प्रेम का गुलमोहर रौप दूँ
प्रेम का गुलमोहर रौप दूँ सुनो!! तुम और तुम्हारे ख्याल अब कली से गुलाब बन खिलने लगें हैं प्रियवर हवायें तुम्हारे आने का संकेत दे रहीं हैं चारों और मंद बयार में इश्किया खुशबू है मेरे मन की बगिया प्रफुल्लित है !! मैं लिख देती हूं एक नज्म़ ऊंगली से जो शून्य में और तुम…