सौलह कलाओं वाला चन्द्रमा

सौलह कलाओं वाला चन्द्रमा शरद चांदनी बरसी अंजुरी भर कर पी लो ऊंघ रहे हैँ तारे सिहरी सरसी ओ प्रिय कुमुद ताकते अनझिप क्षणों में तुम भी जी लो @अज्ञेय अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजगरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी…

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मां शारदे

मां शारदे जय मां शारदे,हे मां शारदे, हम सबको शुभ वर दे, विद्या का असीम भंडार भर दे, गागर में सागर भर दे, तू तो ज्ञान का रुप है, अज्ञानता का अंधकार मिटा दे, जीवन को सार्थक कर दे, हम सब सुंदर सृजन करें, संस्कारों से शोभित कर दे, विद्या का वरदान दे, तूने ही…

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हिन्दी दिवस और हिन्दी

हिन्दी दिवस और हिन्दी कहने को राजभाषा है हिन्दी, भारती के भाल की सच में बिन्दी । न मारो माँ को अपने हाथों से, साँसें टूटतीं पर अब तक जिन्दी । छंदों से करती अपना श्रृंगार, पहनकर अद्भुत-अनुपम अलंकार । संगम अगनित भाषा बोलियों का, नव रस से आप्लावित चमत्कार । पहचानो इसमें है अपार…

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छठ महापर्व: बिहार में क्यों?

छठ महापर्व: बिहार में क्यों? वैदिककालीन मध्य भारतवर्ष के कीकट प्रदेश में गयासुर नामक एक दानव रहता था| वह भगवान विष्णु का उपासक था| गयासुर की काया भीमकाय थी| कहते हैं कि, जब गयासुर पृथ्वी पर लेटता था, उसका सर उत्तरी भारत में होता तथा उसके पैर आंध्र क्षेत्र में होते थे| सबसे महत्वपूर्ण यह…

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पथ पे विश्वास चला करता है

पथ पे विश्वास चला करता है   स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये पहला ऐतिहासिक फैसला आया है, जिसने मानव जीवन की अब तक की समस्त मान्यताओं को पुनः परिभाषित कर दिया। एक ऐसा निर्णय जिसके कारण असंख्य ज़िंदगियों की अपनी पहचान स्थापित हो सकेगी। जी हाँ भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते…

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DEFINITENESS OF PURPOSE

DEFINITENESS OF PURPOSE Floating thoughts in reverberations, are gently flickering on the screen of our visions. I’m just downloading a beam of stars and inhaling diamond stream from my heart. Hey, you little boy, pulsing inside here, are you happy to be seen on your purple screen? Or, at least, you’re breathing a misty awakening…

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अंतरराष्ट्रीय वातायन सम्मान-समारोह डॉ. कमल किशोर गोयनका और श्री गीत चतुर्वेदी सम्मानित

  एक शानदार अंतरराष्ट्रीय वातायन सम्मान-समारोह डॉ. कमल किशोर गोयनका और श्री गीत चतुर्वेदी सम्मानित लंदन, 5 फ़रवरी 2022: बसंत महोत्सव पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के तत्वावधान में आयोजित वातायन के अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मान समारोह में प्रख्यात लेखक डॉ कमल किशोर गोयनका जी को वातायन शिखर सम्मान (लाइफ़-टाइम अचीवमेंट) और लोकप्रिय और प्रसिद्ध लेखक गीत…

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लम्हे

लम्हे वक्त की तेज़ रफ़्तार में जिंदगी भले ही भागती रहे, पर कुछ लम्हे यूँ ही एक जगह पर आकर थम जाते हैं, मानों अंगद का पाँव हो, जिसे आप जरा सा भी हिला नहीं पाते अपनी जगह से। कभी सोचा ही नहीं था कि सत्ताइस साल के एक लंबे, व्यस्ततम, भागदौड़ भरे सफर के…

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जीना सिखा दिया इस ‘आफ़ात’ ने मुझे

जीना सिखा दिया इस ‘आफ़ात’ ने मुझे लूटा बहुत है वक्त औ हालात ने मुझे! घायल किया है बस इक़ मुलाकात ने मुझे!! अच्छे कभी थे हम भी जहां की निगाह में बदनाम कर दिया है खुराफात ने मुझे!! अफ़सोस मेरे हाल पे बिल्कुल न तुम करो दी है सज़ा ये मेरी ही अगल़ात ने…

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