भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा का उलगुलान तब भगत सिंह का जन्म नहीं हुआ था, सुभाष अपनी माँ की गोद में थे, गाँधी को अफ्रीका से लौटना बाकी था और छोटानागपुर के घने जंगलों में एक आदिवासी नवयुवक अपने सीमित संसाधनों और सेना के साथ अंग्रेजों के शासन से आजादी का बिगुल फूंक रहा था | स्वराज्य की…

Read More

सौम चन्द्रिका

सौम चन्द्रिका गरल गरल हुआ वदन सुधाविहीन सिंधु मन। जल रहा नयन नयन धुआं धुआं धरा गगन।। स्वार्थ छद्म से यहाँ चिनी गई इमारतें मूक प्राणियों के कत्ल से सजी इबादतें नाम पर विकास के हरा भरा भी कट रहा वक्ष भूमि का लहूलुहान जैसे फट रहा कर्णभेदती बिगाड़ती रही ध्वनि: पवन मूल से उखड़…

Read More

मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब

मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब प्रतीक्षा तो थी मिलेगा मुझे भी गुलाब मन मसोस कर रह गयी जब बिन कुछ कहे चले गए वो, मायूस हो जा खड़ी हुई आईने के सामने क्या सचमुच उम्र हो चली अब ? क्या नहीं हक़ एक गुलाब का भी ? तभी आई अंतस से आवाज़ न हो…

Read More

यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

Read More

Unexpected days

Unexpected days We are living in unexpected days, the whole world seized by a primary instinct of self-preservation has locked itself in and is trying to escape death. States are destitute, unprepared and obsessed with winning more and more, they behave without humanity. No cologne to put on our hands or disinfectant, not even simple…

Read More

मैं बोल रही हूँ

मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्‍म होने में एक घंटा और था। स्‍मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्‍छी खासी भीड़ थी। ज्‍यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्‍यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…

Read More

सौभाग्यवती रहूँ

अमर ज्योति मैं कहां जाऊंगी मैं तो आती रहूंगी यूहीं सांसे टूटने तक अपनी गुनगुनाती रहूंगी यूहीं!! जब भी डूबने को होगा सांझ का ये सूरज, जुगनू बन आंगन में तेरे टिमटिमाती रहूंगी यूहीं… मोल नहीं मांगूंगी कभी अपनी मोहब्बत का, हक अदा करूंगी सदा अपनी इस उल्फत का, बेमोल अपने प्यार को लुटाती रहूंगी…

Read More

मातृदेवो भव

मातृदेवो भव दुनिया की हर चीज झूठी हो सकती है, हर चीज में खोट हो सकता है पर माँ की ममता में कोई खोट नहीं होता है। यूँ तो यह माना जाता है कि किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है, अपने भाव को व्यक्त, किया जा सकता है और अमूमन ऐसा होता भी…

Read More