डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम

डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम (Dating the Era Of Lord Ram) मुझे याद है अक्टूबर 1991 का वो दिन जब मुझे पता चला कि मै गुर्दे के कैंसर से पीड़ित हूँ।एक सप्ताह के अंदर ही मेरा दांया गुर्दा ऑपरेशन के जरिए निकाल दिया गया।अपेक्षाओं के विपरीत विषाद की यह केवल शुरुआत भर थी। पांच…

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हँसी बेगम बेलिया

  हँसी बेगम बेलिया ज़िद में ही मौसम ने हवाओं को छू लिया हरे-हरे पातों में हँसी बेगम बेलिया सड़कों पर चिड़ियाएँ पेड़ से नहीं उतरीं खाली पाँवों चलती धूप भी नहीं ठहरी साथ रहती समय के नहीं कुछ भी किया चाँदनी में भींगी पानी नाली नदियाँ रिश्ता ही बनाती है ये आती जो सदियाँ…

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महाभिनिष्क्रमण

महाभिनिष्क्रमण आखिर चले ही गए तुम हाँ बताया था तुमने जीवन का ध्येय विश्व का उद्धार बोध की पिपासा बहुत से कारण थे बस मैं ही नही थी पिछले जन्म से चाहा था तुम्हें सुमेध भद्रा बनकर वादा लिया था अगले जन्म का क्या खूब निभाया तेरह वर्षों की तपस्या का प्रसाद था ‘राहुल’ पर…

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मेरा परिचय

मेरा परिचय मेरा नाम आशा मुखारया है।मैंने राजनीति शास्त्र से एम. ए. किया है।मेरे पति डा. पी. एस. मुखारया है।वो हिस्ट्री के प्रोफ़ेसर थे।मेरा बेटा विवेक कम्प्यूटर इंजीनियर है,यहाँ अमेरिका में सिटी बैंक में काम करता है और मेरी बहू निधि भी कम्प्यूटर इंजीनियर है।वो भी जॉब करती है।दो पोते हैं,बड़ा पोता इंजीनियर होकर अटलांटा…

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फ़रिश्ता

फ़रिश्ता सरकारी अस्पताल के बिस्तर पर लेटी हुई सुशीला काफ़ी कमजोर लग रही थी।परन्तु उसकी आँखों में एक अद्भुत चमक थी। वह अपने नवजात शिशु को जो बग़ल के पालने में लेटी थी , उसे ममता से भरी वात्सल्य से एकटक निहार रही थी।उसका पति हरिया उसके पास ही बैठा था।हरिया दिहाडी मज़दूर था। सुशीला…

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हिन्दी दिवस : चुनौतियां व प्रोत्साहन

हिन्दी दिवस : चुनौतियां व प्रोत्साहन आजादी के 76 वर्ष पूरे हो गए परन्तु हिन्दी राजभाषा से राष्ट्रभाषा का सफर नहीं तय कर पाई। विविध भाषाओं एवं संस्कृतियों की संगमस्थली भारत में आज की वर्तमान तिथि तक हिंदी जन – जन की भाषा है भी नहीं।कई प्रांतों में उनकी स्थानीय भाषाएं ही जन को जन…

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शहीदों के नाम

शहीदों के नाम आज मौन हैं मेरे शब्द नहीं लिखनी मुझे कोई कविता क्या सचमुच इतने समर्थ हैं मेरे शब्द ? इतनी सार्थक है मेरी अभिव्यक्ति / कि रच दूँ आपके बलिदानों को सिर्फ एक कविता में…… हाँ, नहीं लिखना मुझे अपने जज्वात अपने अंदर उपजे असीम वेदना की लहर…. कैसे व्यक्त कर दूँ कुछ…

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 चूड़ी वाले हाथ   

 चूड़ी वाले हाथ      रायदा….. 25 या 30 खपड़ैली झोपड़पट्टी वाला, शहरी चमक दमक से दूर, अशिक्षा और अज्ञानता की बेडि़यों में जकड़ा हुआ एक बेहद छोटा सा गाँव……. सरकारी कागजों में इस गाँव के हर घर में बिजली आ चुकी है, लेकिन सरपंच जी का घर छोड़, सभी घरों में आज भी लालटेन ही…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव

परमवीर-कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव हम कहते हैं आजादी हमें देश के नेताओं ने नागरिकों ने, क्रांतिकारियों ने, समाज सुधारकों ने, अहिंसा  के पुजारियों ने, अपना लहू बहाकर, तन-मन -धन न्योछावर करके दिलवाई है। लेकिन कभी हमने सोचा कि यह आजादी सदा यूँ ही बनी रहे,  अक्षुण्ण रहे और हमारे देश का तिरंगा नील गगन में…

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