The Body

The Body With eyes half-closed and a headache that won’t be purged by aspirin’s priests, which I eject from my body — My body that I don’t like so much, but I don’t mock it as it should be mocked. Or love it as it should be loved. I never sip drowsiness all at once,…

Read More

विषाणु कोरोना

विषाणु कोरोना कोरोना वायरस की आपदा विश्वव्यापी थी। इस संकट से निपटने में हमारे सक्षम प्रधानमंत्री मोदी जी की दूरदर्शिता और कर्मठता का ही परिणाम था कि हमारे देश में कोरोना वायरस उतनी तेजी से नहीं फैला जैसा अन्य देश में फैला था। मोदी जी ने देश के फस्टफ्रंट पर काम करने वाले सभी डाक्टर,…

Read More

आओ करें हम जल का दान

आओ करें हम जल का दान मूख से मरे ना कोई बिन भोजन तरसे ना कोई कृषको का श्वेत रक्त थोड़ा अल्प बहे बंजर बसुंधरा की प्यास बुझानेको आओ करें हम जल का दान!! निमुह नीरीह पशुओं और गैया को खग चीं चीं कुहु गौरैया को शस्य श्यामला धरती मैया को आओ करें हम जल…

Read More

Father’s Day

मेरे आदर्श और मैं उनकी छाया पापा के बारे में मैं क्या कहूं। दुनिया के सबसे अच्छे पिता थे। मेरे सबसे अच्छे मित्र सबसे अच्छे सलाहकार और सबसे अच्छे मार्गदर्शक थे। मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के कारण हूँ।पिता जी की सबसे अच्छी बात थी कि वह अपने बच्चों के साथ समय बिताते थे…

Read More

अरे! जरा संभल कर

अरे! जरा संभल कर अँधेरी गलियों के स्याह- घुप्प अंधकार में, आशंकित- भयभीत ह्रदय ढूँढेगा तुम्हारा हाथ, पकड़ जिसे मैं चुभते पत्थरों पर, चलने में लड़खड़ाने पर, गिरफ्त को और महसूस करूँ कसता हुआ, इन शब्दों के साथ,”अरे! जरा संभल कर।” जब कोरों से झाँकते बूँदों को, तुम संभाल लो अपनी हथेलियों में, फिर बना…

Read More

प्रेमचंद -युग प्रवर्तक

प्रेमचंद -युग प्रवर्तक प्रेमचंद उन साहित्यकारों में से हैं जिनकी रचनाओं से भारत के बाहर रहने वाले साहित्यप्रेमी हिंदुस्तान को पहचानते हैं। प्रेमचंद का साहित्य हमें सीखलाता है कि किस तरह क्रांतिकारी लफ्फेबाजी से बच कर सीधे सादे ढंग से जनता की सेवा करने वाला साहित्य रचा जा सकता है। अच्छी कहानी लिखने के लिए…

Read More

शक्तिशाली रानी हत्शेपसुत

शक्तिशाली रानी हत्शेपसुत वस्तुतः विश्व इतिहास में मिस्र की रानी हत्शेपसुत, ईसा पूर्व काल की एकमात्र शासिका हैं जिसके बारे में जानने के लिए हमारे पास पर्याप्त स्त्रोत मौजूद हैं। पुरातात्विक साक्ष्य के द्वारा उनके बारे में बहुत कुछ जानकारियां मिलती है। हत्शेपसुत मिस्र की 18वें साम्राज्य की पांचवी फराओ थी, जिसने 1478 B.C. से…

Read More

नहीं जाती

नहीं जाती ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लारी नहीं जाती चली जाती है हँसने और हँसाने से दवा खाने से बीमारी नहीं जाती ज़ियादा सोचने से नींद जाती है मगर इससे परेशानी नहीं जाती मुआफ़ी माँ ने दे दी ख़्वाब में आकर मगर सर से पशेमानी नहीं जाती उसे जाने…

Read More

निर्मला लौटेगी ज़रूर !

निर्मला लौटेगी ज़रूर ! हमारे शहर के इस हिस्से में यह तीन तल्ला,आलीशान पीली कोठी, वास्तुकला की अनुपम मिसाल है. जिसका,काले रंग का, ऊँचा सा भारी भरकम, कटाव-दार मुख्य दार है. लोहे की सर्पाकार सीढ़ियाँ, आबनूस की लकड़ी व रंगीन-सफेद काँच से बनी खिड़कियाँ-दरवाजे, ‘चायनीस-ग्रास’ से सजा कालीन-नुमा उद्यान,विलायती गुलाबों की क्यारियाँ, मुख्य द्वार पर…

Read More