कैसे दिन फिरते जाते हैं

कैसे दिन फिरते जाते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं मास दिवस लगते पर्वत से, उलझन नित बनते जाते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं। बाग बगीचे घूमने के दिन छोटी अमिया लाने के दिन कूक पपीहा बौराते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं। चैता फागुन खा गया कहर यह फैल गया है शहर-शहर सपने…

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कस्तूरबा गाँधी से एक काल्पनिक मुलाकात

कस्तूरबा गाँधी से एक काल्पनिक मुलाकात खट्दर की साड़ी, ढँका हुआ सिर, माथे पर गोल बिंदी, कलाई में सादी चूडियाँ – इस छोटी दुबली — पतली महिला को देखकर विश्वास ही नहीं हुआ कि उसमें कितनी शक्ति समाहित है। उसकी उपस्थिति से ही कमरा जैसे जीवंत हो गया। कमरा खचाखच भरा हुआ है। सबके मन…

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सुमधुर भारत वर्ष हमारा जाने कितनी कवियों ने दोहराई होगी बात पुरानी , आज सुनाता हूँ मैं तुमको नव भारत की नई कहानी। नई पुरानी सभ्यताओं का संगम भारत वर्ष कहाता, यहाँ कभी ना टूटा नई पुरानी संस्कृतियों का नाता। यहाँ जुड़ी है कड़ियां कितने रस्मों और रिवाजों से, यहाँ मिली है धड़कन कितनी धर्मों…

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हिन्दी : कल, आज और कल

हिन्दी : कल, आज और कल हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी…

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सर्वं शिवमयं जगत

सर्वं शिवमयं जगत ‘सर्वं शिवमयं जगत:’ – इस जगत में सबकुछ शिव का ही प्रकटीकरण है। वह सबसे सुंदर हैं तो सबसे भद्दे और बदसूरत भी। अगर वो सबसे बड़े योगी व तपस्वी हैं तो सबसे बड़े गृहस्थ भी। वह सबसे अनुशासित भी हैं, सबसे बड़े पियक्कड़ और नशेड़ी भी। वे महान नर्तक हैं तो…

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प्रभु राम की अयोध्यापुरी

प्रभु राम की अयोध्यापुरी अयोध्या में राम लला की घर वापसी पर प्रभु राम को समर्पित कुछ पंक्तियाँ आज अयोध्या धाम सजा है दीपों से राम हर दीप में जगमग करता है प्रभु का नाम धरती पुण्य दिशायें गुँजे देखो है आकाश पावन सरजू लहर कहे पुनीत हुआ ये काम । भारतवर्ष के इतिहास में…

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कान्हा का मनका

कान्हा का मनका अब तो लौ लागी कान्हा, तेरे श्यामल श्री चरणों में । जन्म जन्म का साथ हमारा, युगों युगों की मेरी प्रीत। बना दे मुझे छोटा सा मनका, चुन ले मुझ को, जड़ ले मुझ को, अपनी रुनझुन पैजनियों में । अब तो लौ लागी कान्हा , तेरे श्यामल श्री चरणों में। औक़ात…

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रिश्ता

रिश्ता एक तेज हवा के झोंके की तरह उनके जीवन में आई थी अनुष्का | एकदम अल्लढ मदमस्त नवयौवना | चार्वाक दर्शन को जीवन का आधार मनाने वाली | सीधे-साधे उत्कर्ष के जीवन में एक तूफान बनकर कुछ तीनों के लिए आई और उसके सम्पूर्ण जीवन को है बदलकर रख दिया | उत्कर्ष उठो! कितना…

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पावन बेला

पावन बेला   अयोध्या नगरी में खुशियाँ ले रही हिलोरें मंगल बेला है आई आनंद छाया हर ओर जगमग जगमग दीपों से होगा उजाला हर घर हर मंदिर, हर द्वार तोरन, फूल मालाओं, रंगोली से सज उठेगा कोना कोना महक उठेंगी फूलों की मालाएं क्या गेंदा, गुलाब, मोगरा, रजनीगंधा धूप, कपूर, अगरबत्ती की महक से…

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