आजादी का अमृत महोत्सव :राष्ट्र प्रथम ,सर्वदा प्रथम

आजादी का अमृत महोत्सव :राष्ट्र प्रथम ,सर्वदा प्रथम   इस वर्ष,15 अगस्त 2023 को भारत ” राष्ट्र प्रथम, सर्वदा प्रथम ” की थीम के साथ 77वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है । इसके साथ ही यह खड़ा है-आजादी के अमृत महोत्सव की उत्सवभूमि पर।आज़ादी के अमृत महोत्सव की आधिकारिक यात्रा की शुरुआत 12 मार्च ,…

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यथा नाम तथा गुण

यथा नाम तथा गुण दिव्या जी से मेरा परिचय भले ही ऑनलाइन मोड का हो पर वे बहुत आत्मीय हैं। उनके अनेक अनेक रूप हैं, वे एक साथ एकोअहम बहुस्याम हैं। कवि, रचनाकार, संपादक, आयोजक, अनेक पुरस्कारों से सम्मानित, कम शब्दों मे गहरी और गंभीर बात कह जाने वाली, हीरे की माफ़िक हैं, रहिमन हीरा…

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माँ! अब मैं जान गई हूँ

माँ! अब मैं जान गई हूँ नन्ही-सी मुन्नी उम्र में छोटी है तो क्या हुआ चौदह-पंद्रह साल की छोटी-सी उम्र में उसको प्यार,लड़ाई और गालीगलौज़ सब समझ आता है। दिल्ली की एक गन्दी बस्ती में छोटी-सी खोली है उनकी। उस खोली में रहने वाले पांच प्राणी, माँ-बाबा,मुन्नी और उसके दो छोटे भाई नंदू और छोटू|…

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इसके बाद

इसके बाद महामारी बची आँखों को दे जायेगी भविष्य में देखने वाली तीसरी आँख कटेंगी हाथ की हथेली में समान्तर चलने वाली दो जीवन रेखाएँ अनिवार्य होगा भूख के अर्थशास्त्र में श्वाँसो का निवेश नये इतिहास में सर्वाधिक गतिशील होंगी वर्तमान के कारावास में बंदी तारीखें काट कपट के बीज से उगे उन्मादी विषैले फल…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिन्दी भारत की हर श्वास है, इक नवीन विश्व की आस है। तन में बहता अरुण रक्त है, हर भारतवासी इसका भक्त है। हिंदी प्रेम-विजय की बोली, मानवता पनपी इसकी झोली। यही ग्रीष्म-शीत ऋतु बसंती, माँ देवी के माथे की बिंदी। वर्ण से शब्द, शब्द से वाक्य, हर भाव में भाषा महान है।…

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प्रेम की पूरकता

प्रेम की पूरकता तुम कोई गीत लिखो तुम कोई गीत लिखो, और मै गाऊं, गीत माटी के, गीत फसलों के, गीत सुबह-शाम ,गोधूली-विहान के. तुम कोई सूरज गढ़ों, और मै .. किरणों का परचम सजाऊं, मन की मञ्जूषा में यादों के साये हैं, भूले बिसरे नगमे बादल बन छाये हैं, जीवन के आँगन में तुम,…

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पुनरावृति

पुनरावृति। चारों ओर लुढ़कते पासे हैं, दाँव पर लगी द्रोपदियाँ हैं, लहराते खुले केश हैं, दर्प भरा अट्टहास है, विवशता भरा आर्तनाद है, हरे कृष्ण की पुकार है… चारों ओर पत्थर की शिलाएँ हैं, मायावी छल है, लंपटता है, ना जाने कितनी ही अहिल्याओं की पाषाण देह है, नैनों में आत्म ग्लानि का नीर भरे,…

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अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

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शाश्वत प्रेम

शाश्वत प्रेम मचलती-बलखाती नदियाँ, किनारों से टकराती नदिया, अपनी रवानगी में बहती चली जाती है मौन सागर में समाने को। खुद को खो कर कुछ पाना है, हार में ही जीत है यह कहती जाती है नदियाँ! गुलाब खिला है खुश्बूओं से सुवासित है। पर खो देता है अपनी सुगंध मुरझाने पर। आखिर वो खुश्बू…

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