शुभेच्छा

शुभेच्छा संप्रेषित कीजै सब अभिव्यंजनाएं साकार होवें सब मधुर कल्पनाएं खंडित हो जाएं कलुषित वर्जनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। पल्लवित हों सम्यक संकल्पनाएं झेलनी न पड़े कभी अवहेलनाएं स्पर्श करे नहीं आपको प्रवंचनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। कलम से निर्गत हों अधिसूचनाएं नाम से जारी हों कई परियोजनाएं संयमित वाणी त्यागे…

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बड़े भाईसाहब

बड़े भाईसाहब प्रेमचंद जी की लिखी हुई यूं तो बहुत सी कहानियाँ हैं जो मुझे पसंद हैं जैसे ईदगाह, बड़े घर की बेटी, दो बैल, हार की जीत, बड़े भाईसाहब, पूस की रात, गरीब की हाय आदि। पर आज मैं “बड़े भाईसाहब” के बारे में यहाँ बताना चाहूंगी। “बड़े भाईसाहब”, कहानी दो भाइयों के बीच…

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Happy Anniversary

जीवन साथी जीवन पथ पर अकेली थी . अल्हड सी थी अलबेली सी … चलते चलते अनजानी राहों पर .. मिल गए एक दिन तुम यूँ ही … मेरे जीवन साथी बन कर … बन मांझी पतवार थाम कर … उतर पड़ी जीवन नदिया में …. हाँथ थाम कर चल दी तुम संग .. जिधर…

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अब दिखे न कोई राहों पर

अब दिखे न कोई राहों पर है दिन दुपहरी यूँ सन्नाटा करती हैं सड़कें साँय साँय प्रकोप भारी कोरोना का अब दिखे न कोई राहों पर। मिल न सके अपनों से अपने विडंबना ऐसी विधना की पंख झरे मुरझाये सपने पलकें उनींदी कल्पना की लगी दरों पर लक्ष्मण रेखा, हर गली गली चौराहों पर। ये…

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अपराधी कौन?

अपराधी कौन?   “ले जाओ इसे। तुरंत उठाओ।” डॉ. साहब ने आदेश दिया। सिस्टर ने सहम कर पूछा “रामा को बुला लाऊँ ? बातचीत सुनाई तो दे रही थी पर समझ नही सकी शीला। वह अर्ध बेहोशी में थी।एक गूँज सी आवाज़ ही सुनाई पड़ी। ” हाँ ले तो वहीं जायेगा,पर,अभी नहीं। अभी नर्सरी में…

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जेन गुडाल – एक विचारविज्ञानी

जेन गुडाल – एक विचारविज्ञानी ‘एक मशहूर शायर ने कहा है – “पत्थरों के शहर में दूब ना तलाशो इन्हीं पत्थरों पर चल के आ सको हो तो आओ” सच है ! महिलाओं को सफल होने के लिए पत्थरों पर ही चलना होता है। विश्व की सभी महिलाओं के लिए यह पंक्तियां लागू होती हैं।…

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जीवनशैली में बदलाव -कोविड19

जीवन शैली में बदलाव- कोविड 19 यदि हम गूगल में खोजें कि कोरोना वायरस क्या है, इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई, इसका संक्रमण कैसे होता है, संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है, फलां फलां तो पलभर में इन सबके जवाब हमें मिल जाएँगे लेकिन यदि हम खोजें कि कोरोना संक्रमण कब रुकेगी, दुनिया कब…

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कविता का साधक हो जाना

कविता का साधक हो जाना “जीवन का सुख-दुःख, यश-अपयश, सहज धीर होकर अपनाना, सबसे दुष्कर है जीवन में, कविता का साधक हो जाना..!! कौन भला झेले जीवन में, चिंताओं की अनहद ढ़ेरी, कौन भला चाहे आँखों में, सपनों के शव, पीर घनेरी, लेन देन के वणिक जगत में, कौन भला स्वीकार करेगा, जनमानस की तनिक…

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आत्मिक प्रेम

आत्मिक प्रेम   राजमहल का उद्यान- प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों से होती हुई तितलियों की परिक्रमा, मधुप का गूँजन, सरोवर की शीतलता और शीतल मंद सुरभित वायु उस रमणी को याद करने पर मजबूर कर दिया, जिसकी चर्चा तीनों लोकों में है। निषध देश का राजकुमार नल अंतःपुर के उद्यान में…

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