मेरे पापा सुपरमैन

मेरे पापा सुपरमैन फादर्स डे पर पापा, चलो मैं एक कविता सुनाती हूं। क्या हो आप हमारे लिए यह दुनिया को बदलाती हूं। हमारे पापा सुपरमैन हर विपदा से लड़ जाते हैं। हो जाए हम वीक तो स्ट्रांग उन्हें हम पाते हैं। घर समाज और रिश्तेदारी बखूबी निभाते हैं। वो हमारे पापा जी, जो माथुर…

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हिंदी है हमारी मातृभाषा

हिंदी है हमारी मातृभाषा नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। चाहे हो जीवन में आशा, चाहे हो मन में निराशा, मिली हर अभिव्यक्ति को परिभाषा इतनी अथाह मेरी मातृभाषा ।। नहीं है यह मात्र एक भाषा, हिंदी है हमारी मातृभाषा ।। हर सपने को शब्दों में बुना , हिंदी भाषा…

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Quarantine

Quarantine Pandemic world is not mine although I drift with it with mask on my face through surroundings possessed by the springtime Isolated I cannot smell the flowers I am not enjoying virtual paradise walk just around the corner of my seclusion Izabela zubko Writer Poland IZABELA ZUBKO – poetess, journalist and translator. She is…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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बचपन: उजला पक्ष

बचपन: उजला पक्ष उम्र के इस पड़ाव पर बचपन याद करना अच्छा लग रहा है। मेरा जन्म अपने बाबा के घर गोरखपुर में हुआ। हमारे बचपन में घर में खाने-पीने की सामग्री भरपूर होती थी मसलन दाल-चावल, आटा, दूध-दही मगर सजावट या प्रदर्शन के नाम पर कुछ नहीं था। हम बहुत अमीर नहीं थे पर…

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हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता

हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता चीन और भारत का बहुत पुराना ऐतिहासिक रिश्ता है। मौर्य काल से नेहरू मोदी तक रिश्तों का सफर रहा है। पहली सहस्राब्दी के दौरान, दोनों ही आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे और 19 वीं सदी के अंत और 20 वीं सदी की…

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हम सुंदर दिखते हैं

हम सुंदर दिखते हैं ट्रिन ट्रिन ट्रिन… मेरी सुबह की शुरुआत ऐसी होती है। सुबह साढ़े छह बजे उठो, गैस पर चाय का पानी चढ़ाओ, उसके खौलने का इंतजार करो। परात में आटा निकालो, उसमें नमक मिलाओ और पानी डालो। फिर उसको धीरे-धीरे गूंथ डालो। चाय का पानी भभक रहा है। चाय की पत्ती डालो।…

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ये गुलाब कब से विदेशी हो गया

ये गुलाब कब से विदेशी हो गया वो किताबों के पन्नों में महकता रहा ताउम्र प्रेमी जोड़े के बीच एक ‘पर्दा’ बना दिलों को जोड़ गया कहीं शेरवानी में और बारात में ‘कली’ बन पिन में लगाया गया कभी गजरे में सजा कभी ‘सेज ‘ पर सजाया गया उम्र भर इसको कभी मन्नतों की चादर…

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गुलाबी आँखें…

गुलाबी आँखें… अच्छा तो आप सोच रहे हैं कि मैं कोई ऐसी प्रेम कहानी कहने जा रही हूँ जिसमें एक लड़का और लड़की होंगे और लड़की के गुलाबी आँखों में लड़का… अरे नहीं, नहीं। चलिए मैं आपको मैं गुलाबी आखों वाली के पास ही लिए चलती हूँ। लेकिन उससे पहले मैं अपना परिचय तो दूँ…

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