खुद को जानती हूँ मैं
“खुद को जानती हूँ मैं” ऐसा नहीं है कि– औरत हूँ तो बस नशा है मुझमें पत्नी हूँ,माँ हूँ,बहन हूँ– इक दुआ है मुझमें… ऐसा नहीं है कि– संगमरमर के साँचे में ढला जिस्म हूँ केवल नमी हूँ,आग हूँ,धरती,आकाश हूँ– जीने के लिए जरूरी हवा हूँ शीतल… ऐसा भी नहीं है कि– बस मुहब्बत, खुशबू,…