स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण

स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष की तरह 8 मार्च को आ गया | पिछले दिनों भारतीय महिलाओं ने शारीरिक मानसिक ,राजनैतिक आर्थिक सभी दंश झेले हैं | यौन उत्पीड़न का मानसिक त्रास , बलात्कार और घरेलु हिंसा के शारीरिक घाव ,महंगाई की आर्थिक मार , शाहीन बाग़ और दंगों के राजनीतिक…

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भई अपनी तो बस अब हो ली !!

भई अपनी तो बस अब हो ली !! धूल उड़ाना रंग लगाना धमाचौकड़ी खूब मचाना , रंगो से भरी पिचकारी से अपनों गैरों को रंग जाना, अब कहां वो बेफिक्री के रंग कहां अब दिल के हमजोली, अब कहां वो बचपन की होली वो मस्तीखोरी वो हंसी -ठिठोली!! मां के हाथ के वो दही बड़े…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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हिंदी का परचम

हिंदी का परचम वैज्ञानिक आधार परखती निज बल सब सत्कार कमाया जोड़ चली सीमाएँ कुनबा हिंदी ने परचम फहराया सहज सरल उत्तम उच्चारण स्वर व्यंजन रस युक्त मनोहर अर्पित उन्नत पद सम्मानित छवि साहित्यिक मुक्त धरोहर शब्द मधुर संयोजित मुक्ता मायावी हिंदी की काया जोड़ चली ….. कोस कोस पर पानी बदले दशम कोस पर…

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हम स्वतंत्र हैं

हम स्वतंत्र हैं हम स्वतंत्र हैं…. क्योंकि….. प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस…. हर्षोल्लास से मना रहे हैं। सड़कें गड्ढों से पटी पड़ी तो क्या??? रेल-बस ठसाठस भरी हुई तो क्या??? बुलेट ट्रेन तो आ रही है हम स्वतंत्र हैं… गरीबी, अशिक्षा, मंहगाई अब बहुरूपिये हो चले, सरकारी आंकड़ों में… नज़र ना आएंगे… वैसे यत्र-तत्र-सर्वत्र नज़र ही नज़र…

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हाजी मियां

हाजी मियां   उनका नाम हाजी मियां था, पर उन्होंने कभी हज नहीं किया था । गरीबी की मिट्टी में पले उनके परिवार की एक ही तीर्थयात्रा थी ,रोटी का इंतजाम। शायद इसी स्थिति को भांप कर , उनकी दादी ने उनका नाम ‘हाजी’ रख दिया था , ताकि नाम सुनकर ही घर में काबा…

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डॉ. अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर अंबेडकर एवं भारतीय संसदीय प्रणाली पर उनके विचार !! अंबेडकर ने कहा था कि भक्ति या नायक पूजा शर्तिया तौर पर पतन और उसके संभावित तानाशाही की ओर ही ले जाती है। भारत में भक्त होना आसान है समझदार होना मुश्किल है। क्या इस देश में भूख, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक असामनता जैसे ज्वलंत…

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जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स

जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स (4 फ़रवरी 1913 – 24 अक्टूबर 2005) अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने “द फ़र्स्ट लेडी ऑफ़ सिविल राइट्स” (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और “द मदर ऑफ़ द फ्रीडम मूवमेंट” (आज़ादी लहर की माँ) नामों से पुकारा। रोजा पार्क्स…

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संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का

संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का बचपन में पांचवीं, छटी से ही पुस्तकों में दिनकर, महादेवी वर्मा,मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जिनके नाम का तिराहा आज भी है, डॉ राम कुमार वर्मा, हरिवंश राय बच्चन जी जो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के “अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट , फ़िराक़ गोरखपुरी जी भी अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट के हेड रहे पर दोनों…

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