चलते रहने का नाम जीवन है

चलते रहने का नाम जीवन है जीवन के प्रति पॉजिटिव दृष्टिकोण, जीवन में चाहे जितने भी दुख आये,,,हमेशा हँसते रहने को कृतसंकल्प,,, जीवन हरपल इम्तहान लेती है,,,पर सफल होने का जज्बा, निराशा में भी आशा का दामन थामे रखना,,,हर परिस्थिति में एक शक्ति का अहसास रखना,,,संघर्षशीलता हर हालत में अपनी ताक़त स्वंय बन जाती है।अन्याय…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- एम. एस. स्वामीनाथन

भारत के अन्नदाता- एम. एस. स्वामीनाथन खेतों में बालियान खड़ी थीं पर उसमें दाने कम थे भूखा था देश सारा और पड़े बेवस से हम थे दुखी हुआ स्वामीनाथन तब खोज कुछ ऐसी कर डाली हरित क्रांति आयी देश में मुस्कुरायी गेंहूं की बाली। गोदाम भरे अनाजों से जेबों में हरियाली छाई धरती उम्मीद से…

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अंकुरण

        अंकुरण रिंगटोन के बजते ही फोन के स्क्रीन पर अल्फाबेट के जिन सदस्यों ने एक परिचित नाम को उकेरा, वैसे ही भय और उत्साह दोनों की ही बेमेल संगति ने हृदय के धड़कने की गति को मानो बेलगाम कर दिया। मेरी आशंकाओं के विरुद्ध फोन के दूसरी तरफ आश्वस्तिपूर्ण ध्वनितरंगें पृथ्क…

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दीप जलायें

दीप जलायें कोई न होअन्धविश्वासी ऐसे मानव को सजग बनायें, आओ नव सृजन कर एक युग बनायें, कोई भूखा न सोये ऐसा कुछ कर जायें आओ मिल दीनमुक्त बान्धव बनायें, कोई गरीबी में न जीये, ऐसा निर्धन मुक्त देश बनायें, आओ मिलकर समृद्ध समाज बनायें, कोई न रहे अनपढ़ ऐसा ज्ञान -अलख जगायें, आओ मिल…

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मात देने को

मात देने को विश्व के सम्मुख बड़ी विपदा खड़ी है मात देने को मगर हिम्मत अड़ी है। खौफ से मासूमियत भी कैद घर में खेल का मैदान तकता रास्ता है ओढ़ चुप्पी कह रही सुनसान सड़कें भूल मत तेरा हमारा वास्ता है अब तरीके युद्ध लड़ने के अलग हैं ये लड़ाई बैठ कर घर मे…

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विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम

विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है।इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रभाव से जूझ रही है, ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आज ही के दिन साल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी।विश्व स्वास्थ्य संगठन, जिसे डब्ल्यूएचओ (WHO)के नाम से जाना जाता…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी ‘बड़े घर की बेटी’ सामाजिक जीवंतता की एक कालजयी रचना है। मुंशी प्रेमचंद की कहानियां सीधी-साधी होती हैं और सामान्य ढंग से बातें करती हैं। इस कहानी में के चरित्र आने स्वाभाविक रूप में हैं और कथाकार ने कहीं भी भाषा कौशल या अभिव्यक्ति चतुराई का प्रयोग नहीं किया है। इन्हीं…

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राजी

राजी “पानी! पानी!”अपने ही शब्द लौट कर उस तक पहुँच जाते हैं।तेज बुखार से देह तप रही है,गला सूख गया,आँखें जल रही हैं।सिर दर्द से फटा जा रहा है।अपने ही हाथ से सिर दबाकर कर कुछ आराम पाने की नाकाम कोशिश की। तीन दिनों से उसकी यही हालत है। डिस्पेंसरी भी तो नहीं जा सकती।…

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सपनों का भारत

” सपनो का भारत “ हो न अमन की कमी इस जहां में मिलजुल सब रहें इस जहां में हर विस्थापितों को मिले आशियाना रहे अनाथ ना कोई इस जहां में आतंकी के आतंक का हो खात्मा उन्हें भी प्यार मिले इस जहां में बागों में खिले हर इक कली कहीं कुम्भला न जाए इस…

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अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना

अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना समय की विषम आंधियों में आस का दीप जलाए रखना अपने उपायों और खूबियों से भारत को बचाये रखना धरती देखो नभ देखो हे ईश्वर! इस कहर से बचाए रखना हे लाड़लों! हम साथ है ये विश्वास बचाये रखना चलो साथियों एकजुट हो इस दानव से जिंदगी की जंग चलाए…

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