ईश्वर की चेतावनी

ईश्वर की चेतावनी ये कोरोना एक रोग नहीं जो विषाणु से फैला है, ये कुदरत का कहर है जो जानलेवा और विषैला है!! ये हम सबका फैलाया जहर है जो एक दिन का प्रतिफल नहीं सदियों का नतीजा है विष जो हमारे दिल में था जो आज जाकर निकला है!! कांप गए हम बस इतने…

Read More

सावन बदला अपना स्वरूप ?

सावन बदला अपना स्वरूप ? काले काले बदर धुमड घुमड कर आए वर्षा रानी भी जमकर बरसी बिजली कौन्धी और जोरों की कड़की भी, सावन न्यौता जो लेकर आई मस्ती की,झूमने की भींगने और भिगाने की रूठने की, मनाने की सपनाने की ,अलसाने की। नहीं, सावन नहीं बदला अपना स्वरूप, हां, बदला झूमने का रूप…

Read More

मौन से मुखरता तक- माया एन्जोलो

मौन से मुखरता तक- माया एन्जोलो “मौन जब भी मुखर हुआ तो एक सशक्त स्वर आन्दोलन का जन्म हुआ”। आज आपको एक ऐसी सशक्त महिला से परिचित कराना चाहती हूँ जिसने दुःख और संघर्ष को असीम साहस के साथ न सिर्फ पार किया, बल्कि दुनियां के सामने एक मिसाल भी बनकर सामने आयी ! इन्हे…

Read More

यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

Read More

अंतर्नाद

अंतर्नाद आप सबों की शुभकामनाओं से आज मुझे आंतरिक हर्षोल्लास है कि मेरा प्रथम काव्यसंग्रह”अंतर्नाद” जो मेरी १५१ कविताओं का संग्रह है,निकट भविष्य में प्रस्तुत होने वाला है। यह काव्य संग्रह मेरे पिता स्वर्गीय ‘श्री हरीश चंद्र सर्राफ’को समर्पित है।भले ही वो भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, पर दिल में आज भी जीवित…

Read More

विस्मृति के गर्भ से: रानी रासमणि

विस्मृति के गर्भ से: रानी रासमणि याद कीजिए उन्नीसवीं सदी के मध्य को। भारत का गौरव विदेशी शक्तियों द्वारा रौंदा जा चुका था। समाज गरीबी और जहालत में डूबा हुआ था। समाज तमाम कुरीतियों, अंधविश्वास में आकंठ डूबा हुआ था। वर्ग, जाति और लिंग का विभाजन बहुत स्पष्ट और क्रूर था। समाज पूरी तरह पुरुषसत्ता…

Read More

गांधी जी एक समाज सुधारक के रूप में

गांधी जी एक समाज सुधारक के रूप में कोई इंसान महान पैदा नहीं होता,उसके विचार उसे महान बनाते हैं!विचार और कार्य की शुद्धता और सरलता ही महान लोगों को साधारण लोगों से अलग करती है, वे वही काम करते हैं जो दूसरे करते हैं मगर उनका लक्ष्य समाज में बदलाव लाना होता है! राष्ट्रपिता महात्मा…

Read More

आरोहण

आरोहण उस दिन पता नहीं मैं किस कार्य से कार्यालय की ओर गई थी । ऐसे अमूमन मैं कक्षाओं में ही उलझी रहती हूँ और कार्यालय की ओर जाना संभवतः तभी हो पता है – जब तक मुझे कोई आवश्यक कार्य न आन पड़े । बहुत याद करने पर भी उस दिन कार्यालय की ओर…

Read More