शिक्षा और नयी नीति

शिक्षा और नयी नीति शिक्षा वह आधार है,जो किसी भी व्यक्ति या देश को आत्मनिर्भर बनाती है, जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के विभिन्न अवसरों के रास्तों का निर्माण करती है और उज्जवल भविष्य के विकास और उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए दरवाजे खोलती है। वैसे तो शिक्षा के उपयोग कई हैं, परंतु, बदलते…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-भगत सिंह

शहीद भगत सिंह “गुलामी की तोड़ने जंजीर फैला रहे पंछी अब पंख हुकुमरान सजग हो जाओ बजा रहे विश्व भारती अब विजय शंख” -वंदना खुराना इन पंक्तियों से मैं चित्रण करती हूँ उस दौर का, जब हमारे वीर क्रांतिकारियों ने माँ भारती को अंग्रेजी शासनकालों से मुक्त कराया होगा। कुछ इसी तरह का विजय घोष…

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दिल का सूकुन

दिल का सूकुन दिल को सुकून देता है तेरा चांद सा मुखड़ा। बड़े भाई की जान है तू मम्मी पापा के जिगर का टुकड़ा।। बड़ी मिन्नत से तुमको पाया मां अंबे का आशीर्वाद है तू । सूने हमारे आंगन में छन छन पायल की आवाज है तू ।। तेरी बोली- मधुर रस की गोली कानों…

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कील

कील बाहर खिली – खिली धूप को देखते ही उसका मन बाहर जाने को मचल उठा ।उसने अपने पैटीओ से बाहर गार्डन में देखा पेड़ भी शांत थे लगता था वह भी चमकती धूप का आनन्द ले रहे थे । धूप से घास पर पड़ी ओस भी यूँ चमक थी मानो प्रकृति ने चमकते हीरों…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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मां-भारती का युवाओं से “आह्वान”

मां-भारती का युवाओं से “आह्वान” ये अमृत काल है ये अमृत काल है ये अमृत काल है कसम तुझे उन दिवानो की जो फंदा चूमकर झुले थे । कसम तुझे उन वीरों की जो होली ख़ून से खेले थे । कसम तुझे उन शहीदों की जो शहादत के लिये ही जन्मे थे । तू मुझको…

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हिंदी है हमारी मातृभाषा

हिंदी है हमारी मातृभाषा नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। चाहे हो जीवन में आशा, चाहे हो मन में निराशा, मिली हर अभिव्यक्ति को परिभाषा इतनी अथाह मेरी मातृभाषा ।। नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। हर सपने को शब्दों में बुना , हिंदी भाषा…

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पिता

पिता देखा है बचपन से कैसे अपनी हर ख्वाहिश को छिपा कर हम भाई बहन को दी हर सुख की छांव कभी न रुके न थके कभी न कहीं गए कभी न कोई छुट्टी बस काम और बस काम अच्छी से अच्छी शिक्षा खान पान ,पहनावा रखा हम भाई बहन का कर खुद के लिए…

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दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं दिव्या की कहानियों में एक तरफ़ औरत की परजीविता और यथस्थिति का यथार्थ है तो दूसरी तरफ़ संस्कार जनित संवेदनाएं। उनके लेखन में कहीं भी कथ्य या भाषा का आडम्बर नहीं है। अपने देश से दूर रहते हुए भी उनके पास भारतीय यथार्थ और संस्कार…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन आया कोरोना तू कहाँ से देश हमारे मचा मृत्य का तांडव विश्व भर में मचा हड़कंप ऐसा ज़िन्दगी ही सिमट गई चारदीवारी में बाज़ार हुए बंद सड़कें सुनी पलायन को मजबूर घर काम से बेघर मजदूर ऐसी मुश्किल घड़ी में डट कर खड़े हैं डॉक्टर नर्स मेडिकल स्टाफ करने को देखभाल वहीं पुलिसकर्मी सड़कों…

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