उदित सत्य का सूर्य
उदित सत्य का सूर्य झूठे नाम, झूठे मान, झूठी शान… आखिर बताओ बंधु मेरे… फिर सच की चाह क्यों…? और सच की राह क्या.. कहां, किस ओर…? झूठ और झूठे की… होती क्यों जयजयकार रे बंधु..! होती क्यों वाह वाह…! हाथ कंगन को लुभाती आरसी…, सच चीख चीख क्यों होता बेहाल…! है सारे अमीरखाने खजाने…
एक लड़की थी…
एक लड़की थी… शरारती किस्से वो फ़ोन पर सुनाया करती थी एक लड़की थी मुझे गोद में सुलाया करती थी बिन बाबा के कैसे बीती थीं उसकी माँ की रातें कुछ बेचैनियाँ थीं सिर्फ़ मुझे बताया करती थी डर मेरी उल्फ़त से था, कोई और पसंद था उसे इसी बात पर ज़्यादा खुद को रुलाया…
राष्ट्रीयचेतना की सशक्त कवयित्री:सरोजिनी नायडू
राष्ट्रीयचेतना की सशक्त कवयित्री:सरोजिनी नायडू “ऊँची उठती हूँ मैं, कि पहुँचूँ नियत डारने तक टूटे ये पंख लिए,मैं चढ़ती हूँ ऊपर तारों तक |” इन पंक्तियों की रचयिता स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना की भूमिका निभाने वाली सरोजिनी नायडू ने साहित्य जगत और काव्य क्षेत्र में अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से अपूर्व योगदान दिया।13…
आयरन लेडी -इंदिरा गाँधी
आयरन लेडी -इंदिरा गाँधी बीसवीं सदी की विश्व की सबसे ज्यादा चर्चित महिला राजनीतिज्ञों में से एक थी श्रीमती इंदिरा गाँधी .जो स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी .आइरन लेडी पर दिल से मुलायम .गरीबो की मसीहा .महान बनने के लिए हिम्मत चाहिए .मिशाल बनने के लिए भी हिम्मत चाहिए;हिम्मतों की परिभाषा थी इंदिरा…
India’s Neighbourhood Policy Must Change In View Of Emerging Developments
India’s Neighbourhood Policy Must Change In View Of Emerging Developments Well, it’s election time in our neighbourhood : Myanmar, Bangladesh and Nepal. Fed up with slowing down of the economy, bouts of violence & unrest and a bleak future for youth, the common voter is looking for much needed change and relief in…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रानी गाईदिन्ल्यू
क्रांतिकारी वीरांगना गाईदिन्ल्यू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में अंग्रेज प्रशासन को भयभीत रखने वाली अदम्य साहसी योद्धा के अतुल्य योगदान को नमन। “मैं (रानी) अंग्रेजों के लिए जंगली जानवर के समान थी, इसलिए एक मजबूत रस्सी मेरी कमर से बाँधी गई । दूसरे दिन कोहिमा में मेरे भाई ख्यूशियांग की भी बड़ी क्रूरता से…
नारी अबला नहीं है
नारी अबला नहीं है 1908 ई. में अमेरिका की कामकाजी महिलाएं अपने शोषण के विरुद्ध और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सडकों पर उतर आईं। उनका मुख्य मुद्दा महिला और पुरुष के तनख्वाह की समानता का था । 1909 ई. में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने उनकी मांगों के साथ राष्ट्रीय महिला दिवस की…
बुझा नहीं हूँ!
बुझा नहीं हूँ! जीवन के इस मुकाम पर जब नौकरी-पेशा की उम्र का ३९ वर्षों का अनुभव और बच्चे-परिवार के प्रति कर्तव्य का इतिश्री हो चुका है,बयान करना कठिन है। फिर भी,दृष्टि बीते दिनों पर जाती है,तो कई घटनाएं और व्यक्तियों का चेहरा प्रत्यक्ष होता है मानस पटल पर।१९७० में बिहार बोर्ड की अंतिम परीक्षा…
शिक्षक दिवस
शिक्षक दिवस एक सतत प्रक्रिया है विद्यार्थी और शिक्षक होना। एक श्रेष्ठ शिक्षक कल एक जिज्ञासु विद्यार्थी था।जिज्ञासा सीखने की अदम्य इच्छा है और जन्म से ही इस प्रवृत्ति के साथ हम धरती पर आते हैं। शिशु के सीखने की सतत क्रिया उसकी जिज्ञासा का ही प्रतिफल है।इसमें दो मत नहीं कि परिवार ही होता…