महीने में आता है क्रिसमस का रंगीन त्यौहार। बाकी भारतीय पर्वों की तरह इसके दिन और महीने नहीं बदलते – यह हमेशा…

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हरि अनंत हरिकथा अनंता

हरि अनंत हरिकथा अनंता तुलसीदास के ‘हरि अनंत हरिकथा अनंता’ की तरह ही विविध आयामी और नवों रसों से भरपूर रामकथा भारत ही नहीं, विश्व के कई देशों में प्रचलित है। असल में देखा जाए तो आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण में जिन-जिन स्थानों का उल्लेख है, भौगोलिक उन सभी क्षेत्रों में साहित्य और संस्कृति के…

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मैं और मेरी दुनिया

मैं और मेरी दुनिया अति उल्लास से आत्मकथा लिखने बैठी थी । पहले तो लगा कि आज लॉटरी निकल गयी । स्व- कथा लिखनी है । लेखनी को गति मिल जाएगी । आज आत्म- जीवनी लिख सभी को बता दूंगी कि हमने किला फ़तेह कर ली । अपनी गाथा से चकाचौंध कर दूंगी दुनिया को…

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मदर्स डे पर मेरी मां

मदर्स डे पर मेरी मां मातृ दिवस के अवसर पर मेरे पुत्रों ने अपनी मां का सम्मान करने का आयोजन कियाl पत्रकार पुत्र सतेंद्र, कुमार, पुत्र अमरेंद्र के साथ खड़ी थी बहु हे- रूपा, रिंकी, रानी, अपूर्वा, पोता शिवम, आशुतोष, पोती मुस्कान, वैष्णवी, छोटा पोता श्याम, अभिराज तथा अभिनंदन और बीच में उनकी दादी दमयंती…

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धरा की व्यथा

धरा की व्यथा मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई । भूमि, वसुधा, पृथ्वी, धरणी, हूँ लाड़ली उस रचयिता की । आठ भाइयों में बहन अकेली । बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, वरुण और प्लूटो, पूरे आठ हैं मेरे भाई । मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई…

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शिक्षक

  शिक्षक जननी, प्रथम, सर्व श्रेष्ठ शिक्षक होती है अपनी, लिए गोद में पीना खाना है सिखलाती; नन्हें नन्हें पैरों से चलना है वो सिखलाती। अब बारी आती है उन शिक्षकों की, जो प्यारे प्यारे नौनिहाल को, सहनशक्ति बिन विचलित हुए क ख ग ए बी सी का पाठ पढ़ाते हैं, ख़ुद बच्चा बन बच्चों…

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ढ़ाई आखर प्रेम

ढ़ाई आखर प्रेम प्रेम शाश्वत है।इसे परिभाषित करना कठिन है।प्रेम ही जीवन का आधार है।मानव जीवन का अन्तहीन सफ़र है।मानवीय मूल्यों का निकष है प्रेम।प्रेम ही रसों का उद्गमस्थल है। बिना प्रेम दुनिया में जीना असंभव है। प्रेम स्त्री पुरुष में ही नहीं सीमित है।यह कभी कहीं किसी से हो सकता है। यहाँ पति पत्नी…

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गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे

गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे , जैसे गढ़े कोई सुनार या कलाकार शब्द नहीं हैं मेरे पास कि रूप दे सकूँ उनको साकार मजबूत इरादों वाली,गंभीर, सहनशील,गुणी ,सुशीला, सौम्या। जिसने हम भाई-बहनों के जीवन को गढ़कर आकार दिया । पिता के साथ मजबूती से हर वक्त उनको हमने देखा खड़ी । हमारी हर परेशानी में…

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गात्री

गात्री दूर-दूर तक हरियाली से भरी तराई और ऊँचे-ऊँचे नियमराजा के बोलनेवाले पर्वत! नियमराजा ही उन्हें जीने के नियम देता है। गात्री आम की घनी छाँह में खड़ी पर्वतों को निहार रही है। उम्र कोई पंद्रह-सोलह। बड़ी-बड़ी आँखें उदास, सवाल करतीं सी, साँवली चमक से भरा पानीदार चेहरा,घने बाल और सीधी माँग जैसे घने जंगल…

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