हिंदी ऐसी भी

हिंदी ऐसी भी “सुनिये, आप मेरा मोबाइल दुकान पर जाकर दिखा लाओ। इसमें बहुत दिनों से राहुल का फोन नहीं आ रहा। शायद अमेरिका का नेट यहाँ काम नहीं कर रहा।”, वेणु हाथ में लिए मोबाइल को किशोरजी को देते हुए बोली। “अरे वेणु..”, कहते हुए किशोरजी बोलते हुए चुप हो गए और मोबाइल लेकर…

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PEACE ON EARTH

PEACE ON EARTH Christmas is a time of venerable peace, You can look at bejewelled stacks of trees, And the world often perceived as intense, When family reunions break messy fences. Snow’s candid praise bedecks the gate, Children hang their socks and wait , It is the eve of Christmas never late, Harbinger of change…

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कन्या

कन्या वृष्टि प्रथम बूँद सा निर्मल मीन समान सुनयन सजल! सृष्टि सृजित सुमन सुकर नव कुसुमित रक्तिम अधर! इह लौकिक पारलौकिक सुख नृत्य नित्य करती सहज सगर ! कोर अवतरित यदा सुकन्या हुई जननी संग कुटुम्ब धन्या! नृत्यति सुरभित सकला मही प्रभु तव नत शीश पितामही ! डॉ भारती झा 0

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कजाकी

कजाकी मुंशी प्रेमचंद बहुत ही सहज सरल किन्तु असाधारण व्यक्तित्व के मालिक थे. वे अपनी हर कहानी को पहले अंग्रेजी में लिखते, उसके बाद उसका अनुवाद हिंदी और उर्दू में करते इस तरह तीनों भाषाओँ पर उनकी बराबर से पकड़ थी. उन्होंने अपने जीवन की साधारणता की और इंगित करते हुए कहा था की “मेरा…

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गण-तंत्र 

गण-तंत्र  हम कितने भाग्यशाली हैं कि हम भारत की संतान हैं, जो पूरी तरह से लोकतंत्र या कहिये गणतंत्र राष्ट्र है..हमारा संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और विशाल लिखित संविधान है. लोकतंत्र की विशेषता है कि यह जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा संचालित होता है. हमारा गणतंत्र अपने उद्देश्यों की कसौटी पर…

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हम तुम

हम तुम हम तुम जब मिले थे कितने अंजान एक दूसरे से बिल्कुल दो अजनबी से धीरे धीरे हुई जान पहचान कभी नोंक झोंक कभी तीखी तकरार कभी गुस्सा कभी सुलह यूँ कब फिर बन गए दोस्त और रंग गये एक दूजे के प्यार में खबर भी न हुई यूँ वक्त लेता रहा इम्तिहान कई…

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माँ! अब मैं जान गई हूँ

माँ! अब मैं जान गई हूँ नन्ही-सी मुन्नी उम्र में छोटी है तो क्या हुआ चौदह-पंद्रह साल की छोटी-सी उम्र में उसको प्यार,लड़ाई और गालीगलौज़ सब समझ आता है। दिल्ली की एक गन्दी बस्ती में छोटी-सी खोली है उनकी। उस खोली में रहने वाले पांच प्राणी, माँ-बाबा,मुन्नी और उसके दो छोटे भाई नंदू और छोटू|…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- वीर सावरकर

वीर सावरकर बड़े भाग्यशाली होते हैं वो लोग जिनके सिर पर हमेशा माता-पिता का साया रहता है, मगर किसी के बाल्यकाल में माता-पिता का साया उठ जाना कितना दुःखदायी होता है और यदि ऐसा व्यक्ति देश के नाम पर समन्दर पार किसी खतरनाक जेल भेज दिया जाये जिसमें निर्दयी जेलर उसे कोल्हू के बैल की…

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ख्वाब

ख्वाब नैना मेरे चुप मत रहना , कह दो दिल की बात। ख्वाब सुहाने जब भी देखे ,बहते क्यों हर रात।। कभी निराशा ने है जकड़ा , पर उम्मीदें साथ । कभी हँसाते कभी रुलाते , कभी छोड़ते हाथ।। संवेदित हैं मेरी पलकें, या दिल के जज़बात । ख्वाब सुहाने जब भी देखे, बहते क्यों…

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किश्ती और तूफ़ान

किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…

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