एक स्त्री की तीन आवाजें !
एक स्त्री की तीन आवाजें ! दोपहर की चाय जब तक उबलती, तब तक सीमा खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाती। सामने स्कूल से लौटते बच्चे, दूध वाला, दोपहर की सुस्ती में पसरे कुत्ते और बगल की अरोड़ा आंटी की आवाज़ें – सब रोज़ की तरह चल रहा होता, पर सीमा की…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अरूणा आसफ़ अली
भारत रत्न अरूणा आसफ़ अली आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष में जब हम देश भर में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं । तब अपनी मातृभूमि को सौभाग्यशालिनी कहने से मन को असीम प्रशंसा होती है। भारत भूमि सदा विशेष रही है ।अपनी धन संपदा, वनसंपदा, खनिज भंडारों और प्राकृतिक सौंदर्य और विविधता के क्षेत्र…
हार कभी न मानी
हार कभी न मानी राह कठिन है जीवन की पर हार नहीं मानी है. पर्वत-सी ऊँची मंज़िल पर चढ़ने की ठानी है. जीवन के पाँच दशक पार हो जाने के बाद जब अपने जीवन को एक द्रष्टा के तौर पर देखती और विश्लेषण करती हूँ तो लगता है एक व्यक्तित्व वस्तुतः अपने माता-पिता…
वाफर का तॉरेपकिऊ
वाफर का तॉरेपकिऊ वाफर के दूरवर्ती गाँव का “गाँव बुड़ा’ (प्रमुख), 75 वर्षीय तॉरेपकिऊ, अपने पर्यावरण हितैषी घर के अहाते में मनोभावन धूप सेक रहा था। यह गाँव नागालैंड के टूयेनसांग जिले के समतोर ब्लॉक में अवस्थित था। 2 अगस्त, 2010 अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही गर्म था। पिछली रात की लगातार वर्षा…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- दयानंद सरस्वती
महर्षि दयानंद सरस्वती-वेदों की ओर लौटो महर्षि दयानंद सरस्वती जी आधुनिक भारत के चिंतक, निर्माता एवं आर्य समाज के संस्थापक थे। वह एक धार्मिक महापुरुष एवं समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं। बहुत कम व्यक्ति यह जानते हैं कि वह प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अग्रदूत रहे हैं। राष्ट्र की स्वतंत्रता में उनके योगदान…
पापा की तरह
पापा की तरह नहीं बन पाती कलाकार पापा की तरह फटी जेब में भी जो मुस्कुराहटें संभाल लाते थे परेशानियों के गद्दे पर भी जो रेशमी चादर बिछाते थे हर ईंट में खुद को ढाल घर हमारे लिए बनाते थे । नहीं आता हुनर पापा की तरह पसीने से तर – बतर जो जेठ की…
अंतस् का संवाद …
अंतस् का संवाद … तेरा तेरे अंतस् से होता हुआ संवाद हूँ ! या कह लो मैं शिक्षक हूँ , या कहो उस्ताद हूँ ! अंभ अगोचर पथ कंटकमय , हिय तनू आक्रांत तो सत्य सनित मैं संबल सा नित काटता अवसाद हूँ ! मैं ही गीता की थाती हूँ , धौम्य का भी रूप…
प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना
प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…
You Are My Valentine
On the Wedding Day They came to a wooden village church, she in a borrowed dress, its white sprinkled grey by time, he in his elder brother’s suit. Both beautiful and young, ready to grapple with fate. They vowed love in voices trembling with emotion, faith and hope sealed the solemn words. They took for…