FESTIVAL OF LIGHTS

FESTIVAL OF LIGHTS Diwali the most awaited Hindu festival, Celebrated with lights,family reunion treats, Auspicious prosperity, Joyful activities, Shopping clothes,eatables, gifts, sweets. The one thing we forget is our own country, Blindly purchase lamps,tea candles for divinity, L.E.D. light strings,crackers,plastic facilities, Forget all that money goes to other country’s treasury. Diwali was to be celebrated…

Read More

उल्टा पुराण

उल्टा पुराण नेहा शादी कर जब पहली बार अपनी ससुराल आई ,तब उसे पता चला उसके ससुराल वालों का विचार उससे कितना भिन्न है। नेहा अपनी माँ बाप की इकलौती संतान थी। यौवन के दहलीज पर वो कदम रखी ही थी, कि उसकी शादी हो गई। दरअसल एक अच्छा खाते पीते घर का लड़का उसके…

Read More

हम सबके थे प्यारे बापू

हम सबके थे प्यारे बापू राम और कृष्ण के बाद शायद गांधी ही हैं जिन्हें भारत ने आज भी अपनी चेतना में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जीवित रखा है, आदर्श और अपना बापू माना है । एक पिता की तरह उन्होंने 300 साल से पराधीन और अपंगु भारतीय चेतना के कानों में सत्य और…

Read More

वे सड़कें बना रहे हैं..

वे सड़कें बना रहे हैं.. गर्म तपती भट्ठियों सी , तप्त सड़कों पर कोलतार की धार गिराते , मजदूरों के झुलस रहे हैं पाँव. पर तपती धरती पर, गिट्टियां बिछाते, मानो स्नेह का लेप लगा रहे हैं, वे सड़कें बना रहे हैं. गर्म जलाते टायरों का , फैलता है धुंआ ,आग उगलता, जला रहा है…

Read More

अरुण कुमार जैन की कविताएं 

अरुण कुमार जैन की कविताएं  प्रकृति के साथ पत्थरों और पहाड़ों से कौन सर फोड़ना चाहता है बस पहाड़ों के नाम से हर कोई मुंह मोड़ना चाहता है मगर कभी देखो जाकर उन पहाड़ों की तस्वीर समझो कभी उनकी तासीर मौसम बदलते रंग और नजारे पहाड़ों के साए में बहती नदी उनके ऊपर से बहते…

Read More

आया नया साल है/कैसे मैं कहूं आजाद वतन

        आया नया साल है आओ जरा झूमें गाएं आया नया साल है। खो गया है नेह राग ये बड़ा सवाल है, प्रीत जरा बांटिए जनता बेहाल है। द्वेष जरा छांटिए समाज का ये काल है, आओ जरा झुमें गाएं आया नया साल है।   कविता ही कामिनी को विषय बनाइए, दामिनी…

Read More

लौट आया मधुमास

लौट आया मधुमास देविका कहीं शून्य में घूरे जा रही थी लेकिन मस्तिष्क में लगातार उथल-पुथल चल रही थी। आज हर हालत में उसे एक निर्णय पर पहुंचना था। पिछले कई दिनों से वह अनवरत दिल और दिमाग के संघर्ष में बुरी तरह फंसी थी,उलझी थी….पर अब…अब और नहीं।कहीं दूर से आती माँ की आवाज़…

Read More

गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे

गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे.. अगर समझना चाहते हैं, गांधी को तो, झांकिए अपने अंतरात्मा के ओट मे… गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे… सत्य को अब और कब तक? पढ़ते -पढ़ाते रहेंगे पुस्तकों में… एक बार, सत्य को आने तो दीजिए, अपने आचरण व्यवहार मे.. मुस्कुराते दिखेंगे गांधी, अंतरात्मा की ओट मे …….

Read More

IN THE NAME OF SPARROW

IN THE NAME OF SPARROW Yes, they were integral part of domestic life in a family of Orientation ,ever since one gained consciousness. In the course of primary socialisation during the formative years,it was a common sight to see these cute,harmless,flying creatures,chirping, jumping and producing soothing sound in the courtyard. Of course,Crows too would come…

Read More