कोरोना दारुण व्याधि रचायो
कोरोना दारुण व्याधि रचायो कोरोना दारुण व्याधि रचायो, चीन देश वाहि पैदा कीन्हों, सब जग माहि पठायो, जर्मन, इटली, फ़्रांस, रूस, सारे जग को भरमायो, इंगलैंड और अमेरिका सोचें, सधै ना कोनु उपायो, जग पूछे बेशर्म चीन से, क्यों चमगादड़ खायो, हालैंड, पाकिस्तान, कनाडा, सब को सोच थकायो, भारत के तत्पर प्रयास लख सब जग…
तेरे जैसा दोस्त कहाँ ‘
‘ तेरे जैसा दोस्त कहाँ ‘ मित्रता किसी भी इन्सान के जीवन की एक बेशकीमती धरोहर है।ईश्वर ने जिन्हें रक्त सम्बंध से नहीं बाँधा, उसे हमने प्रेम और अपनेपन से सींचा है और उसे ताउम्र विश्वास के धागे में पिरोकर हीरा की भांति सँजो कर रखा है। मित्रता ऊंच-नीच,जात-पांत,धर्म और उम्र के बंधन से परे…
मैं बसंत हो जाती हूँ…
मैं बसंत हो जाती हूँ… ओ मेरे बसंत जब तुम आते हो दिल को लुभाने वाली पवन बहाते हो और मैं मस्तमौला हो सारी चिंताओं को विस्मृत कर निडरता से जिधर रुख कर जाना चाहती हूं उधर चली जाती हूँ क्योंकि मन बसंत हो जाता है बसंत होना तुम जानते हो न खुशी का,उमंग का,उत्साह…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- डाॅ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर
डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनुप्रयोग भीमराव रामजी अम्बेडकर (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956) एक भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री , समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने संविधान सभा की बहसों से भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया, जिसने पहले कैबिनेट में कानून और न्याय मंत्री के रूप में…
कोरोना और मेडिकल साइंस
कोरोना और मेडिकल साइंस वर्तमान समय में विश्व भर को कोरोना महामारी ने विभिन्न तरह से ग्रसित किया है, और कर रहा है। इसके द्वारा लाखों संख्या में संक्रमण और मानव जीवन का ह्रास हो रहा है, और मानव से मानव का हर तरफ भय के वातावरण ने सबको विचलित कर रख दिया है। इस…
शहीदों के नाम
शहीदों के नाम आज मौन हैं मेरे शब्द नहीं लिखनी मुझे कोई कविता क्या सचमुच इतने समर्थ हैं मेरे शब्द ? इतनी सार्थक है मेरी अभिव्यक्ति / कि रच दूँ आपके बलिदानों को सिर्फ एक कविता में…… हाँ, नहीं लिखना मुझे अपने जज्वात अपने अंदर उपजे असीम वेदना की लहर…. कैसे व्यक्त कर दूँ कुछ…
भारत बनाम इंडिया विकास-गाथा !!
भारत बनाम इंडिया विकास-गाथा !! अनेक नामों में इस देश का एक नाम है भारतवर्ष। इस नाम में इसका प्राचीन गौरव समाहित है। ‘अमरकोश’ में वाचस्पति का एक श्लोक आता है- “स्यात भारतं किंपुरुष च दक्षिणां: रम्यं हिरण्यमयकर, हिमाद्रेरुत्तरास्त्राय:। भद्रश्वकेतुमालो तू द्वहो वर्षो पूर्वपश्चिमो इलाव्रित्त तू मध्यस्थ सुमेरुयर्ष तिष्ठति।।” इस श्लोक के अनुसार प्राचीनकाल में…