मौन से मुखरता तक- माया एन्जोलो

मौन से मुखरता तक- माया एन्जोलो “मौन जब भी मुखर हुआ तो एक सशक्त स्वर आन्दोलन का जन्म हुआ”। आज आपको एक ऐसी सशक्त महिला से परिचित कराना चाहती हूँ जिसने दुःख और संघर्ष को असीम साहस के साथ न सिर्फ पार किया, बल्कि दुनियां के सामने एक मिसाल भी बनकर सामने आयी ! इन्हे…

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दिव्या जी को जितना मैंने जाना

दिव्या जी को जितना मैंने जाना मिलना मिलाना कहते हैं ईश्वर के हाथों का खेल है और जीवन के किस मोड़ पर किसी ऐसी शख्सियत से भेंट करवा दें कि लगे जैसे आपको तो बहुत पहले से जानते हैं| प्रवासी हिंदी साहित्य लेखन की प्रतिनिधि साहित्यकार जिनका रचना संसार बहुआयामी है, सुश्री दिव्या माथुर जी…

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हरि अनंत हरिकथा अनंता

हरि अनंत हरिकथा अनंता तुलसीदास के ‘हरि अनंत हरिकथा अनंता’ की तरह ही विविध आयामी और नवों रसों से भरपूर रामकथा भारत ही नहीं, विश्व के कई देशों में प्रचलित है। असल में देखा जाए तो आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण में जिन-जिन स्थानों का उल्लेख है, भौगोलिक उन सभी क्षेत्रों में साहित्य और संस्कृति के…

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सिमोन द बोउवार

  सिमोन द बोउवार 20वीं सदी की महान् दार्शनिकों में से एक, स्त्रीवादी विमर्शों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सिमोन द बोउवार । वैश्विक नारीवादी आंदोलन की एक महत्वपूर्ण किरदार हैं। सिमोन द बोउआर इनका जन्म जनवरी 1908 में एक अमीर घराने में,फ़्रांस के पेरिस में हुआ था। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उनके घर…

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वही होगा मेरा पति

वही होगा मेरा पति कड़कड़ाती धूप में मेहनत करती यमुना पसीने से तर-बतर हो रही थी। तभी खाना खाने की छुट्टी हुई। इतने शरीर तोड़ परिश्रम के बाद उसे जोरों की भूख लगी थी। आज माँई ने क्या साग भेजा होगा, सोचते हुए उसने अपना खाने का डब्बा खोला। वह देखकर हैरान रह गई कि…

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भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी

भारतीय संविधान और टी.टी. कृष्णामाचारी टी.टी. कृष्णामाचारी का प्रारंभिक जीवन हमारा देश सन् 1947 में अंग्रेज़ों की अधीनता से स्वतंत्र हुआ। तब विविधताओं से सम्पन्न भारत के शासन संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से भारत के संविधान के निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। संविधान निर्माण के लिए…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- मनीराम दीवान

मनीराम दीवान अठारहवीं शताब्दी में अंग्रेज चाय चीन से खरीदते थे। मगर उनकी व्यापार में बेईमानी और लाभांश पर सौ प्रतिशत कब्जा चीन को नष्ट किये दे रहा था। अतः एक बड़ा युद्ध हुआ जिसमे चीन ने अंग्रेजों को चाय देने से इंकार कर दिया।जिससे उनका चीन की चाय पर से एकाधिकार जाता रहा।उधर अमेरिका…

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“आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “

 ” आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “ आजादी के बहत्तर साल , बोल कर देखिए , एक सुकून और गर्व का एहसास होगा , 15 अगस्त 2019 को हमारा देश आजादी की बहत्तरहवीं वर्षगाँठ मनाएगा। बहुत मुश्किलों और संघर्षों के दौर से निकल कर आज हम उस जगह हैं जहाँ हम ये कह सकते हैं…

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फ़ातिमा शेख़

    फ़ातिमा शेख़ स्त्रियों की शिक्षा, उनके अधिकार एवं दलितों के पुनरुत्थान के लिए कार्य करनेवाली एक मज़बूत कड़ी के रूप में दक्षिण भारत की प्रथम मुस्लिम महिला राष्ट्रमाता फ़ातिमा शेख़ को शायद आज इतिहास भुला चुका है, लेकिन दलितों-पिछड़ों और गरीबों के दिलों में वो युगों-युगों तक जीवित रहेंगी। फ़ातिमा शेख़ सावित्रीबाई फुले…

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नारी : कल , आज और कल

नारी : कल , आज और कल नारी ….ईश्वर के समान व्यापक और अपने आप में सम्पूर्ण एक ऐसा शब्द है , जिसमें समाहित है जीवन चक्र के गतिशील रहने के समस्त कारण । सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन , गति और अस्तित्व इन्हीं दो शब्दों से है । ईश्वर जो हमारे अंदर और बाहर की…

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