एक पेड़ लगाएं

एक पेड़ लगाएं जीवन निर्भर जिस प्रकृति पर उसका ही किया अपमान देखो मानव तुमने कैसा किया अपना ही नुकसान विपदा का कारण तुम हो,तुम ही हो वह मनुष्य महान प्रकृति से किया छेड़छाड़ अब क्यों दे वो तुम्हें मान अब तो समझो प्रकृति का संदेश तुमने किया गलत है काम मानव अब तो बदलो…

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बासी परांठा, दालमोठ-चाय और बालकनी का एक कोना

बासी परांठा, दालमोठ-चाय और बालकनी का एक कोना मेरी जिन्दगी की सबसे ज्यादा प्रिय चीजों में, बासी परांठा, दालमोठ-चाय और बालकनी का यह कोना शुमार है। जब भी मैं उदास होती हूँ या फिर बहुत खुश…… किसी से फोन पर बात करनी हो या चुपचाप ग़ालिब की ग़ज़ल आबिदा परवीन की आवाज़ में सुननी हो…

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किश्ती और तूफ़ान

किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…

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मुक्ति

मुक्ति नन्हीं के गांव में एक घर के आगे बड़ा-सा खलिहान था । शाम के समय उसके सारे संगी-साथी वहां जमा होकर खेलते थे। खलिहान वाले घर की लड़की भी उन बच्चों में शामिल थी। नाम था गंगा। गंगा उम्र में सब बच्चों से बड़ी थी। रिश्ते में वह किसी की बुआ लगती थी तो…

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हेयर केयर- मानसून

गर्मी के बाद मानसून वाला मौसम सभी को बहुत सुहाना और रोमेंटिक लगता है। इस बारिश को देखते ही इसमें भीगने का मन करता है। लेकिन बारिश में भीगने से बालों को काफी नुकसान पहुंचता है क्योंकि यह मौसम बहुत चिपचिपा और ऑयली होता है। इसमें बाल बहुत जल्दी गंदे और ऑयली हो जाते हैं।…

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ज़िंदगी के रहस्य समेटे है “तिलिस्म”

ज़िंदगी के रहस्य समेटे है “तिलिस्म” साहित्यकार की सफलता इस बात में होती है कि वह अपने प्लॉट का चयन कितने विवेकपूर्ण ढंग से करता है, अपने कथा परिवेश का कितना सजीव वर्णन करता है, अपने पात्रों को कितना जीवंत बनाता है, और अपने उद्देश्य को अभिव्यक्त करने में कितना प्रभावी होता है। अगर हम…

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कोरोना और जीवनशैली

कोरोना और जीवनशैली मनुष्य की जीवनशैली का इतिहास बहुत ही प्राचीन है।आदि मानव से लेकर आज तक मनुष्य ने जीवन की जुगुप्सा और जिज्ञासा की आग में अनेकानेक संघर्षों की आहुति दी है।जीवन की यात्रा जिजीविषा का पर्याय है।मनुष्य का जीवन अन्य प्राणियों से भिन्न है यह आदिकाल में ही स्पष्ट हो गया था,जब मनुष्य…

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दुविधा’

‘दुविधा’ आज है नारी दिवस सुबह से ही लगा है तांता बधाई संदेशों का पर मैं हो रही हूँ दो चार दुविधा से मौका खुशी का है या फिर गम का नही कर पा रही तय मैं जब झांकती हूँ भूतकाल में देखती हूँ तृप्ता , मरियम, यशोदा, जीजा बाई होती हूॅ गर्वित कि मैं…

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पर्यावरण और त्योहार

“पर्यावरण और त्योहार “ डरे सहमे से पेड़-पौधे जा पहुंचे मानव के पास दीपावली करीब आ गई तो उनकी थीं शिकायतें खास.. पत्ते, शाखाएं, फूल और कलियाँ सबके सब कुछ घबराए थे नन्ही घास,बेलें, लताएँ, फल मुँह बनाए और गुस्साए थे-.. “हर तरफ दीवाली की खुशियाँ हैं पर हम सब सहमे से खड़े हैं अजीब…

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मैं तेरी परछाई सब कहते हैं।

मैं तेरी परछाई सब कहते हैं। मैं तेरी ही परछाई हूं मेरी माँ! ऐसा सब कहते हैं पर यह कैसे संभव है माँ! मैं तेरी परछाई, कैसे हो सकती हूँ माँ ? बिना पलक झपकाए, जग कर सारी सारी रातें, मैं ने कभी तुम्हारी सेवा की है क्या माँ ? नहीं ना? फिर मैं तेरी…

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