रिश्तों की रेखा

रिश्तों की रेखा   “मेम साहिब,आप के जाने के बाद जाने कौन आयेगा इस बंगले में?” बिजया ने काँच के गिलासों को अख़बार में लपेटते हुए कहा था। बिजया की बात सुन कर याद आया बस एक हफ़्ता ही तो रह गया है हमारा असम में। आलोक का तबादला दिल्ली हो गया था। “बिजया मौसी,…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा का उलगुलान तब भगत सिंह का जन्म नहीं हुआ था, सुभाष अपनी माँ की गोद में थे, गाँधी को अफ्रीका से लौटना बाकी था और छोटानागपुर के घने जंगलों में एक आदिवासी नवयुवक अपने सीमित संसाधनों और सेना के साथ अंग्रेजों के शासन से आजादी का बिगुल फूंक रहा था | स्वराज्य की…

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मानव को आलोकित करता शिक्षक

मानव को आलोकित करता शिक्षक पं.श्रीकृष्ण चन्द्र झा का जन्म जमींदार परिवार में हुआ था।१० वर्ष के ही थे तो उनके पिता का देहान्त हो गया ।अल्प आयु के कारण सारे रिश्तेदारों ने सम्पत्ति हड़प लिये थे, जमींदारी भी छीन ली थी सरकार ने। भाइयों की देखभाल भी उन्हें ही करनी पड़ी थी। भाइयों को…

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यह कैसी आज़ादी

यह कैसी आज़ादी *********************** देश की आजादी को आज पूरे हुए बहत्तर बरस लेकिन आज भी आधी आबादी आजादी को रही तरस मंदिर हो या रेलवे स्टेशन लगा भिखारियों का तांता मौलिक सुविधाओं से जिनका दूर दूर तक नहीं है नाता दिहाड़ी मजदूरी, आधी तनखाह काम कर रहे मेहनतकश हालात देखकर इनके लगता गुलाम है…

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हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद ।

हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद । अभी तो मेरे अच्छे दिन हैं । काश ये सपना टूटे ना, हिन्दी पखवाड़ा बीते ना। अभी ही तो होंगे, काव्य गोष्ठी और पुस्तक विमोचन, और ना जाने कितने कितने? कार्यक्रमों के आयोजन । नेता हो या अभिनेता, सब अभी ही तो हिन्दी बोलेंगे, कानों में मिसरी घोलेंगे।…

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जीना सिखाती ज़िन्दगी

जीना सिखाती ज़िन्दगी आज पहली बार अज़ीब सी मनःस्थिति है। लोग न जाने कैसे बड़ी बड़ी बातें कर लेते हैं किसी के बारे में भी मेरे साथ कभी भी कोई बुरा व्यवहार करता है तो मुझे बुरा लगता है। कोशिश रहती है कि मेरी तऱफ से कभी कोई आहत न हो।पर जब अति हो जाती…

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रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना

रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना युगधर्मा, शोषण के विरुद्ध विद्रोह को अपनी कलम की वाणी बनाने वाले , जीवन रस को ओज और आशावादिता से पूरित करने वाले, सौंदर्य और प्रेम के चित्र को भी अपने कलम की कूची से रंगने वाले रामधारी सिंह ‘दिनकर’  हिन्दी के एक प्रमुख राष्ट्रवादी एवं प्रगतिवादी…

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प्रेमपत्र सन बहत्तर का

प्रेमपत्र सन बहत्तर का किशन आज बहुत लंबे समय के बाद तुम दिखे।समय को दिनों, महिनों और वर्षों में बाँटने की शक्ति कहाँ थी मुझमें।हर एक पल तो युग की तरह बीता था। कितने युग बीत गए इसका भान ही कहाँ रहा मुझे।मन तो सदा तुम्हें खोजता रहता था। आज तुम पर दृष्टि पड़ी तो…

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सादा जीवन उच्च विचार

सादा जीवन उच्च विचार आज १४ सितंबर २०२० ,जब सम्पूर्ण देश हिंदी दिवस के रूप में माना रहा है।सभी के जहन में यह बात उठती है कि इसके पीछे कारण क्या था।आज बताते हुए हर्ष हो रहा है कि मेरे परिवार में मेरे पिताजी की तीसरे व सबसे छोटी बहन के ससुर जी की जन्म…

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