कोविड -19 और गर्भवती स्त्री

कोविड -19 और गर्भवती स्त्री आज कोविड-19 ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है । विश्व में बढ़ते हुए संक्रमण को संभालने और इलाज करनें के लिए हर स्तर पर विस्तार से कार्य हो रहें हैं। इस वायरस के तीव्रता को मेडिकल सेवा और रिसर्च में लगें, हर क्षेत्र के चिकित्सकगण और…

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लिखती तो तू है ज़िन्दगी

  लिखती तो तू है ज़िन्दगी मैंने तो सिर्फ पकड़ रखा है हाथ में कलम , लिखती तो तू है ज़िंदगी ! देखा जाए तो लिखने वाले हर विधा पर कलम चला ही लेते हैं, पर जब बात खुद पर लिखने की हो तो यह बात रोचक भी हो जाती है और तनिक जोखिमपूर्ण भी…

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दिल का सूकुन

दिल का सूकुन दिल को सुकून देता है तेरा चांद सा मुखड़ा। बड़े भाई की जान है तू मम्मी पापा के जिगर का टुकड़ा।। बड़ी मिन्नत से तुमको पाया मां अंबे का आशीर्वाद है तू । सूने हमारे आंगन में छन छन पायल की आवाज है तू ।। तेरी बोली- मधुर रस की गोली कानों…

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दहलीज

‘दहलीज’ लगभग बाइस-तेईस बरस की कमली घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोने का काम करती है। पति मजदूर है और सात बरस से कम उम्र के चार बच्चे थे दोनों के। उनमें से दो बड़े बच्चे स्कूल जाते हैं। तीसरी और चौथी बच्चियां अभी बहुत छोटी हैं। उन्हें घर पर अकेला छोड़ना सहज न था…

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हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता

हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता चीन और भारत का बहुत पुराना ऐतिहासिक रिश्ता है। मौर्य काल से नेहरू मोदी तक रिश्तों का सफर रहा है। पहली सहस्राब्दी के दौरान, दोनों ही आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे और 19 वीं सदी के अंत और 20 वीं सदी की…

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आया मौसम प्रेम का…

आया मौसम प्रेम का… रोज़ डे 1 शीत ऋतु की उजली धूप सा चमके है तेरा रूप….. हर लो मेरा उर-तिमिर प्रिय स्वीकारो यह वृतपुष्प 2 हृदय तल में ले उद्वेग कई सतह पर मैं रहा संभ्रांत जीवन रण के कोलाहल से तन जर्जर मन हुआ क्लान्त बिसरी सुधि की पुस्तिका से झांक उठा तब…

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काहे बिहाए बिदेश

काहे बिहाए बिदेश गाँव का चबूतरा जो हमेशा गुलजार रहता था, आज सुनसान है। वहाँ हमेशा एक भीड़ हुआ करती थी, खोमचे वाले, बस पकड़ने वाले, फेरी वाले। सुस्ताने की एक वही जगह थी। पीपल का बड़ा पेड़ और चारों तरफ बड़ा चबूतरा। एक हैंड पम्प भी लगा हुआ है। दरअसल कल ही सरकारी दफ्तर…

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आ लौट के आ…

आ लौट के आ… उफ्फ बारह बज गये। एक लम्बी सांस ले उसने लैपटॉप शट ऑफ किया और दोनो हाथ ऊपर कर उंगलियां एक –दूसरे में फंसा चटका दीं। चटर- चटर की आवाज के साथ ही एक पुरानी याद कहीं भीतर कुनमुनाई और दादी का सफेद बालों से घिरा ममतालू चेहरा हवा में उभर आया।होती…

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मैं “बुद्ध” न बन पाई

मैं “बुद्ध” न बन पाई आसान था तुम्हारे लिए सब जिम्मेदारियों से मुहँ मोड़, बुद्ध हो जाना , क्यूंकि पुरुष थे तुम। एक स्त्री होकर बुद्ध बनते, तो जानती मैं । जिस दिन “मैं” के अन्तर्द्धन्द पर विजय मिल जाएगी निर्वाण की राह भी बेहद सुगम हो जाएगी। सब त्याग कर तुमने उस “मैं” पर…

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