माँ तुम बहुत याद आती हो

माँ माँ तुम बहुत याद आती हो जब स्कूल से घर आती हूँ, खाली घर ही पाती हूँ सूनी सी देहरी देखती हूँ, अपनी थाली खुद लगाती हूँ, छोटे को भी कभी ख़िलाती हूँ , हर निवाले के साथ माँ तुम बहुत याद आती हो। आज जब मुझे लगा कि अब मैं भी बड़ी हो…

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एक लौ उम्मीदों की

एक लौ उम्मीदों की धरती से लेकर आसमां तक उदासियों का मंजर फैला है हर तरफ़ हैं खबरें मौत की हर तरफ़ आंसुओं का रेला है सोचा था संभल जाएंगे हम धीरे-धीरे ज़िन्दगी की उधड़ी तुरपाईयों को जतन से सी लेंगे हम धीरे-धीरे पर इम्तहान की हद अभी बाकी है कुछ कर्ज़ की किश्त अभी…

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कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव?

कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव? जब चारों तरफ मचा हो हाहाकार, पूरे विश्व में कोरोना नाम के इस मर्ज ने आफत मचा रखी है।वैज्ञानिकों की एक साल की मेहनत,वैक्सीन के रूप में मिली है लेकिन अभी भी पूर्णत संतुष्टि नहीं मिल पाई । लोग वैक्सीन लेने के बाद भी इस रोग की चपेट में आ…

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पलाश

पलाश ’’माँ…….माँ ………. हमारे खेत की मुँडेर पर जो पेड़ लगे हैं उन पर कितने सुन्दर फूल आऐं हैं, देखा तुमने?” “वह तो हर साल आते हैं……. इन्हीं दिनों, होली के समय……… टेसू कहते हैं उसे….” “माँ….उन फूलों का रंग कितना सुन्दर है, गहरा पीला…नारंगी…….. कहीं कहीं काले धब्बे हैं पर माँ ऐसा लग रहा…

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कैसे दिन फिरते जाते हैं

कैसे दिन फिरते जाते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं मास दिवस लगते पर्वत से, उलझन नित बनते जाते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं। बाग बगीचे घूमने के दिन छोटी अमिया लाने के दिन कूक पपीहा बौराते हैं कैसे दिन फिरते जाते हैं। चैता फागुन खा गया कहर यह फैल गया है शहर-शहर सपने…

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गुरु बिना ज्ञान नहीं

गुरु बिना ज्ञान नहीं शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने बचपन की याद आना स्वाभाविक है। कुछ ऐसे गुरुओं से हम मिलते हैं जो जीवन में एक याद छोड़ जाते हैं।ऐसे ही मेरे हिंदी के एक टीचर जी थे उन्हीं से संबंधित एक घटना अपने स्कूल के दिनों की याद ताजा कर जाती है।अनुशासन का…

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इन्तजार

इन्तजार गत चार सालों से उर्मि रांची के मानसिक चिकित्सालय में जिन्दगी के मनहूस दिन काट रही है । हर शाम उसे किसी न किसी का इन्तजार रहता है । आँखें दरवाजे पर लगी रहती हैं शायद कोई आ जाय । किसी मरीज के घरवाले आते हैं किसी के रिश्तेदार मिलकर जाते हैं , पर…

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राम के नाम पर दंगे

राम के नाम पर दंगे राम कौन हैं ! ‘रमते कणे कणे इति राम:’… जो प्राणी मात्र के हृदय में रमण करते हैं वह ‘राम’ है तथा जिनमें आमजन रमण करते हैं, ध्यान लगातें वह हैं ‘राम’ । शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है, हमारे यहां भी एक कहावत है ‘आंख…

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