पीतल

पीतल “सच कहता हूँ मुझे ज़रा भी याद न रहा” शाम के धुंधलके में एकाएक कौंधे निशा के सवालिया अंदाज पर पीयूष ने थोड़ी हैरानी के साथ अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा। “पूरे चार साल बाद आए हो इसके बाद भी” निशा ने बनावटी गुस्से से आँखे तरेंरी। “बस यही तो ग़लती हो गयी,मुझे ज़रा…

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जब आप जंग पे निकली थीं, अस्पताल को

    जब आप जंग पे निकली थीं, अस्पताल को मेरे बाग़ में फलों से भरा एक दिव्य वृक्ष है, वृक्ष यह वृक्ष मेरे बाग़ की मुस्कुराहट है; मुस्कुराहट यह मुस्कुराहट जा रही है कल अवकाश पर! अवकाश उस अवकाश पर जहाँ सँवारा जाएगा मेरे पसंद की मुस्कुराहट की शाख़ को, शाख़ उस शाख़ को…

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असमंजस 

    असमंजस    रमा अनमनी सी कोर्ट में बैठी है । सामने बैठे राजन से नज़र मिली तो रोज़ की किचकिच आँखों में तैर गयी। उपेक्षा, ताने और झगड़े भी । उसकी नफासत और ऊँची शिक्षा ही निशाने पर हमेशा रहती। जाने क्यों शादी से पहले की समझ अब टकराव में बदल गई। फिर…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिन्दी भारत की हर श्वास है, इक नवीन विश्व की आस है। तन में बहता अरुण रक्त है, हर भारतवासी इसका भक्त है। हिंदी प्रेम-विजय की बोली, मानवता पनपी इसकी झोली। यही ग्रीष्म-शीत ऋतु बसंती, माँ देवी के माथे की बिंदी। वर्ण से शब्द, शब्द से वाक्य, हर भाव में भाषा महान है।…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- डॉ बिधानचंद्र राय

भारत रत्न डॉ बिधान चंद्र राय  (चिकित्सक,स्वतंत्रता सेनानी समाज सेवी राष्ट्र निर्माता) डॉ बिधान चंद्र रॉय जी को  भारत और विश्व में एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षाविद, निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी,कुशल राजनीतिज्ञ और प्रसिद्ध समाज सेवक के साथ-साथ आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माता  के रूप में बड़े ही श्रद्धा और सम्मान से स्मरण…

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बापू की ओर

  बापू की ओर मिथ्या से सत्य की ओर घृणा से प्रेम और करुणा की ओर सांप्रदायिकता से भाईचारे की ओर हिंसा की बर्बरता से अहिंसा की संवेदना की ओर बर्बर भीडतंत्र से सत्याग्रह की ओर विलासिता से सच्चरित्रता की ओर उपभोक्तावाद से सादगी की ओर अंध औद्योगीकरण से कुटीर उद्योग की ओर पूंजी के…

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सोशल डिस्टेंसिंग और सोशल नेटवर्किंग

सोशल डिस्टेंसिंग और सोशल नेटवर्किंग वैश्विक बीमारी कॉरोना ने आज विश्व की तमाम जनसंख्या को घर की चारदिवारी में क़ैद करवा दिया है । ” सोशल डिस्टेंसिंग ” आम बोलचाल का शब्द हो गया है , जिसका अर्थ भी सबको समझ में आ रहा है । समाज में पिछले कुछ वर्षों के प्रचलन पर ध्यान…

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बंद चेहरों का शहर

बंद चेहरों का शहर (कोरोना संस्मरण) जनवरी 2020 : कोरोना का नाम पहले नहीं सुना था लेकिन खबरों में चीन के वुहान की हल्की-फुल्की बातें सामने आ रही थी। चीन दूर है, यहाँ उसकी हवा नहीं आएगी। मन को आश्वस्त किया। राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस की चाय का आनंद लिया। दबे स्वरों में लोगों…

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अतीत के साये

अतीत के साये कहानियों के कितने पात्र सदियों से हमारे आसपास इर्दगिर्द घूमते रहते हैं और न जाने कितनी कहानियां, लघुकथाएं, कितने उपन्यास लिखे पढ़ें गए, सराहे गए। कुछ धूल धूसरित हुए पड़े रहे हैं, शेल्फों में। ऐसी ही असंख्य पुस्तकें उस लाइब्रेरी में मौजूद थीं, जिन्हें बरसों से झाड़ा तक नहीं गया था, खोलकर…

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त्योहारों में उल्लास

त्योहारों में उल्लास ढूंढना हो अगर त्योहारों मे तो उसका ध्येय ढ़ूंढ़िए उद्देश्य ढ़ूंढ़िए। उपहारों के बंद डब्बों मे लेने वाले की मुस्कान देनेवाले का अरमान ढ़ू़ंढ़िए। त्योहार धर्मों का नहीं उमंग और उल्लास का होता है, बड़ी कठिन डगर है इस जीवन की ये छोटे छोटे त्यौहारों के पड़ाव ना होंगे तो हम थक…

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