एक पिता का संघर्ष

एक पिता का संघर्ष “बड़े भाग्य से बेटियाँ मिलती है।” ये कहते हुए माखनलाल जी अपनी पत्नी कमला के करीब बैठ गए। कमला :- “वो तो ठीक है मुझे खुद पहली सन्तान बेटी चाहिए लेकिन सासू माँ और ससुर जी वो तो लड़की का जन्म लेना बुरा समझते हैं।” माखनलाल :- “अरे चिंता ना करो…

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मैं गुलाब नही/जीवन गुलाब

मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही बन सकती, अपने रोम रोम बिखेर नही सकती। मैं गुलाब नही————-। पंखुड़ियों के निकलने से फिर मेरा वजूद ही क्या? खुद को मिटा दुसरों को खुशबू नही दे सकती, मैं गुलाब नही बन सकती। सरिता सिंह   जीवन गुलाब गुलाब और मानव में है कुछ समानता…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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वे

वे   दो विपरीत  बहते छोरों को अचानक गठबंधन में बाँध दिया गया ऐसे, जैसे कोई हादसा अचानक हो जाए न प्यार था न परिचय बस दो अजनबी… न वो सूरज था न वो किरन न वो दिया था न वो बाती। न वो चाँद था और न वो चाँदनी एकदम विपरीत थे वे दोनों……

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तैयारी परीक्षा की 

तैयारी परीक्षा की आज केे इस प्रतिस्पर्धात्मक और महत्वकांक्षी युग में परीक्षा का महत्व और दबाव इस प्रकार बढ गया है कि बच्चे ही नहीं बल्कि पूरा घर परिवार भी परीक्षा की तैयारी में जुट जाता है। अगर बोर्ड की परीक्षा हो तब तो मानो पूरे घर मे ही कर्फ्यू लग जाती है। माँ पापा…

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फ्लोरेंस नाइटिंगेल

फ्लोरेंस नाइटिंगेल महिलाएँ केवल जन्मदात्री होकर पालन पोषण ही नहीं करतीं वरन जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने कड़ी मेहनत व त्याग से अपनी योग्यताओं को सिद्ध किया है। विश्व भर की ऐसी महिलाओं की लंबी सूची में एक नाम निस्वार्थ फ्लोरेंस नाइटिंगेल का भी स्वर्णाक्षरों में अंकित है। निज सुख को ताक पर रख…

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“आज़ाद हूँ……”

“आज़ाद हूँ……” पल दो पल की बातें नहीं, ख़्यालात लिख रहा हूँ उठ रहे मन में अनेकों सैलाब, बहाव लिख रहा हूँ आज़ाद हूँ , आज़ादी की जज़्बात लिख रहा हूँ अबकी आज़ादी, खुद को “आज़ाद” लिख रहा हूँ “आज़ाद हूँ”…, “आज़ाद” लिख रहा हूँ……….!! किसने क्या कहा, किसने क्या किया कल पर छोड़ता हूँ,…

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प्रकाशोत्सव

प्रकाशोत्सव ताल ठोक रहा तम का दानव लिए अँधेरा मन का दूर खड़ा मानव दिखावे के रोशनी सजती सबके घर – द्वारे मन का तम मिटा ना सका तू मानव, प्यारे ……….. ताल ठोक रहा ………. रात – रात पूरी चला मंज़िल ना पाया लौट बुद्धू घर को आया चला जिस डगर वह भी निकला…

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An Unsolved Puzzle

An Unsolved Puzzle (This story is inspired by real events but the characters are imaginary.) “Please sit down Mrs Chaudhary”, the genial senior psychiatrist in the Ranchi Mental Hospital was inviting Latika Chaudhary – an inmate of the asylum – to come in and make herself comfortable. I found an elegant woman in her mid…

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