शतबार नमन! शतबार नमन!!
शतबार नमन! शतबार नमन!! हिमालय की ऊँचाई पा, जिसका जीवन रहा सफल; गतिक जीवन से यकायक, हो गया जो निष्पंद, निश्चल; रहा जीवन-पर्यंत जो- निन्छल, निर्विकार, निर्मल; शैलेन्द्र सा विराट, विमल- शैलेन्द्र-व्यक्तित्त्व था धवल! झंकृत-जीवन से हो मौन, टूट गये वीणा के तार; चलते-चलते ही मानो वे- ओझल हो गये क्षितिज पार; खोजते रहे हम…