मानवाधिकारों का संरक्षण – बड़ी चुनौती

मानवाधिकारों का संरक्षण – बड़ी चुनौती मानव, मानवता और मानव अधिकारों का संरक्षण आधुनिक समय में ऐसे विषय हैं ,जिन परबुद्धिजीवियों , विचारकों , समाज सेवियों का एक बड़ा समूह बड़े गर्व के भाव के साथ ही अपनी गहरी चिंता व्यक्त करता हुआ दिखाई देता है । विश्व में विभिन्न अवसरों पर होने वाले शिखर…

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प्रकाशोत्सव

प्रकाशोत्सव ताल ठोक रहा तम का दानव लिए अँधेरा मन का दूर खड़ा मानव दिखावे के रोशनी सजती सबके घर – द्वारे मन का तम मिटा ना सका तू मानव, प्यारे ……….. ताल ठोक रहा ………. रात – रात पूरी चला मंज़िल ना पाया लौट बुद्धू घर को आया चला जिस डगर वह भी निकला…

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प्यारी बेटी

    प्यारी बेटी हालाँकि सरकार ने कोरोना सम्बंधित नियमों में काफ़ी छूट दे दी थी, लेकिन अमित की बेटी अंकिता के ऑफिस वालों ने अभी भी घर से ही काम करने को प्राथमिकता दी थी।अमित की पत्नी सरला एक  स्कूल में अध्यापिका थीं और शाम होने से पहले घर आ जाती थीं ।इसलिए ऑफिस…

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नर्तक

नर्तक वह मस्त होकर नाच रहा था। वह नटुआ नाच का अभ्यस्त लगता था. उसने हरे रंग की काँछ दार धोती और सिर पर पगड़ी पहनी थी जिसमें हरे तोते के पंख खोंसे गए थे। उसके शरीर का ऊपरी भाग नंगा था, लेकिन रंग बिरंगी मोतियों की माला और फूलों की माला से वह कुछ…

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ये विषाणु

ये विषाणु कुछ कह रहा है ये विषाणु : मैं कारण भी परिणाम भी, बरसों से धुंधलाये नयनों से जो आज हुआ है नज़ारा, निर्मल नीलाम्बर , सुंदर प्यारा, दिए जा रहा प्रमाण भी। जीवन के पांचों मूल तत्वों से किया कितना ही खिलवाड़, बन्द कर दिया सघन चिकित्सालय के वार्ड। पिता अंतरिक्ष को ही…

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भागलपुर मेरी यादों में

भागलपुर मेरी यादों में गंगा किनारे बसा भागलपुर बिहार का एक साधारण सा शहर पर मेरे लिए बेहद महत्व पूर्ण …..मेरे पापा माँ की शादी भागलपुर में १९५९ जून में हुई थी जब नाना वहाँ मजिस्ट्रेट थे .पापा की पहली नौकरी टी एन बी कोलेज भागलपुर में ही हुई और उनकी पहली संतान यानि मेरा…

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दीपावली का महत्त्व

दीपावली का महत्त्व नवंबर माह में कार्तिक और मार्ग शिर्ष मास का समावेशन है , इस माह में अनेक अधिष्ठापित व्रत- त्योहार होतेे हैं । दशहरा के बाद दिवाली से पूर्व ‘धन्वंतरि ‘धनतेरस या धन त्रयोदशी मनाया जाता है । इस दिन अरोग्य के देवता ‘धन्वंतरि’ मृत्यु के देवता अधिपति ‘यम’ वास्तविक धन संपदा की…

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जय जवान

जय जवान वतन के लिए ऐसा प्यार देखिए हमारे जवानों का अरमान देखिए सीमा पर सालों से हैं अड़े हुए है अपने कर्म पर विश्वास देखिए अनोखे जोश से हैं फड़कती बाहें हैं अलबेले उनकी पहचान देखिए भीड़ जाते हैं वो दुश्मन से बेखौफ शेर हमारे देशके वीरजवान देखिए कुर्बानी के हैं बनाते वो इतिहास…

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मेरे राम आ गए

मेरे राम आ गए   मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए   जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…

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