सच्चे प्यार की परिभाषा

सच्चे प्यार की परिभाषा एम्बुलेंस १०० की स्पीड में सड़क पर दौड़ रही थी। अंदर नर्स कोयल को संभालने का भरसक प्रत्यन कर रही थी। मुँह पर लगे ऑक्सीज़न मास्क के बाबजूद कोयल की उखड़ी साँसे सामान्य नहीं हो पा रही थी। कोयल राज का हाथ पकड़े तड़प रही थी। उसकी बड़ी बड़ी आँखे बहुत…

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राम का राज्याभिषेक

राम का राज्याभिषेक आश्वस्त हैं राम अपने धर्म,सभ्यता और संस्कृति से परंतु आशंकित है वर्षों बाद घर वापसी में, मंथरा का (दासो का) कुनबा पूँछ सकता हैं उनका नाम और जन्मस्थान -!!! सीता तुम पुरूष चित्त से सोचना मानवीय आचरण के राम मर्यादा के पुरूषोत्तम राम तुम्हारे लिए वन वन भटके राम कितना कठिन है…

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देश सर्वोपरि

  देश सर्वोपरि देश है घर मेरा देश है घर तेरा फिक्र खुद की अगर है बचा लो इसे राह रौशन रहे चाह रौशन रहे तुम बनो सारथी और सँभालो इसे ! गाय ,गंगा , हिमालय की हो आरती , माँ से बढ़कर है हम सब की माँ भारती , आओ वंदन करें अभिनंदन करें…

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कोरोना

कोरोना कोरोना को रोक दो , सुनो सभी तुम आज । इसे महामारी कहें , या करना कुछ काज ।। सभी साफ रहना सदा , भीड़ भाड़ से दूर । साफ सफाई हाथ की , रहे वायरस दूर ।। सादा जीवन हो सदा , रखना उच्च विचार । शाकाहारी हो सुनो , सुंदर हो आचार…

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वर्तमान साहित्य में स्त्री उत्थान क्यों और कैसे ?

  वर्तमान साहित्य में स्त्री उत्थान क्यों और कैसे ? साहित्य के संदर्भ में चाहे अतीत हो या वर्तमान अथवा भविष्य। उत्पीड़ा की एक त्रासदी होती है। अतीत हमेशा भुक्तभोगी पीड़ाओं से गुज़रता है, तो वर्तमान आशादायी भविष्य की ओर संकेत करता है। पीड़ा और त्रासदी में कोई परिवर्तन नहीं होता, केवल समय गतिशील होता…

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नेचर  का उपहार 

नेचर  का उपहार  आज के इस आर्टिकल में हम आपको इन नेचुरल चीजों को इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आप घर पर बड़ी ही आसानी से बना सकती हैं- मुलतानी मिट्टी से बनाए फेस पैक मुलतानी मिट्टी में एक चम्मच गुलाब जल मिलाए और चेहरे पर लगाकर 10 मिनट तक सूखने…

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जीवनसाथी

जीवनसाथी (करवाचौथ पर जीवनसाथी को समर्पित) रिक्त स्थान के मध्यांतर का भराव हो तुम कभी सुनी है धड़कनों के बीच की एक गहराई सुनो वह मेरी गहरी आवाज़ हो तुम..!! अक्सर दिमाग में उठते है कई सवाल और उन सवालों के जवाब कभी नही मिलते सुनो एक गुमशुदा प्रतिउत्तर हो तुम …!! शांत बहते पानी…

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युद्ध लड़ रही हैं लड़कियाँ

युद्ध लड़ रही हैं लड़कियाँ कविता संग्रह- युद्ध लड़ रही हैं लड़कियाँ कवि-वीरेंदर भाटिया प्रकाशक- संभव प्रकाशक, प्रेमचंद्र पुस्तकालय तितरम, कैथल-136027 (हरियाणा) प्रथम संस्करण- 2020 स्वतंत्र सदी में युद्ध लड़ रही स्त्रियाँ : पर-तंत्रता यह समय पुस्तक समीक्षा का एक ऐसा दौर है जहां हर समीक्षाकार व्यक्तिगत तौर पर ध्यान रखकर समीक्षा करने पर आमादा…

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हिन्दी

हिन्दी हिन्द के हिन्दोस्तां की बेटी है.हिन्दी। भारत के ललाट की शोभा बिन्दी है हिन्दी। देवभाषा संस्कृत की पुत्री बनकर उपजी हिन्दी। सभी भाषाओं की अग्रजा बनकर आई है हिन्दी। सभी बोलियाँ संग साथ ले हिल मिल संग चले । अपने और परायों बीच संवाद बनी हिन्दी। भाषा जोड़ रही है सबको एक छत्र के…

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हिन्दी है अभिमान

हिंदी है अभिमान हिंदी हिंदी प्यारी हिन्दी हिन्दी है अभिमान जग जग में गूंजे ये है, हमको हैअभिमान मीठे बोली लगती हिन्दी, प्रेम रस बरसाती है अनजाने भी मीठे कंठ से बोले है हिंदी महान प्रेम पाठ पढ़ाती है देश को, देश से मिलाती है हिंदी देश की शान है हम सबको अभिमान है भाषाओं…

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