मां कभी अबला नही होती

मां कभी अबला नही होती स्त्रियों को देवी कह कर पूजने वाले भारत में महिलाओं का जीवन अत्यंत ही संघर्षपूर्ण रहा है।हमारे जिस समाज में महिलाओं को हमेशा एक अबला नारी के रूप में देखा जाता है।आज मैं उसी समाज की एक ऐसी महिला की बात करूंगी, जिसको मैंने अपने बचपन से लेकर आज तक…

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प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है

प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है बलि देहाती, कर्जा वामन लात है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है आंगुर-आंगुर दाम जोड़ता बीज उधारी कितनी आई ट्रेक्टर का भाड़ा कितना है डीज़ल की कितनी भरवाई गिरवी कटने से पहले उत्पाद है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है नए आंकड़े, नई रिपोर्टें भूख रेख…

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अतिथि एक दिन का

अतिथि एक दिन का अच्छी भली सो रही थी और सपनों में ,पर्वतों के पार दूर कहीं क्षितिज पर सैर कर रही थी कि अचानक ही धीमे से तेज … और भी तेज होती “खट – खट” की आवाज़ ने आराम करती हुई पलकों को जबरदस्ती खोल ही दिया । मैं भी किसी प्रकार उनींदी…

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प्लास्टिक के फुल

प्लास्टिक के फुल शिखा की आज क्लास नहीं थी। लेकिन तब भी वह आज कॉलेज आई थी। स्टाफरूम में अपना बैग रखकर वह बैठ गई थी। ये ऑल गर्ल्स कॉलेज’ है और ज्यादातर प्राध्यापिकाएँ महिला ही हैं। इकक्‍्का-दुक्का ऑफिस स्टाफ, कम्प्यूटर डाटा विशेषज्ञ और अर्थशाक्त्र के प्रोफेसर डॉ. भगत को छोडकर। जब उसने कॉलेज ज्वाइन…

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अयोध्या – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ जीवन पद्धति में भी अनेक परिवर्तन आते रहे। पाषाण युग से वर्तमान आधुनिक कही जाने वाली इक्कीसवीं सदी तक मनुष्य ने अपने खान पान, आचार विचार, रहन सहन, वेशभूषा में भी बहुत बदलाव किए हैं। जिस नदी के जल से उसकी तृषा…

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कफ़न

कफ़न घीसू और माधव दो पात्र हैं। घीसू पिता है माधव पुत्र है। बुधिया माधव की पत्नी है जिसकी मृत्यु हो चुकी है। घीसू और माधव गांव से पैसे इकठ्ठे करके शहर में कफ़न और अंत्येष्टि का सामान खरीदने जाते हैं लेकिन उस पैसे से शराब और चिकन खा लेते हैं। उन्होंने उम्र भर भूख…

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पथ पे विश्वास चला करता है

पथ पे विश्वास चला करता है   स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये पहला ऐतिहासिक फैसला आया है, जिसने मानव जीवन की अब तक की समस्त मान्यताओं को पुनः परिभाषित कर दिया। एक ऐसा निर्णय जिसके कारण असंख्य ज़िंदगियों की अपनी पहचान स्थापित हो सकेगी। जी हाँ भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते…

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मुहिम

मुहिम रेस्तराँ की चौड़ी खिड़कियों से भूरी पहाड़ी दिख रही थी। पेड़ों से विहीन ये पहाड़ियाँ मनुष्य के लालच को आईना दिखा रही थी। जंगल कटने से अल्मोड़ा जैसी जगह में भी पानी की किल्लत हो गई थी। बाथरूम में “पर्यावरण की रक्षा करें” का कार्ड था-कम पानी इस्तेमाल करें। ये आने वाली भयावहता को…

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सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ

सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…

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