चूड़ियों की खनक

  चूड़ियों की खनक रवि के पैर का उत्साह जैसे हवा से बात कर रहा था।घर जल्दी पहुंचने के लिए उसके पैर आतुर हो रहे थे। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वक्त के साथ हमें यू इतने लम्बे समय तक इस तरह अलग रहना पड़ेगा । पूरे एक वर्ष बाद आज उससे मिल…

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“ मैं भी एक महिला हूं”: सोजॉर्नर ट्रुथ 

“ मैं भी एक महिला हूं”: सोजॉर्नर ट्रुथ  आज जिस महान महिला शख्सियत की हम बात करने जा रहे हैं, उनके व्यक्तित्व के बारे में जब मैंने पहली बार(कोई सात-आठ साल पहले) पढ़ा था। तो उस समय न ही सिर्फ़ मेरे रोंगटे खड़े हो गए, बल्कि साथ ही साथ मन एक अन्जाने गर्व से भर…

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जागृति

जागृति हरसिंगार के छोटे छोटे फूल पेड़ों के नीचे गलीचा से बिछ गए हैं उनके फूलों की भीनी खुशबू से हवा मदमस्त ! और मदमस्त हवा अपने झोंके में गूंजते मंत्रोच्चारण को जैसे झूला झूला रही, दुर्गा मां का आगमन जो हो गया है, ढाक की आवाज आरती मेें बजती घंटियां, पावन कर रही हैं…

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जोखू जिन्दा है

जोखू जिन्दा है अभिजात्य वर्ग का एक युवक ट्रेन में यात्रा कर रहा था। मुंशी प्रेमचंद की कहानियों की किताब में रमा वह “ठाकुर का कुंआ” कहानी पर अटक गया। कहानी पढ़ते-पढ़ते वह असहज होने लगा। गंगी और जोखू उसके भीतर उतरते चले गए। गले मे खुश्की भरने लगी। उसने बैग में पानी की बोतल…

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संवैधानिक उपचारों की छत्रछाया में भारतीय महिलाएं

संवैधानिक उपचारों की छत्रछाया में भारतीय महिलाएं 26 जनवरी, 2021 को देश का 72 वां गणतंत्र दिवस हमने मनाया। वैश्विक महामारी के तहत बदले हुए परिवेश में इस राष्ट्रीय गौरव दिवस को हम सभी ने अपने-अपने दृष्टिकोण से मूल्यांकित किया, ह्रदय में राष्ट्र के प्रति स्थित अपने -अपने श्रद्धा के भाव के अनुपात में व्यवहार…

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नारी !

नारी ! प्रेम और ममता की मूर्ति त्याग और बलिदान का एहसास निज आंचल में समेटे सारी धरती सारा आकाश! जिसकी आंखों में है करुणा सहनशक्ति है जिसकी परिभाषा, निराशा के तम की जो दूर करे नारी ही है वो आशा!! नारी! पहचान है कोमल भावनाओं की तो कभी कठोरता की गर ये जननी है…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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श्रमदान

श्रमदान आधी आबादी करती श्रमदान बिन वेतन ताजमहल यादगार निशानी “कटते हाथ” होते हैं पूरे मजदूरों के हाथों स्वप्न हमारे आनंदबाला शर्मा साहित्यकार जमशेदपुर, झारखंड 0

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प्लास्टिक के फुल

प्लास्टिक के फुल शिखा की आज क्लास नहीं थी। लेकिन तब भी वह आज कॉलेज आई थी। स्टाफरूम में अपना बैग रखकर वह बैठ गई थी। ये ऑल गर्ल्स कॉलेज’ है और ज्यादातर प्राध्यापिकाएँ महिला ही हैं। इकक्‍्का-दुक्का ऑफिस स्टाफ, कम्प्यूटर डाटा विशेषज्ञ और अर्थशाक्त्र के प्रोफेसर डॉ. भगत को छोडकर। जब उसने कॉलेज ज्वाइन…

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