हिन्दी 

हिन्दी  बचपन मे तुतलाकर बोली,वो मधुर से बोल हिन्दी अम्मा ने ‘माँ’ ‘माँ’ सिखलाया,प्यार का रस धोल हिन्दी दिल से आंँगन तक बहती नद,प्रीत की वह जीत हिन्दी उत्तुंग हिम शिख की ऊंचाई,धवल मणिकांत सी हिन्दी हिन्द महासागर गहराई,रत्न जो निपजाय हिन्दी। इसमेंअमृत सी मिठास है,सूरज की उजास हिन्दी ‘भारतेंदू’ ‘प्रेम’ महावीर’,ने भरे भंडार हिंदी।…

Read More

इन्तजार

इन्तजार गत चार सालों से उर्मि रांची के मानसिक चिकित्सालय में जिन्दगी के मनहूस दिन काट रही है । हर शाम उसे किसी न किसी का इन्तजार रहता है । आँखें दरवाजे पर लगी रहती हैं शायद कोई आ जाय । किसी मरीज के घरवाले आते हैं किसी के रिश्तेदार मिलकर जाते हैं , पर…

Read More

मैं कतरा कतरा

मैं कतरा कतरा मैं क़तरा क़तरा अन्तस् का लो तुम्हें समर्पित करती हूँ। बस याद में तेरी दीपक सी प्रिय लौ बनकर मैं जलती हूँ। मेरे जीवन के मरुथल में, तुम ही पानी की धार बने। पतझड़ के मौसम में प्रियतम, तुम साँसों का आधार बने। अब दरस की आस में अँखियों से, मैं स्वयं…

Read More

संवाद

संवाद “अरि ओ पिंकी,सुना है तेरे पड़ोस में एक नई फैमली रहने आई है,कैसा है वह परिवार?” रिंकी ने घर मे घुसते ही अपनी सहेली पिंकी से पूछा। पिंकी अपनी प्यारी सहेली को देख बहुत खुश हुई,और बोली” मैं सोंच ही रही थी तुम्हें इस नये पड़ोसी के विषय में बताऊँ, जैसा कि तुम्हें पता…

Read More

Father’s Day

मेरे बाबूजी भोले भाले ,सीधे-साधे, सबसे अच्छे बाबूजी थे । दृढ़ प्रतिज्ञ, उज्जवल चरित्र, कर्म योग के योगी थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे। अनुशासित जीवन था उनका। उच्च कोटि के शुद्ध विचार। न्याय सदा करते थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे । गहराई से सोच समझ कर कर, बात समय पर करते…

Read More

चूड़ियों की खनक

  चूड़ियों की खनक रवि के पैर का उत्साह जैसे हवा से बात कर रहा था।घर जल्दी पहुंचने के लिए उसके पैर आतुर हो रहे थे। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वक्त के साथ हमें यू इतने लम्बे समय तक इस तरह अलग रहना पड़ेगा । पूरे एक वर्ष बाद आज उससे मिल…

Read More

अच्छा लगता है

अच्छा लगता है सुनो न , बहुत दिन से कुछ कहना है तुमसे! पर उस बात का ज़ायका मुँह में घुलता है कुछ इस तरह, वो बात कह ही नहीं पाती । सुनो तो….. तुम अच्छे लगते हो अब ये मत पूछना क्यों : इन फैक्ट मेरी बात पूरी होने दो पहले फिर कुछ भी…

Read More