ऋचा वर्मा की कविताएं

ऋचा वर्मा की कविताएं १.इस बार का बसंत इस बार के बसंत में खिले पलाश ने, बिल्कुल नहीं लुभाया हमें ये पलाश के फूल लगते हैं छींटे से रक्त के, पत्रविहिन पलाश के गाछ, मानो देहविहिन बहते लहू, न है इंतजार अमलतास के पीले फूलों का, जो चमका करतें हैं सोने की तरह, आजकल भय…

Read More

शतबार नमन! शतबार नमन!!

शतबार नमन! शतबार नमन!! हिमालय की ऊँचाई पा, जिसका जीवन रहा सफल; गतिक जीवन से यकायक, हो गया जो निष्पंद, निश्चल; रहा जीवन-पर्यंत जो- निन्छल, निर्विकार, निर्मल; शैलेन्द्र सा विराट, विमल- शैलेन्द्र-व्यक्तित्त्व था धवल! झंकृत-जीवन से हो मौन, टूट गये वीणा के तार; चलते-चलते ही मानो वे- ओझल हो गये क्षितिज पार; खोजते रहे हम…

Read More

हिन्दी फिल्में और हिन्दी का प्रसार

हिन्दी फिल्में और हिन्दी का प्रसार कहते हैं कि राजनीति, फिल्में और क्रिकेट — हम भारतवासियों का अस्सी से ज्यादा समय इनकी चर्चा करने में ही बीतता है। इन तीनों ने देश को कभी तोड़ा भी है और बहुत कहीं जोड़ा भी है। फिल्मों का तो भारतीय जीवन में और उनके मानस पटल पर बहुत…

Read More

मन और गुलाब

मन और गुलाब मन गुलाब सा कोमल सुरभित, आज कर रहा स्नेह निवेदित संग साथ का सुख चाहें हम मेरी कविता तुम्हें समर्पित मन वाणी और भाव हृदय के आज सभी तुमको को है अर्पित यह गुलाब सी रंजित कविता बने दोस्ती की मिसाल जब हम तुम बंधे एक बंधन में गुथे हुए फूलों से…

Read More

अखण्ड भारत का सरदार

अखण्ड भारत का सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिज्ञों में प्रमुख है। भारत की धरती पर उनका नाम ,एक सुलझे हुए सेनानी और राजनेता के रुप में सदा अमर रहेगा ।वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल (३१ अक्टूबर १८७५-१५ दिसंबर१९५०) जी सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे,वे भारतीय राजनीतिज्ञ थे।उन्होने…

Read More

असमंजस 

    असमंजस    रमा अनमनी सी कोर्ट में बैठी है । सामने बैठे राजन से नज़र मिली तो रोज़ की किचकिच आँखों में तैर गयी। उपेक्षा, ताने और झगड़े भी । उसकी नफासत और ऊँची शिक्षा ही निशाने पर हमेशा रहती। जाने क्यों शादी से पहले की समझ अब टकराव में बदल गई। फिर…

Read More

फागुन

                                                     फागुन                          माघ बीता फागुन आया, लाया रंगों की बौछार,  होली में…….                         कजरारे नैनों की भाषा,  कुंदन बदन की अभिलाषा,                           है वह निपट गंवार अनाड़ी, जो न समझे होली में…….                                कैरी टपकी, कोयल कूकी, टेसू दहका, भौंरा बहका,                            कनकनी दूर हुई,  पानी पर आया प्यार होली में…….                            छ्र्रर्र्र पिचकारी बरसे,  उड़े अबीर गुलाल के…

Read More

मैं हूँ ना

मै हूँ ना हाँ, जिंदगी सिर्फ यादों का खेल ही तो है। एक उम्र के बाद ऐसा लगने लगता है जैसे जीने के लिए अब ज्यादा कुछ बचा ही नहीं ।बस अतीत की लम्बी गहरी सुरंग जैसी राहों पर मन भटकता रहता है हर-पल, हरदम । तनु के जीवन में भी ऐसा ही कुछ धा।…

Read More