जीवन का मंत्र है प्रेम

जीवन का मंत्र है प्रेम प्रेम, प्रतीक है जीवन का मंत्र है आत्मवैभव का। प्रेम का कोई भी संबंध, वासना से नहीं, पृथक है,वासना! प्रेम की शर्तें नहीं उम्र,जाति, मज़हब या ,सामाजिक बंधन भी नहीं! प्रतिदान,प्रेम का सिर्फ प्रेम ही है, वस्तु या…….. दैहिक, सांसारिक ……कुछ भी नहीं! प्रेम देश से,प्रेम मातृभूमि से और माँ…

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अपनी बात

अपनी बात मन के दरवाजों पर मेरे सपनो की पहली दस्तक थीं मेरी कवितायेँ ..न जाने कहाँ कहाँ ,किन अनजानी गलियों से गुजर कर जीवन की यात्रा तय करती रहीं मेरे साथ साथ ….उम्र के पड़ावों को पार करती ,संघर्षों के शैल शिखरों को विजित करती …वे पलती रहीं मेरे अंतर्मन की गहराईयों में …पर…

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बसंत बहार

बसंत बहार पीली सरसों पीले खेत बसन्ती छटा में रंगा धरती का परिवेश पवन सुगन्धित मन आह्लादित बसंत बहार सुनाये रे… पतंग रंगा, नीला आकाश “वो काटा” से गूंजा जाए अमराई बौरें झूम झूम डोलें मन मयूर बहका जाए रे… सरस्वती पूजन मन्त्रोच्चारण, कानों में शहद सा घुलता जाए हिय हुलसै,मन उडे बचपन की गलियों…

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मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम

मानवता की सेवा में सन्नद्ध–कर्मवीरों के नाम है नमन तुम्हे मानवता हित जीवन अर्पित करने वालों सेवा से संकट मोचक बन हमको गर्वित करने वालों हर जंग जहां जीती हमने दुश्मन को धूल चटाई है संक्रामकता -निशिचर के दमन की कसम उठाई है है नमन तुम्हे खतरों से भी आंधी बन टकराने वालों है नमन…

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डॉ जसबीर कौर की कविताएं

डॉ जसबीर कौर की कविताएं 1.नारियां मानवता का गौरव, वात्सल्य प्रेम सौरभ, सृजन की मृदुल परिभाषा हैं ये नारियां सहिष्णुता को निहित कर, शक्ति पराकाष्ठा बन अद्भुत करूणाकलित अभिलाषा हैं ये नारियां। मानवता का गौरव…..   जीवन सुरभित करें , प्रेम सानिध्य बन पीयूष शक्ति सी ,जग उत्थान करें नारियां ईश की ये प्रतिध्वनि, धर…

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क्यों हिंदी

क्यों हिंदी क्यों भाषा सुंदर भाती नही कतराते हैं सोचने की बात पले हैं बोल हिंदी है कुष्ट संकीर्ण मानसिक विचार दिखे क्यों होये सोचे करे सम्मान हिंदी हो घर शिक्षा हो मान उपयोग सोच विचार देवनागरी है मीठी भाषा है हिंदी है हिंदी सदियों मनोहर सदियों से नकल करें लोग गर्व करें हिंदी छोड़…

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मैं “बुद्ध” न बन पाई

मैं “बुद्ध” न बन पाई आसान था तुम्हारे लिए सब जिम्मेदारियों से मुहँ मोड़, बुद्ध हो जाना , क्यूंकि पुरुष थे तुम। एक स्त्री होकर बुद्ध बनते, तो जानती मैं । जिस दिन “मैं” के अन्तर्द्धन्द पर विजय मिल जाएगी निर्वाण की राह भी बेहद सुगम हो जाएगी। सब त्याग कर तुमने उस “मैं” पर…

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मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश

मादक संगीत में डूबा वासंती संदेश मैं अपनी कर्मस्थली की ओर गतियमान देखती जाती हूं, प्रकृति के खुले आंगन में, अनेकों की संख्या में खड़े , पत्र विहिन शाखाओं को धारण किए हुए महुआ के वृक्षों को। मानो बांहें फैलाए खड़े हों, अपनी प्रेयसी के इंतजार में। पत्तियाँ सूख कर ताम्रपत्र बन गई हैं और…

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