ये चाय की प्याली

ये चाय की प्याली हो लबालब ये चाय की प्याली, छलके जबतब ये चाय की प्याली । जन्नतों का सुकून हो हासिल, छू ले जो लब ये चाय की प्याली । पाँच बजते ही बस तलब उट्ठे , माँगे साहब ये चाय की प्याली । हसरतों से वो जब मुझे देखे, इसका मतलब ये चाय…

Read More

I Am A Woman

I Am A Woman “I Am A Woman” Here I stand whole and complete in majestic beauty with Grace and Mercy about my loins and feet! The Womb of all humanity has been entrusted to me through the design and the intentions of God, The Creator Almighty! I am gentle as a breeze blowing through…

Read More

BASANT

BASANT (Spring)   Flowers during winter, Hide in earth’s cosy bed, Eager in summer for rebirth, Lifting their beautiful heads. Leaves and flowers, Just wait for the dark, wintry nights to go, And long bright sunny days to grow. Soon you see, in the months of, March April and May, Hazy mist and fog driven…

Read More

मेरी माँ

मेरी माँ ऐसी मेरी माँ , ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ गुणों की खदान, मेरे परिवार की पहचान, जीवन के मूल्यों का पाठ पढ़ाती, शिक्षक होने का सही अर्थ दर्शाती ऐसी मेरी माँ, ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ।। इसका जीवन संघर्षों की कहानी, हँस हँस कर सुनाती,…

Read More

भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-अमर्त्य सेन

डॉ अमर्त्य सेन अमर्त्य सेन अर्थशास्त्री हैं। इनका अध्ययन,चिंतन और अनुसंधान अद्वितीय है।बचपन से ही प्रतिभावान एवं कुशाग्रबुद्धि  थे। इनका जन्म 3 नवंबर 1933 में बंगाल के शांति-निकेतन  में हुआ था। सेन के पिता का नाम आशुतोष सेन था और मां का नाम अमिता सेन । अमर्त्य सेन के पिता ढाका विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र…

Read More

तुमको हमारी उमर लग जाए

“तुमको हमारी उमर लग जाए” दिन-भर भूखी प्यासी रह रात गए चांद को देख व्रत तोड़ने का नाम है ‘करवा चौथ’। लंबी उम्र पा सकने की धार्मिक घुट्टी पिला पति को आत्मबल प्रदान करने का नजरिया है इसके पीछे। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। महिलाएं स्वभाव से ही श्रृंगार प्रिय होती हैं। आभूषणों…

Read More

हरेक औरत

हरेक औरत एक वक्त ऐसी जगह पहुँच ही जाती है हरेक औरत , जहाँ खुद चुनने पड़ते हैं उसे राह के काँटे खुद बुनना पड़ता है ख्वाहिशों के धागे खुद लिखना पड़ता है तकदीर का किस्सा खुद ढूँढना पड़ता है अपने हक का हिस्सा खुद सहलाने पड़ते हैं जखम तन के खुद सुलझाने पड़ते हैं…

Read More

फिर होली में

फिर होली में हुई आहट खोला था जब द्वार मिला त्यौहार । आया फागुन बिखरी कैसी छटा मनभावन। खेले हैं फाग वृन्दावन में कान्हा राधा तू आना। तन व मन भीगे इस तरह रंगों के संग। स्नेह का रंग बरसे कुछ ऐसे छूटे ना अंग। रंगी है गोरी प्रीत भरे रंगों से लजाई हुई। आई…

Read More