साइकिल

साइकिल “गौरी की माँ जरा पानी तो पिलाओ।” रामधर पसीने से तर-बतर थे,चेहरा गर्मी से लाल हो रहा था। “कुछ काम बना..?” रामधर ने एक सांस में पानी गले के नीचे उतार दिया और तौलिये से मुँह पोछने लगे। “जरा पंखा तेज कर दो..” मालती मशीन की तरह रामधर की हर बात का पालन करती…

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प्रेमचंद की कहानियों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

प्रेमचंद की कहानियों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रेमचंद एक ऐसे लेखक थे जिन्होंने हिंदी भाषा में ३०० लघु कहानियां, आत्मकथा, नाटक, पत्रिकाओं में लेख ,विदेशी साहित्यकारों की कृतियों का हिंदी रूपांतर के माध्यम से आम जान जीवन को उस काल में छू लिया जब देश उपनिवेशवाद और अंग्रेजी शासन से ग्रसित था। डेविड क्रेग (‘नॉवेल्स ऑफ…

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प्रभु राम की अयोध्यापुरी

प्रभु राम की अयोध्यापुरी अयोध्या में राम लला की घर वापसी पर प्रभु राम को समर्पित कुछ पंक्तियाँ आज अयोध्या धाम सजा है दीपों से राम हर दीप में जगमग करता है प्रभु का नाम धरती पुण्य दिशायें गुँजे देखो है आकाश पावन सरजू लहर कहे पुनीत हुआ ये काम । भारतवर्ष के इतिहास में…

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सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ

सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…

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दिखता

दिखता घर के बाहर गली गली में सन्नाटा सा पसरा दिखता बन्द हो गया हाथ मिलाना करे दूर से सभी नमस्ते शोर शराबा कहाँ खो गया पूछ रहे हैं हमसे रस्ते समय भूलकर अपनी गति को एक जगह ही ठहरा दिखता ऑफिस घर में स्कूल घर में बदल गई दिनचर्या सारी उलझन अब तक सुलझ…

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खोमचे वाली

  खोमचे वाली अपेक्षाकृत साफ सुथरे चेन्नई स्टेशन पर खड़ी लोकल ट्रेन की महिला बॉगी में फैले गजरों के फूलों और दक्षिण भारतीय व्यंजनों की मिली- जुली सुगंध ने मानो दो घंटो की एक सुखद यात्रा की भूमिका सी लिख दी थी। परंतु यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही। धीरे – धीरे डब्बे में…

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नारी बिन संसार

नारी बिन संसार गर जग में नारी ना होती, चैन से सारी दुनिया सोती, ना बाजार, न दफ़्तर होते, लोग सिर्फ़ पेड़ों पर सोते, माल ना होटल कुछ न होते, घास-पूस के जंगल होते, ट्रेन न मोटर, बोट न रिक्शा, स्वयं लोग करते निज रक्षा, ना मकान, ना फ़्लैट न खोली, करवाचौथ, न ईद, न…

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