धीरे धीरे रे मना

धीरे धीरे रे मना “अरे चुन्नू ! क्या सारा दिन खेलते रहोगे। आज तो सूरज उगते ही अपना क्रिकेट बल्ला सम्भाल लिया। पता है, बारह माही परीक्षा सर पर आ गई है।पढ़ाई के लिए स्कूल ने तुम्हें छुट्टी दे रखी है।और मैं भी तुम्हारे लिए घर पर हूँ, ऑफिस से छुट्टी लेकर। छः माही का…

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तामील

तामील   हुक्मे नज़रबंदी है ये फ़रमाया आला पीर ने तू बहुत नाचीज़ बन्दे तू हुक्म की तामील कर   वक्त की पाबंदगी का है यह फ़रमान प्यारे तू बहुत ख़ुदगर्ज़ बन्दे फरमां यह क़बूल कर   तू रहेगा आज से पिंजरे में ज्यूँ पंछी कोई तू बहुत आज़ाद बन्दे पिंजरे से ना परहेज़ कर…

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जीतेंगे हम शान से

जीतेंगे हम शान से सप्तबधी अवधान से देह के व्यवधान से कोरोना के जंग में जीतेंगे हम शान से।। वीथियों में जो मिले खोल चेहरा जो चले कहें घरों में अब रहें नसीहतों की आन से।। देखने में व्यस्त हों वो ना भूख त्रस्त हो परिवेश भी सतर्क हो प्रतिवेशियों के ध्यान से।। अधीरता को…

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भारत का मजबूर मजदूर

भारत के मजबूर मजदूर “चढ़ रही थी धूप, गर्मियों के दिन, दिवा का तमतमाता रूप, उठी झुलसती हुई लू, रूई ज्यों जलती हुई भू, गर्द चिनगीं छा गयी, प्रायः हुई दुपहर, वह तोड़ती पत्थर..” आप सबमें से कुछ लोगों ने महाकवि निराला की यह कविता सुनी होगी और मेरा दावा है जब भी आपने सुनी…

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आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

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सिनेमा में होली उत्सवप्रियता का प्रतीक

सिनेमा में होली उत्सवप्रियता का प्रतीक कालिदास के अनुसार मनुष्य मात्र उत्सवप्रिय होता है। उन्होंने शताब्दियों पूर्व कहा था, ‘उत्सवप्रिया: हि मानवा:’। अधिकाँश उत्सव कृषि से जुड़े हैं। जब फ़सल लहलहा रही होती है, फ़सल कट कर आती है तो किसान अपनी मेहनत का फ़ल देख कर झूम उठता है, खुशी से नाचने-गाने लगता है।…

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सुबह, दोपहर और शाम

सुबह, दोपहर और शाम दिसम्बर का अंतिम सप्ताह भारत के उत्तरी भाग में सिहरन, ठिठुरन, धूप की गर्मी, कम्बल और रजाई के मखमली अहसास और आग की तपन का होता है। और इसी महीने में आता है क्रिसमस का रंगीन त्यौहार। बाकी भारतीय पर्वों की तरह इसके दिन और महीने नहीं बदलते – यह हमेशा…

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घरेलू हिंसा

  घरेलू हिंसा मुझे हिंसा अपने आप में ही बहुत बुरी लगती है ।आमतौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि हम हिंसक हो जाएंगे तो हमें हमारा हक मिल जाएगा , लोग हम से डर जाएंगे लेकिन यह गलतफहमी है ।हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है ।जब यहीं हिंसा घर में होने…

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कोविड-19 और विश्व

कोविड-19 और विश्व साल 2020 नववर्ष की शुरुआत मंगल कामना एवं बधाइयों के साथ साथ कोरोना वाइरस की सूचनाओं से हुई । अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में देश दुनिया की खबरों में कोरोना संक्रमण की सूचनाएं आने लगी ।चीन से कुछ ऐसे विडियो प्रसारित हुए जिसमें लोग खड़े- खड़े गिर रहे थे। खबरों का बाजार गर्म होने…

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मातृदेवो भव

मातृदेवो भव दुनिया की हर चीज झूठी हो सकती है, हर चीज में खोट हो सकता है पर माँ की ममता में कोई खोट नहीं होता है। यूँ तो यह माना जाता है कि किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है, अपने भाव को व्यक्त, किया जा सकता है और अमूमन ऐसा होता भी…

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