घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा मुझे हिंसा अपने आप में ही बहुत बुरी लगती है ।आमतौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि हम हिंसक हो जाएंगे तो हमें हमारा हक मिल जाएगा , लोग हम से डर जाएंगे लेकिन यह गलतफहमी है ।हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है ।जब यहीं हिंसा घर में होने…
ऐसी कोई रात कहाँ
ऐसी कोई रात कहाँ ऐसी कोई रात कहाँ है, जिसकी कोख से सुबह ना निकले ! दुख का सीना चीर के सुख का सूरज तो हर हाल में निकले ! ऐसा कोई दर्द कहाँ है, जिससे कोई गीत ना निकले ! ऐसी कोई बात कहाँ है जिससे कोई बात ना निकले ! कहाँ कभी एक…
एक पत्र पिता के नाम
एक पत्र पिता के नाम (मेरे पापा जिनको मैंने कोरोना काल में खो दिया उनको समर्पित) कलम से एक पत्र लिखा है आज लिखा है उनको जो हैं शायद नाराज़ तभी तो अब नहीं कभी आती उनकी आवाज़ जाने कहां चले गए वो जिनपर था मुझको नाज़ न किया कोई गिला न शिकवा किया मुझसे…
हम सुंदर दिखते हैं
हम सुंदर दिखते हैं ट्रिन ट्रिन ट्रिन… मेरी सुबह की शुरुआत ऐसी होती है। सुबह साढ़े छह बजे उठो, गैस पर चाय का पानी चढ़ाओ, उसके खौलने का इंतजार करो। परात में आटा निकालो, उसमें नमक मिलाओ और पानी डालो। फिर उसको धीरे-धीरे गूंथ डालो। चाय का पानी भभक रहा है। चाय की पत्ती डालो।…
शुभेच्छा
शुभेच्छा संप्रेषित कीजै सब अभिव्यंजनाएं साकार होवें सब मधुर कल्पनाएं खंडित हो जाएं कलुषित वर्जनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। पल्लवित हों सम्यक संकल्पनाएं झेलनी न पड़े कभी अवहेलनाएं स्पर्श करे नहीं आपको प्रवंचनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। कलम से निर्गत हों अधिसूचनाएं नाम से जारी हों कई परियोजनाएं संयमित वाणी त्यागे…
वन मोर लॉकडाउन
वन मोर लॉकडाउन युद्ध और महामारी, अकाल और भुखमरी ने हमें कई बार ऐसे स्तर पर ला खड़ा किया है जहां आकर इसके आगे जीवन का मतलब ही परिवर्तित हो जाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और ऐसे समय में उसकी सामाजिकता ही विमुख हो जाती है। उसके सारे क्रिया कलाप एक एक कर…