भजन

    भजन हर शाम की तरह इस शाम भी पार्क में काफी चहल-पहल थी ।पार्क के बीचोंबीच एक गोलाकार छज्जेदार चबूतरा सा बना था।प्रत्येक शुक्रवार को शाम छः से सात बजे तक वहां पर भजनों का कार्यक्रम चलता था। आस-पास रहने वाली औरतें जमा हो कर भजन गाती थीं । आज भी भजन चल…

Read More

मैं कतरा कतरा

मैं कतरा कतरा मैं क़तरा क़तरा अन्तस् का लो तुम्हें समर्पित करती हूँ। बस याद में तेरी दीपक सी प्रिय लौ बनकर मैं जलती हूँ। मेरे जीवन के मरुथल में, तुम ही पानी की धार बने। पतझड़ के मौसम में प्रियतम, तुम साँसों का आधार बने। अब दरस की आस में अँखियों से, मैं स्वयं…

Read More

माँ है तो संसार है

माँ है तो संसार है माँ है तो संसार है बिन उसके न प्यार है। माँ की ममता तो ईश्वर का दिया उपहार है।। स्नेह अपार प्यार क्या न दिया माँ ने हमे। माँ की ममता में ही तो जीवन का सार है।। दूर होकर भी जो सदा दिल मे बसती है । एक जरा…

Read More

बेचारी शिक्षा

बेचारी शिक्षा पुस्तकों की गलियों में भटकते – भटकते, मुलाकात हो गई शिक्षा से, मैंने पूछ लिया उससे, यूंही हाल उसका। रूआंसी होकर बोली वह, मत पूछो क्या हाल है मेरा, पहले रहती थी गुरुकुलों में, सादगी और संस्कारों के संग, पर अब हो गईं हूँ बाजारू, कभी पैसों के बल पर बेची और खरीदी…

Read More

मातृरुपेण हिंदी

मातृरुपेण हिंदी हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने ज्ञान-विज्ञान,वेद-ऋचाओं, और! कर्त्तव्यों का एहसास कराया, सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा, देश विदेश को जोड़े रखा,…

Read More

कैसी कायरता

कैसी कायरता रावण के वंशज , तुमने यह कैसी कायरता दिखलाई है पीठ में छुरा घोंपकर, कैसी हैवानियत दिखलाई है चवालीस घर का दीपक बुझाकर, यह कैसा अन्याय किया पुलवामा की धरा पर यह कैसी क्रूरता दिखलाई है वीर सपूतों का बदला लेकर रहेंगे शहीदों की शहादत लेकर रहेंगे कैसी छीना -झपटी चाल है तेरी…

Read More

साइकिल

साइकिल “गौरी की माँ जरा पानी तो पिलाओ।” रामधर पसीने से तर-बतर थे,चेहरा गर्मी से लाल हो रहा था। “कुछ काम बना..?” रामधर ने एक सांस में पानी गले के नीचे उतार दिया और तौलिये से मुँह पोछने लगे। “जरा पंखा तेज कर दो..” मालती मशीन की तरह रामधर की हर बात का पालन करती…

Read More