कैसे लिखूं तुम्हें मैं
कैसे लिखूं तुम्हें मैं कैसे लिखूं तुम्हें मैं, कैसी तस्वीर बनाऊँ? मन और काय की भाषा, परिभाषा लिख न पाऊँ। उंगली थाम सिखाया चलना, सतपथ की दिशा बताई। साहस नित ही रहे बढ़ाते, तुमने जीत की राह दिखाई। हर कठिनाई सरल बनी, हर सम्भव हल बतलाया। संस्कार भरे संस्कृति सिखलाई, स्वाभिमान का अर्थ बताया।। उसी…
कोरोना के बाद की दुनिया
कोरोना के बाद की दुनिया पिछली सदी के दो विनाशक महायुद्धों ने हमारी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक बदला था। विश्व इतिहास में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है जिसने राजनीति और अर्थतन्त्र के साथ लोगों का जीवन और जीने के तरीके भी बदल दिए हैं। महामारियां पहले भी आती रही…
“आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “
” आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “ आजादी के बहत्तर साल , बोल कर देखिए , एक सुकून और गर्व का एहसास होगा , 15 अगस्त 2019 को हमारा देश आजादी की बहत्तरहवीं वर्षगाँठ मनाएगा। बहुत मुश्किलों और संघर्षों के दौर से निकल कर आज हम उस जगह हैं जहाँ हम ये कह सकते हैं…
हिंदी चालीसा
हिंदी चालीसा श्रेष्ठ, सुगढ़, सुखदायिनी, हिंदी सुहृद, सुबोध, सरल, सबल, सुष्मित, सहज, हिंदी भाषा बोध। नित-प्रति के व्यवहार में, जो हिंदी अपनाय, ’सरन’ सुसत्साहित्य का सो जन आनंद पाय। जय माँ हिंदी, रुचिर भारती, सुकृत कृतीत्व सुपथ संवारती। १. रचनाकारों के मन भाती, सत्साहित्य की ज्योति जगाती। २. जगमग ज्योतित करे हृदय को, हुलसित-सुरभित करे…
मेरा प्रणय निवेदन
मेरा प्रणय निवेदन सुनो,, आज फिर से तुम्हें प्रपोज करने को जी चाहता है। मेरा बजट थोड़ा कम है, शालिटेयर नहीं है मेरे पास, दुर्गा माँ की पिण्डी से उठाए गंगाजल से भीगे, कुछ सूर्ख लाल अड़हुल के फूल हैं। तुम स्वीकार तो करोगे ना? मेरा प्रणय प्रणय निवेदन,,, तुम पदाधिकारियों का क्या भरोसा? हमारा…