शिक्षा का लॉकडाउन
शिक्षा का लॉकडाउन विश्व व्यापी महामारी कोरोना का समाज के विभिन्न वर्गों पर असर हो रहा है।व्यापारी, उद्योगपति,डॉक्टर,इंजीनियर,अमीर ,गरीब ,हिंदू मुसलमान, सिख पठान , तथा उनके परिवार के लोग सभी इस छूत की बीमारी से परेशान हैं। त्राहिमाम मचा कर रखा है इस एक छोटे से कोरोना जीटाणु ने । विश्व के कई देशों में…
मंजुला अस्थाना महंती की कविताएं
मंजुला अस्थाना महंती की कविताएं 1.तृषित आत्मा नैन बावरे इत उत् निहारे न जाने किस को पुकारे प्यासे नैना मरम न जाने तृष्णा क्योंकर ना पहचाने अनजानी अव्यक्त सी मूरत कैसी होगी उसकी सूरत मन में हल चल फ़िर भी बेकल तिष्णगी सी बढ़ती जाती हर क्षण, पल पल उत्सुकतावश…
जागें फिर हम भारत वासी!
जागें फिर हम भारत वासी! जागें फिर हम भारतवासी, हे,महाकाल, पर्वतवासी। धर रुद्ररुप घट-घटवासी, जागें फिर हम भारतवासी। भारत पर संकट छाया है, फिर रक्तबीज बन आया है। अब रक्षक बन काशी वासी, जागें फिर हम भारत वासी। वोट बैंक के बीच भंवर में, जाति-धर्म हैं सब के प्यादे । अब भारत माँ इनकी दासी!…
गांधी जी एक समाज सुधारक के रूप में
गांधी जी एक समाज सुधारक के रूप में कोई इंसान महान पैदा नहीं होता,उसके विचार उसे महान बनाते हैं!विचार और कार्य की शुद्धता और सरलता ही महान लोगों को साधारण लोगों से अलग करती है, वे वही काम करते हैं जो दूसरे करते हैं मगर उनका लक्ष्य समाज में बदलाव लाना होता है! राष्ट्रपिता महात्मा…
थोथा लाड़ बंदरिया का
थोथा लाड़ बंदरिया का अम्मा रामसखी की दो बहुएं थीं। बड़ी बहू का नाम सरोज और छोटी का नाम कमला था। दोनों बहुएं एक साथ ही गर्भवती हुईं। यह सोच -सोच अम्मा रामसखी का बुरा हाल था कि एक साथ दोनों बहुओं की सोवढ़ का काम कैसे निपटाएंगी। घर का अब एक काम तो होता…
मजबूत भारत का मजबूर मजदूर
मजबूत भारत मे मजबूर मजदूर प्रत्येक नेता का एक चेहरा है, प्रत्येक पूंजीपति का भी एक चेहरा है। फ़िल्मी नायक नायिका तो हैं ही सिर्फ चेहरे। और तो और प्रत्येक मुल्क का भी एक चेहरा होता है। अब चेहरे हैं तो चेहरे का कोई भाव भी होगा। भाव मतलब भाव भंगिमा और भाव मतलब मूल्य।…
Lockdown And Me
Lockdown And Me I live in a small town of about 1000 inhabitants, San Giuliano di Puglia. As in every country or city in the world, due to the coronavirus pandemic, almost all the vital flow that kept the country alive both as regards the economy and for the social life of the community stopped;…
एक शिक्षिका ऐसी भी
एक शिक्षिका ऐसी भी बात उन दिनों की है जब मेरी नियुक्ति मुम्बई के एक प्रसिद्ध कनिष्ठ महाविद्यालय में हुई थी।परिवार,दोस्त,रिश्तेदार सभी प्रसन्न थे कि सरकारी नौकरी मिल गयी,अब जिंदगी आराम से गुजरेगी।काम हो ना हो,तनख्वाह तो शुरू ही रहेगी।आज भी सरकारी नौकरी के प्रति लोगों की मानसिकता में अधिक अन्तर या बदलाव नहीं आया…