प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

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मेरी बेटियाँ:मेरी शान

मेरी बेटियाँ:मेरी शान लोग गलत थे जो कहते थे अक्सर, बेटों से चलता परिवार है, जो कहते थे मेरा बेटा मेरे घर की शान है, आज उनका घर खाली पड़ा श्मशान है, बेटियों से ही बढ़ती हर घर की शान है, बेटियाँ ही माता पिता का अभिमान हैं। खुद रहते हैं वो अब वृद्धाश्रम में…

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मेरे प्रथम गुरु

मेरे प्रथम गुरु हर छोटी बड़ी बात वो समझाते हैं प्यार से, कभी किसी गलती पर आंखे दिखाते , कभी हाथ फेरते सर पर मेरे दुलार से, मनुहार से!! जीवन की हर पेचीदगी उनके मार्गदर्शन से ही हल हुए उनकी सही दिशा -दर्शन से निर्बल हौसले मेरे सबल हुए!! तुम केवल कर्ता हो अपने सुकर्म…

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नन्हा शिक्षक

नन्हा शिक्षक लिजिए आंटी जी मुँह मीठा किजिए राज्यस्तरीय हॉकी टीम में सिलेक्ट हो गया आपका छोटू चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान और हाथ में पेड़ा का डिब्बा लिए तेज खड़ा था। गले लगाकर शाबासी देना चाहती थी, माथा चूमने का भी मन हुआ था पर पता नहीं कौन सी अदृश्य शक्ति मुझे ऐसा करने…

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अतिथि एक दिन का

अतिथि एक दिन का अच्छी भली सो रही थी और सपनों में ,पर्वतों के पार दूर कहीं क्षितिज पर सैर कर रही थी कि अचानक ही धीमे से तेज … और भी तेज होती “खट – खट” की आवाज़ ने आराम करती हुई पलकों को जबरदस्ती खोल ही दिया । मैं भी किसी प्रकार उनींदी…

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सौभाग्यवती रहूँ

अमर ज्योति मैं कहां जाऊंगी मैं तो आती रहूंगी यूहीं सांसे टूटने तक अपनी गुनगुनाती रहूंगी यूहीं!! जब भी डूबने को होगा सांझ का ये सूरज, जुगनू बन आंगन में तेरे टिमटिमाती रहूंगी यूहीं… मोल नहीं मांगूंगी कभी अपनी मोहब्बत का, हक अदा करूंगी सदा अपनी इस उल्फत का, बेमोल अपने प्यार को लुटाती रहूंगी…

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मां के सपने

“मां के सपने” कितने सपने संजोए थे तूने, हम सबके संग, कितने सपने थे तुम्हारी आंखों में, कितनी कल्पनाएं थी, तुम्हारे आंखों में चमक, जिन्दगी जीने की ललक, एक उल्लास मन में लिए, सबको संवारा बड़ी लगन से, अपनी सजग नयन से, कई सपने भी टूटे, फिर भी !! तुम मुस्कुराती रही, हम-बच्चों के संग,…

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सच में ‘दुर्गा’ थी इंदिरा !!

सच में ‘दुर्गा’ थी इंदिरा !! वो पर्वत राजा की बेटी ऊंची हो गयी हिमालय से जिसने भारत ऊंचा माना सब धर्मों के देवालय से भूगोल बदलने वाली इतिहास बदलकर चली गई जिससे हर दुश्मन हार गया अपनों के हाथों वो ‘इंदिरा’ छली गई… -हरिओम पंवार इंदिरा गांधी दृष्टिसम्पन्न, ऊजार्वान,तेजस्वी, आत्मविश्वासी और प्रगतिगामी नेता थीं।…

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मां के सपने

मां के सपने कितने सपने संजोए थे तूने, हम सबके संग, कितने सपने थे तुम्हारी आंखों में, कितनी कल्पनाएं थी, तुम्हारे आंखों में चमक, जिन्दगी जीने की ललक, एक उल्लास मन में लिए, सबको संवारा बड़ी लगन से, अपनी सजग नयन से, कई सपने भी टूटे, फिर भी !! तुम मुस्कुराती रही, हम-बच्चों के संग,…

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छठ पूजा विशेषांक

छठ पर्व : भावनाओं का ज्वार पवित्र कार्तिक मास आते ही वातावरण ज्योतिर्मय होने लगता है… शक्तिदायिनी माँ दुर्गा के आगमन के बाद से ही मातृ शक्ति का एक प्रवाह मन की भावनाओ को झंकृत करने लगता है … बंगाल की कोजागरी लक्खी पूजा, काली पूजा, जगद्धात्री पूजा तो अन्य स्थानों पर धन की देवी…

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