मात देने को

मात देने को विश्व के सम्मुख बड़ी विपदा खड़ी है मात देने को मगर हिम्मत अड़ी है। खौफ से मासूमियत भी कैद घर में खेल का मैदान तकता रास्ता है ओढ़ चुप्पी कह रही सुनसान सड़कें भूल मत तेरा हमारा वास्ता है अब तरीके युद्ध लड़ने के अलग हैं ये लड़ाई बैठ कर घर मे…

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माँ

माँ मां की महिमा कोई कैसे कहे । है अपरंपार जगत में माँ ।। हर मुश्किल का हल है माँ । अनगिन पुण्यों का फल है माँ ।। अपनी हर संतान की खातिर। अमृत सा प्रभावी जल है माँ ।। माँ के जैसा कोई और नहीं मां के जैसी माँ ही है ना ।। है…

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बेटा मजदूरिन का

बेटा मजदूरिन का एक बेटा मजदूरिन का, मुँह ना देखा था पिता का। दहलीज पर झोपड़ी के, था ,तरसता भूख से, तलाशती आँखों से माँ को, हर चेहरे को निहारती। थकी पलकों को सहला जाती, नींद अपने आँचल में। कभी जागता कभी सोता। ना जाने माँ कब आयेगी। सिने से लगायेगी, लाल को एक था…

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हत्या की शिनाख़्त का सपना

हत्या की शिनाख़्त का सपना कोई नींद में बोल रहा था. नहीं, ये रात के सन्नाटे में किसी के फ़ोन पर झगड़ने की आवाज़ नहीं थी, ये एक बहकी हुई बेहोश आवाज़ थी, मैं अचानक डर गयी. यह आवाज़ नशे में बहकी हुई नहीं थी, नींद में बेहोश थी, लस्त पस्त। मैं उसे पहचानती थी….

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मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश

मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश मैं अपनी कर्मस्थली की ओर गतियमान देखती जाती हूं, प्रकृति के खुले आंगन में, अनेकों की संख्या में खड़े , पत्र विहिन शाखाओं को धारण किए हुए महुआ के वृक्षों को। मानो बांहें फैलाए खड़े हों, अपनी प्रेयसी के इंतजार में। पत्तियाँ सूख कर ताम्रपत्र बन गई हैं और…

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कथनी और करनी

कथनी और करनी अलार्म घड़ी ने जैसे ही सुबह पांच बजे का अलार्म बजाया,परेश ने आधी नींद में ही घड़ी टटोल कर उसका अलार्म बंद किया।उठ जाऊं- न उठूं , इसी उधेड़बुन में पांच- सात मिनट जाया करके आखिर उठने का फैसला किया। रोज की भांति नित्य कर्म, स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा के कमरे…

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क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल

क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल   यह तीर्थ महातीर्थों का है.. मत कहो इसे काला पानी.. तुम सुनो यहाँ की धरती के.. कण कण से गाथा बलिदानी. प्रखर राष्ट्रभक्ति की ये पंक्तियां भारत वर्ष के स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी श्री गणेश दामोदर सावरकर जी के होठों पर तब भी सजी हुई थी…

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मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ ईश्वर की आभारी हूँ । स्वेच्छा से मैं कभी भी कहीं भी आ जा सकती हूँ पर ससुराल प्राथमिकता है मेरी अत: कभी कभी जरूरत के वक्त मैं मैके को भी हारी हूँ …. हाँ मैं नारी हूँ । छोटे से रसोई घर की मैं…

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विरासत का वर्तमान

  विरासत का वर्तमान आखिर, जिस बिहार का अतीत इतना गौरवशाली रहा है आज वह इतना विकृत कैसे हो गया। बिहार में न तो प्राकृतिक संसाधनों की कमी है और न ही योग्यता की। आखिर वो कौन-से कारण हैं जिनके कारण रोजी-रोटी कमाने बिहारियों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। कुछ तो होगा। ऐसा…

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