खुद को जानती हूँ मैं

“खुद को जानती हूँ मैं” ऐसा नहीं है कि– औरत हूँ तो बस नशा है मुझमें पत्नी हूँ,माँ हूँ,बहन हूँ– इक दुआ है मुझमें… ऐसा नहीं है कि– संगमरमर के साँचे में ढला जिस्म हूँ केवल नमी हूँ,आग हूँ,धरती,आकाश हूँ– जीने के लिए जरूरी हवा हूँ शीतल… ऐसा भी नहीं है कि– बस मुहब्बत, खुशबू,…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की

स्वातंत्र्योत्तर भारत के निर्माण में श्री अजीम प्रेम जी का योगदान स्वातंत्र्योत्तर भारत के निर्माण में श्री अजीम प्रेम जी के योगदान का मूल्यांकन करने के लिए हमें तात्कालिक परिस्थतियों का अवलोकन करना होगा। श्री अजीम प्रेम जी का जन्म 24 जुलाई, 1945 को मुंबई के निजारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था।उस समय…

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कान्हा का मनका

कान्हा का मनका अब तो लौ लागी कान्हा, तेरे श्यामल श्री चरणों में । जन्म जन्म का साथ हमारा, युगों युगों की मेरी प्रीत। बना दे मुझे छोटा सा मनका, चुन ले मुझ को, जड़ ले मुझ को, अपनी रुनझुन पैजनियों में । अब तो लौ लागी कान्हा , तेरे श्यामल श्री चरणों में। औक़ात…

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चाँद जाने कहाँ खो गया

चाँद जाने कहाँ खो गया ग़ुल खिले और कलियाँ हँसीं,बाग फिर ये जवां हो गया तितलियों की जो देखी अदा भँवरों को फ़िर नशा हो गया तेरे होठों ने कुछ न कहा , मुझसे भी तो कहा ना गया। क़िस्सा तेरे मेरे इश्क़ का ख़ुद ब ख़ुद ही बयां हो गया।। एक अहसान मुझ पे…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- रानी गाईदिन्ल्यू

क्रांतिकारी वीरांगना गाईदिन्ल्यू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में अंग्रेज प्रशासन को भयभीत रखने वाली अदम्य साहसी योद्धा के अतुल्य योगदान को नमन। “मैं (रानी) अंग्रेजों के लिए जंगली जानवर के समान थी, इसलिए एक मजबूत रस्सी मेरी कमर से बाँधी गई । दूसरे दिन कोहिमा में मेरे भाई ख्यूशियांग की भी बड़ी क्रूरता से…

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कैसे ठहरता बसन्त

कैसे ठहरता बसन्त बसन्त यहां भी आया था द्वार पर ही थी अनुरागी किसलय से भरी थी अंजुरी लहकती उमंग-तरंग सोमरस से भरे घट, परिणय पल्लवों को छूती मंज़र उन पर बैठी अभिलाषा पिक अभी कुहुक ही रही थी पूरी तरह पंचम स्वर पकड़ी भी नहीं ऊपर कहीं से अनायास निर्विघ्न चक्रवाती तूफान ने घेर…

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मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है

मुख़्तसर सी बात है … तुमसे प्यार है चैत के महीने पहाड़ी क्षेत्रों में घुर-घुर का राग अलापती घुघुती विरह का कोई लोकगीत सा गाती सुनाई पड़ती है। घुघुती हमारे उत्तराखंड की बहुत लोकप्रिय पक्षी है। गौरैया की तरह ही इंसानी आवास के आसपास रहना पसंद करती है। थोड़ा आत्मकेंद्रित भी,कि अगर खाने-पीने के लिए…

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ग्रामीण परिवेश और मुंशी प्रेमचंद

ग्रामीण परिवेश और मुंशी प्रेमचंद गाँव के सजीव, जीवंत और सामयिक चित्रण करने में कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कोई सानी नहीं है। उस समय के परिवेश में गाँव एक अभिन्‍न अंग था व्यक्ति और समाज के जीवन में। कभी-कभी लगता है कि घड़ी को मुंशी प्रेमचंद के समय में मोड़ दिया जाए,…

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