संकल्प

संकल्प दीपू ज्यादातर विद्यालय में देरी से ही पहुँचता थ। देर से आने वाले बच्चों की अलग लाइन बनवाई जाती है तथा उनका नाम भी उनकी कक्षा के अनुसार लिखा जाता है ताकि उनके कक्षाध्यापक उन्हें जान सकें और समझा सकें ।उस रजिस्टर में नवीं कक्षा में पढ़ने वाले दीपू का नाम एकाध दिन छोड़कर…

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हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी 

हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी  परमपुज्य‌ अनंतश्री‌ विभूषित योगी सम्राट श्री श्री‌ १०००८. श्री‌ देवरहा बाबा ‌जी महाराज ‌ने वर्षों ‌पूर्व प्रयाग‌राज‌‌ के कुंभ के‌ मेले‌ मे‌ संतो‌ ,राजनितिज्ञों और‌ आम‌ जनता की जिज्ञासा एवं प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ये सांत्वना ‌दी थी कि‌,,,”अयोध्या ‌मे‌ं राम‌जन्मभूमि पर‌‌ मंदिर का‌ निर्माण अवश्य ‌होगा‌। जन जन…

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श्रमदान

श्रमदान आधी आबादी करती श्रमदान बिन वेतन ताजमहल यादगार निशानी “कटते हाथ” होते हैं पूरे मजदूरों के हाथों स्वप्न हमारे आनंदबाला शर्मा साहित्यकार जमशेदपुर, झारखंड 0

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गाड़ी के दो पहिए

गाड़ी के दो पहिए शोभा रसोई में से आवाज़ दे कर पीयू को बुला रही थी कि “बेटा, रसोई में आकर थोड़ी मेरी काम में मदद कर दे। थोड़ी सी बदाम काट कर दे दे।” पीयू रसोई में अपनी मस्ती में उछलते हुए पहुंची और बोली “क्या मां, आप क्या कर रही हो?” शोभा ने…

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मुक्ति

मुक्ति नन्हीं के गांव में एक घर के आगे बड़ा-सा खलिहान था । शाम के समय उसके सारे संगी-साथी वहां जमा होकर खेलते थे। खलिहान वाले घर की लड़की भी उन बच्चों में शामिल थी। नाम था गंगा। गंगा उम्र में सब बच्चों से बड़ी थी। रिश्ते में वह किसी की बुआ लगती थी तो…

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चाय

चाय चाय;तुझे गोरों ने लाया हमारी धरती, पहाड़ों और तराइयों पर बसाया बने हरे भरे चाय बगान हज़ारों कामगार को मिले रोज़गार। चाय, तेरे रूप अनेक रच बस गई इस धरती पर पूरब -पश्चिम उत्तर -दक्षिण अमीर -ग़रीब बन गई सबकी चाहत चाय तेरे भिन्न भिन्न रंग! कभी गोरी कभी काली सर्दी में अदरक वाली,…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रतन टाटा

रतन नवल टाटा “मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता। मैं निर्णय लेता हूं और फिर उन्हें सही करता हूँ।” – रतन टाटा भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) से सम्मानित रतन टाटा एक प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति हैं, जिन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की…

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लॉकडाउन के दौरान

लॉकडाउन के दौरान ( डायरी के कुछ पन्ने ) बचपन में ऐसी फिल्में देखकर जिसमें बच्चे अपने माता -पिता से बिछड़ जाते हैं देखकर बहुत डर लगता था और सोचती थी अगर माता पिता को कुछ होना है तो मुझे भी उनके साथ हो …आज सोचती हूँ मुझे कुछ होना है तो मेरे साथ मेरे…

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अतिथि एक दिन का

अतिथि एक दिन का अच्छी भली सो रही थी और सपनों में ,पर्वतों के पार दूर कहीं क्षितिज पर सैर कर रही थी कि अचानक ही धीमे से तेज … और भी तेज होती “खट – खट” की आवाज़ ने आराम करती हुई पलकों को जबरदस्ती खोल ही दिया । मैं भी किसी प्रकार उनींदी…

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