मनीराम दीवान

मनीराम दीवान अठारहवीं शताब्दी में अंग्रेज चाय चीन से खरीदते थे। मगर उनकी व्यापार में बेईमानी और लाभांश पर सौ प्रतिशत कब्जा चीन को नष्ट किये दे रहा था। अतः एक बड़ा युद्ध हुआ जिसमे चीन ने अंग्रेजों को चाय देने से इंकार कर दिया।जिससे उनका चीन की चाय पर से एकाधिकार जाता रहा।उधर अमेरिका…

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अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना

अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना समय की विषम आंधियों में आस का दीप जलाए रखना अपने उपायों और खूबियों से भारत को बचाये रखना धरती देखो नभ देखो हे ईश्वर! इस कहर से बचाए रखना हे लाड़लों! हम साथ है ये विश्वास बचाये रखना चलो साथियों एकजुट हो इस दानव से जिंदगी की जंग चलाए…

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गाँधी गुब्बारे वाला

गाँधी गुब्बारे वाला वो देखो देश के कर्णधारो, गाँधी गुब्बारे वाला! चला आ रहा है, फट फटिया पर, बिन लाठी और लोटा, अरे यह तो विद्वान विचारक राष्ट्र पिता हुआ करता था! व्यवसाय बदलकर विक्रेता क्यों बना? वो भी गुब्बारों का? हाँ पूछा था मैंने जुटाकर हिम्मत तो, बेचारा बिफर पड़ा, और कहने लगा, मेरी…

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शैल अग्रवाल की कविताएं

शैल अग्रवाल की कविताएं   1.प्रेम में अक्सर शब्द जो कभी कहे ही नहीं गए साफ-साफ सुने जाते हैं जैसे बारिश की बूंदें गिरती हैं रेगिस्तान में खो जाने को धीरे धीरे जैसे भूखे की आँख में आ जाती है चमक रोटी की आस में जैसे प्रार्थना में शब्द उच्चारते हम मंत्र की तरह पर…

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तैयारी परीक्षा की 

तैयारी परीक्षा की आज केे इस प्रतिस्पर्धात्मक और महत्वकांक्षी युग में परीक्षा का महत्व और दबाव इस प्रकार बढ गया है कि बच्चे ही नहीं बल्कि पूरा घर परिवार भी परीक्षा की तैयारी में जुट जाता है। अगर बोर्ड की परीक्षा हो तब तो मानो पूरे घर मे ही कर्फ्यू लग जाती है। माँ पापा…

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क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया (इस लॉकडाउन में) विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण जिस दिन पूरी तरह से लॉकडाउन की घोषणा की गई, लगा जीवन थम गया। जीवन की बिल्कुल ही नई परिस्थिति और डर ने मिल कर एक अजीब सा माहौल बना दिया था जो खुशगवार तो नहीं था, सबकुछ उलट पुलट सा गया था।…

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स्वागत गणतंत्र

स्वागत गणतंत्र स्वागतम सुमधुर नवल प्रभात, स्वागतम नव गणतंत्र की भोर, स्वागतम प्रथम भास्कर रश्मि, स्वागतम पुन:, स्वागतम और। जगा है अब मन में विश्वास, कि सपने पूरे होंगे सकल, कुहुक कुहकेगी कोयल कूक, खिलेगा उपवन का हर पोर। युवा होती जायेगी विजय, सुगढ़ होता जायेगा तंत्र, फैलती जायेगी मुस्कान, विहंसता जायेगा जनतंत्र। कल्पनाएं सब…

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महाभिनिष्क्रमण

महाभिनिष्क्रमण आखिर चले ही गए तुम हाँ बताया था तुमने जीवन का ध्येय विश्व का उद्धार बोध की पिपासा बहुत से कारण थे बस मैं ही नही थी पिछले जन्म से चाहा था तुम्हें सुमेध भद्रा बनकर वादा लिया था अगले जन्म का क्या खूब निभाया तेरह वर्षों की तपस्या का प्रसाद था ‘राहुल’ पर…

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Quarantine

Quarantine Pandemic world is not mine although I drift with it with mask on my face through surroundings possessed by the springtime Isolated I cannot smell the flowers I am not enjoying virtual paradise walk just around the corner of my seclusion Izabela zubko Writer Poland IZABELA ZUBKO – poetess, journalist and translator. She is…

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समय

समय आदिकाल से भविष्य का चक्र। हर होने से, न होने का नियम, जो है उसके ख़त्म होने का संयम । अदि, अंत, अनंत। देव, मानव,पाताल लोक का विभाजन, सागर मंथन भेद से सर्व लोक समीकरण ।। युग निर्माण, समाज परिवर्तन । सत्य,त्रेता, द्वापर से कलि का बदलाव, रामराज्य में सीताहरण, कलि में सती का…

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