खुसरो दरिया प्रेम का…

खुसरो दरिया प्रेम का… हर जानी-अनजानी, प्रेम कहानी, तुम जानो या मैं जानूँ की तर्ज पर एक निजी कहानी है। हर दार्शनिक, हर कवि, हर व्यक्ति ने इसे अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश की है, समझना चाहा है। क्या है आखिर कई कई अहसासों से भरा यह सतरंगी प्रेम? महज एक आकर्षण जो ईर्षा,…

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स्तन कैंसर-जागरूकता ही बचाव है

स्तन कैंसर-जागरूकता ही बचाव है स्तन कैंसर दुनिया में महिलाओ में होने वाला सबसे आम या कॉमन कैंसर है। “आंखों को वही दिखाई देता है जो दिमाग को पता हो” सबसे पहले आप लोगों को बताना चाहूंगी कि स्तन कैंसर स्तन के कोशिकाओं और टिश्यू में असामान्य अनियंत्रित वृद्धि को कहते हैं। हमारे देश में…

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आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

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अरुण धर्मावत की कविताएं 

अरुण धर्मावत की कविताएं    1.शंखनाद   धूमिल धूमिल पथ रह गए लक्ष्य अलक्षित रह गए अंधियारों में जले दीप जो उजियारों को लील गए   शोषित वंचित अपमानों के प्रश्न बिलखते रह गए जो चले योद्धा अग्रपथों पर आज वही पथ भूल गए   व्यथाओं का नित प्रदर्शन शब्द निरर्थक रह गए लिख कर…

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रिश्ते हुए तार तार

रिश्ते हुए तार तार नताशा का रो -रोकर बुरा हाल था उस पर दोहरी मार पड़ी थी। एक तो कोरोना की चपेट में आकर उसके पति का स्वर्गवास हो गया था दूसरे उसके बेटे शलभ ने अपने पिता का शव लेने और उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। वह ऐसा करके अपनी…

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एक थी कल्ली

एक थी कल्ली   तूने आज फिर मुझे रुला दिया कल्ली। अपनी पच्चीस बरस की नौकरी में तेरी जैसी न जाने कितनी छोरियां इस बाल सुधार गृह में आई और चली गई। लेकिन तूने तो पहले दिन से ही …. ऐसा किया जिसे कोई नहीं भूल सकता। चोरी चकारी, मारपीट, हुल्लड़बाजी, गाली गलौच और फिर…

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बेटी और बैल

बेटी और बैल बिहार के बेगुसराय में एक गरीब किसान ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए अपने खेत और दो बैल बेच दिया- यह कल के राष्ट्रीय समाचार में था। उसे बाद उसके घर नेताओं की लाइन लग गयी, यह दिखने के लिए कि वो कितने सम्बद्ध हैं- उसकी गरीबी से और कितने प्रभावित…

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घर में भेड़िये

घर में भेड़िये   रात भर इमली दर्द से कराहती रही,पोर पोर फोड़े की तरह पिरा रहा था।उसे जानवरों की तरह पीटा गया।कसूर—नारी निकेतन की संचालिका के पति को उसने चाँटा मारा। उसकी हवस की टपकती लार के विरोध में —- “माई,हमको ये बापू बहुत मारता है,चिमटी काटता है,उसकी बात न माने तो हाथ मरोड़ता…

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रैली

रैली “चलो, हटो… भागो इंहा से… खत्तम हुआ सब कुछ…. जगह खाली करो।” पुलिस वाले डंडे घुमाते हुए जगह खाली कराने की कोशिश कर रहे थे। “अरे.. साहब, कहाँ जाएं हमलोग, अभी बस आता होगा… खाली कर देंगे… इंहा जगह भी है अउर धूप भी लग रहा है…” वहां खड़े एक नौजवान ने कहा। ”…

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त्योहारों में उल्लास

त्योहारों में उल्लास ढूंढना हो अगर त्योहारों मे तो उसका ध्येय ढ़ूंढ़िए उद्देश्य ढ़ूंढ़िए। उपहारों के बंद डब्बों मे लेने वाले की मुस्कान देनेवाले का अरमान ढ़ू़ंढ़िए। त्योहार धर्मों का नहीं उमंग और उल्लास का होता है, बड़ी कठिन डगर है इस जीवन की ये छोटे छोटे त्यौहारों के पड़ाव ना होंगे तो हम थक…

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