चलकर देखें
चलकर देखें इरादा कर ही लिया जब कि चलते जाना है फिर जरूरी है क्या कि अँधेरे को हम डरकर देखें हौसला लेकर चलें हल की तरह कांधे पर जहाँ पर रौशनी का घर है वहाँ चलकर देखें कसैलेपन के लिए जिंदगी ही काफी है ये जरूरी नहीं कि हर बार हम मरकर देखें…
चलकर देखें इरादा कर ही लिया जब कि चलते जाना है फिर जरूरी है क्या कि अँधेरे को हम डरकर देखें हौसला लेकर चलें हल की तरह कांधे पर जहाँ पर रौशनी का घर है वहाँ चलकर देखें कसैलेपन के लिए जिंदगी ही काफी है ये जरूरी नहीं कि हर बार हम मरकर देखें…
हर उड़ान भरने को तैयार ” पापा मुझे कम्प्यूटर कोर्स करना है “, ग्रेज्यूएशन का रिजल्ट आते ही मैने पापा से कहा । ” ज़रूर करो “, पापा के इन दो शब्दों ने मेरी उड़ान को मानो पँख लगा दिये । घर में पापा, मम्मी , भैया व छोटी बहन मेरे प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण…
तेरे शरण हम आए प्रभु ईश्वर, अल्लाह, ईशा , वाहे गुरु तेरे शरण हम आए प्रभु.. कोरोना से हाहाकार मचा है अब ना कोई देश बचा है.. तेरे शरण हम आए प्रभु.. आप ही अब रखवाला प्रभु.. चेहरे पर सबके मास्क है गंभीर बड़ा ये टास्क है जनजीवन त्राहि त्राहि है चैन कहीं भी नहीं…
I AM PLUCKING NOW… I am plucking now the eyelashes of silence one by one to mend my prayer, which has been torn by nuances of word… Now the nuance is more than the voice… And now I enter the church of Hope barefooted, so that my steps will not paint voices on my fortune….
माँ की याद ————— तुम याद बहुत आती हो माँ। खुद में तुमकों, तुममें खुद को पाती हूँ, माँ तुम याद बहुत आती हो माँ। आती हैं याद बचपन की। जब बच्चो को करती प्यार डांट और फटकार लगाती, तब तुझको खुद में पाती हूँ माँ। तुम याद———-। हम बच्चों के खातिर, दिन भर करती…
श्रद्धांजलि आदरणीय पापाजी, सादर नमन”राधे-राधे” अत्र कुशलम तत्रास्तु!के उपरांत आगे समाचार यह है कि मैं इस दुनिया में ठीक हूं और उम्मीद करती हूं आप भी तारों की दुनिया में कुशल से होंगे। पापा मन अक्सर अकेले में बैठकर आपसे बातें करता है,वह चाहता है आपसे खुल पर बातें करें लेकिन अब आप… एक टीस,एक…
बड़े घर की बेटी ‘बड़े घर की बेटी’ सामाजिक जीवंतता की एक कालजयी रचना है। मुंशी प्रेमचंद की कहानियां सीधी-साधी होती हैं और सामान्य ढंग से बातें करती हैं। इस कहानी में के चरित्र आने स्वाभाविक रूप में हैं और कथाकार ने कहीं भी भाषा कौशल या अभिव्यक्ति चतुराई का प्रयोग नहीं किया है। इन्हीं…
मकर संक्रांति मकर राशि में कर प्रवेश रवि, ऊर्जा नवल धरे | जीवन के पावन आँगन रवि, मंगल ज्योति भरे | उत्तरायण जाए दिवाकर, ऋतु नव बदल रही | शिशिर गिराता पीत वसन है, मधु ऋतु मचल रही | मन में मंगल भाव लिए जन, पुण्य प्रताप वरें | जीवन के पावन आँगन रवि, मंगल…