ममता जी को नमन 

  ममता जी को नमन  ममता कालिया जी की कहानियाँ पढ़कर हम सब आप बड़े हुए।ममता जी ने साहित्य की समझ विरासत में पाई। अपने अतंस की तिजोरी से बड़ी ही सजगता व सरलता से जीवन की रफ्तार से कुछ मखमली, और हकीकत से जुड़े लम्हें एक कहानी के कथानक में गढ़कर पेश करती है।कई…

Read More

आउटहाउस

आउटहाउस शिव शंकर जी और मालती जी के बंगले का आउटहाउस कुछ दिनों से खाली पड़ा था। आउटहाउस में रहने की आकांक्षा में कई लोग आए पर सफल ना हो पाए।अंततः एक ऐसा परिवार आया जिस दंपति के चार बच्चे थे।बड़ी दो जुड़वां बेटियां और उसके बाद दो बेटे। सबसे छोटा वाला बेटा मात्र ढाई…

Read More

A Nondescript Thought

A Nondescript Thought One of the noticeable and remarkable annual events,World Environment Day(WED) is being organised in all the Continents since1972.It is one of the Dream if Not Cream initiatives of the UNO.It aims at creating adequate awareness about importance of nature,the nature which surrounds us,the nature that comprises of Bio-diversity. The components thereof, are:…

Read More

पापा की तरह

पापा की तरह नहीं बन पाती कलाकार पापा की तरह फटी जेब में भी जो मुस्कुराहटें संभाल लाते थे परेशानियों के गद्दे पर भी जो रेशमी चादर बिछाते थे हर ईंट में खुद को ढाल घर हमारे लिए बनाते थे । नहीं आता हुनर पापा की तरह पसीने से तर – बतर जो जेठ की…

Read More

चाहतें

चाहतें सुबह की चाय के लिए बालकनी में पहुँचते ही ,अवि समझ गया कि कल … नहीं सिर्फ़ कल नहीं ,कई दिनों के कड़वे पलों का भारीपन है। माँ के सामने चाय का प्याला अनछुआ ही पड़ा था और शिवि की आँखों का प्याला छलकने को आतुर ! बड़े ही सहज भाव से उसने चाय…

Read More

श्रद्धांजलि

वह कैसे नवयुवक थे जिन्हें चाहिए थी आजादी हर हाल में हर कीमत पर उन्हें चाहिये थी आजादी वह दूसरो युवकों से थे अलग नायको में नायक थे जिन्हें चाहिए थी हर हाल में हर कीमत पर आजादी उनकी चाहत न कोई हीर थी न लैला उनकी चाहत थी हर हाल में हर कीमत पर…

Read More

और भेड़िया सच में आ गया

और भेड़िया सच में आ गया “क्याआ आ–! सच में!, ऐसा कैसे हो सकता है? दो दिन पहले तो मैं शुभ्रा से मिली थी, परेशान थी वह लेकिन इतनी भी नहीं कि इतना बड़ा कदम उठा ले और वैसे भी वह हमेशा छोटी छोटी बातों को लेकर शिकायत कारती ही रहती थी।” “लेकिन यह सच…

Read More

मैं गुलाब नही/जीवन गुलाब

मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही मैं गुलाब नही बन सकती, अपने रोम रोम बिखेर नही सकती। मैं गुलाब नही————-। पंखुड़ियों के निकलने से फिर मेरा वजूद ही क्या? खुद को मिटा दुसरों को खुशबू नही दे सकती, मैं गुलाब नही बन सकती। सरिता सिंह   जीवन गुलाब गुलाब और मानव में है कुछ समानता…

Read More

भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- गुलजारी लाल नंदा

ईमानदारी की एक मिसाल-गुलज़ारी लाल नंदा किसी घर में एक बुजुर्ग व्यक्ति अकेले किराया पर रहते थे ।वह अत्यंत निर्धन थे तथा कुछ महीनों से किराया भी नहीं दे पा रहे थे ।अंततः एक दिन मकान मालिक ने उन बुजुर्ग का सारा सामान सड़क पर फेंक दिया ।सामान भी क्या ,दो चार बर्तन और दो…

Read More