बचपन और बारिश

बचपन और बारिश याद आता है मुझको अपना गुज़रा ज़माना वो बारिश का मौसम और बचपन सुहाना स्कूल में रेनी डे होने पर मेरा खुश हो जाना रास्ते में फिर छप छप करते हुए आना छींटे पड़ने पर लोगों का बड़बड़ाना फिर साॅरी बोल मेरा जल्दी से भाग जाना घर आकर बारिश के पानी से…

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फ्लोरेंस नाइटिंगेल

फ्लोरेंस नाइटिंगेल महिलाएँ केवल जन्मदात्री होकर पालन पोषण ही नहीं करतीं वरन जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने कड़ी मेहनत व त्याग से अपनी योग्यताओं को सिद्ध किया है। विश्व भर की ऐसी महिलाओं की लंबी सूची में एक नाम निस्वार्थ फ्लोरेंस नाइटिंगेल का भी स्वर्णाक्षरों में अंकित है। निज सुख को ताक पर रख…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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…..जीवन दंश का क्या ?

…..जीवन दंश का क्या ? पढ़ती हूं ,सुनती हूं, फिर से नव पुष्प खिलेंगे, नव पल्लव फिर सज जाएंगे, पर जो टहनी सूख गई, असामयिक दावानल से, उन दरख़्तों का क्या? झुलसी वल्लरियों का क्या? जीवन की आस झलकाते परंतु अब, ठूंठ बन चुके स्याहवर्णी नवपादपों का क्या? कुछ घरों में चिरनिंद्रित मायें, रोटी जलती…

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इंग्लिश  समुद्री  डाकू  और  मुग़ल  सल्तनत 

                                                                            इंग्लिश  समुद्री  डाकू  और  मुग़ल  सल्तनत           इंग्लैंड के संसद भवन में प्रमुख द्वार…

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प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

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गीली हुई क़िताब

गीली हुई क़िताब आज सारे घर में सुबह से ही किसी उत्सव सा माहौल था। आखिर घर भर के आँखों के तारे गोलू बाबू अरे.. नहीं भाई माफ़ करना … श्रीमान चिन्मय नीलकंठ जोशी आज पहली बार विद्यालय जो जा रहे है। वैसे उन्हें घर में ही दादी ने कई श्लोक पथ करवा दिए थे।…

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“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता”

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता” नारी के बिना इस सृष्टि की कल्पना करना संभव ही नही है। युवा हो या अधेड़ या हो वृद्ध। सभी पुरुषों को यह समझना जरूरी है। आज छोटी बच्चीयों से लेकर वृद्ध महिलाएं सुरक्षित नही है ,यह 21 वी सदी में रहते हुए भी बड़ी वेदना की बात है।…

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अनु बाफना की कविताएं 

  अनु बाफना की कविताएं  1.मशाल सी कलम प्रखर हो सूर्य किरणों-सा,तपिश से लोह भी पिघले । करे जो सत्य-आराधन,खरा सोना सदा उगले । दिखे जब राष्ट्र खतरे में, कि तीरों की करे वर्षा । बहे जब लेखनी ऐसी,सितारा देश का उजले । रचा साहित्य ऐसा था,लगे वनराज की गर्जन। जगाये ओज तन-मन में, उफन…

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रत्न बड़े अनमोल

   रत्न बड़े अनमोल-                    ————————-    औषधि मणि मंत्राणाम्, ग्रह-नक्षत्र  तारिका। भाग्यकाले भवेत् सिद्धिः , अभाग्यं निष्फलं भवेत ।। अर्थात, औषधि, मणि(रत्न) एवं मन्त्र, ग्रह-नक्षत्र जनित रोगों को दूर करते हैं। यदि समय सही है तो शुभ फल प्राप्त होते है, जबकि विपरीत समय में ये…

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