वीरांगना बीना दास

वीरांगना बीना दास आज से ठीक 88 वर्ष पूर्व 6 फरवरी 1932 का दिन था, जब कलकत्ता विश्वविद्यालय के कनवोकेशन हाल में बैठे सैकड़ों लोग एक युवती द्वारा लगातार चलायी जा रही गोलियों से स्तब्ध रह गए, जिनका निशाना कोई और नहीं बल्कि बंगाल का तत्कालीन गवर्नर स्टेनले जैक्सन था। हालाँकि जैक्सन बच गया पर…

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हृदय परिवर्तन

हृदय परिवर्तन श्याम दिल्ली की एक गारमेंट्स फैक्ट्री में काम करता था। वह सात साल पहले अपनी बीवी लक्ष्मी, बेटी संगीता और गोदी में खेलते बेटे संजय के साथ यहाँ रायबरेली के एक गाँव से आया था। वह रात-दिन एक करके मेहनत करता था और मन में बच्चों के उज्जवल भविष्य के सपने रखता था।…

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हार्ट अटैक

युवाओं में हार्ट अटैक आज जब हार्ट अटैक सबसे ज्यादा मौतों का कारण बन चुका है, इसलिए हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि हार्ट अटैक क्या है? हार्ट अटैक पड़ने पर क्या किया जाए और हार्ट अटैक के बाद क्या सावधानियां बरती जाएँ ? आम तौर पर ज्यादातर लोग दिल के दौरे की सही…

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सबसे बड़ी पराजय

सबसे बड़ी पराजय सरिता से हमारा परिचय फेसबुक पर ही हुआ था।वह हमारें उन तमाम मित्रों में से एक थी,जो फेसबुक की सूची में थे और पोस्टों पर लाइक या कॉमेंट कर देते थे।व्यक्तिगत एक दूसरे को नहीं जानते थे।लड़कियों के मामले में मैं अपनी ओर से संकोचशील ही रहता था;यानी येन केन प्रकारेण,जल्दी जल्दी…

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तुम मेरे पास हो …हमेशा!

माँ, तुम हो यहीं कहीं,..मेरे आसपास, भींगी पलकें जब यादों का सहारा चाहती हैं, तुम तब भी -मेरे साथ होती हो ..माँ, जैसे मैं तुम्हें छू सकती हूँ, महसूस कर सकती हूँ– ”तुम्हारे कदमों क़ि आहट, जब ये अधर कुछ्फरियाद करते हैं, तो जैसे.. तुम सुनती हो मेरी आवाज, बिन कहे मान लेती हो, मेरी…

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अब दिखे न कोई राहों पर

अब दिखे न कोई राहों पर है दिन दुपहरी यूँ सन्नाटा करती हैं सड़कें साँय साँय प्रकोप भारी कोरोना का अब दिखे न कोई राहों पर। मिल न सके अपनों से अपने विडंबना ऐसी विधना की पंख झरे मुरझाये सपने पलकें उनींदी कल्पना की लगी दरों पर लक्ष्मण रेखा, हर गली गली चौराहों पर। ये…

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मार्गरेट हिल्डा थैचर

मार्गरेट हिल्डा थैचर मार्गरेट हिल्डा थैचर (रॉबर्ट्स), (बैरोनेस थैचर) का जन्म 13 अक्टूबर 1925 को हुआ था। मार्गरेट थैचर एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और राजनेता थीं, जिन्होंने 1979 से 1990 तक यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री और 1975 से 1990 तक कंज़र्वेटिव पार्टी की नेता के रूप में कार्य किया। वह पहली महिला ब्रिटिश प्रधानमंत्री थीं…

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चक्र

चक्र आठ मार्च आते ही निमंत्रणों का सिलसिला बढ़ जाता है। पिछले तीन फोन कॉल बस ‘विलासिनी, प्लीज, लड़कियाँ हैं, आप बोलेंगी तो अच्छा लगेगा’। विलासिनी ने सोचा कि ये आजकल की फेसबुक-द्विटर-इंस्टाग्राम की लड़कियों को सब पता है। उनके फेमिनिज्म की परिभाषा भी अलग है। वो अब दराजों में नहीं, गले में बोर्ड लगाकर…

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मानवता का शव 

मानवता का शव इतिहास के खडंहरों,में क्षतविक्षत पडा है मानवता का शव… सदियों,का सन्नाटा.. और ..दिलों दिमाग पर गूंजतीं …भयानक चीखें… सरसराहट …दरकते रिश्ते क्रदंन कराहती रुहों का.. पुराने दिनो की आखों से बहती धार में… बताऔ..भविष्य की आँख में काजल सजाऊं कैसे??? दूर बहुत दूर ले आती कोकिला की आवाज़ किन्तू पास ..बहुत पास…..

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