नया सफर 

नया सफर  राधा ने नए शहर में अपनी नई नौकरी के पहले दिन के लिए खुद को तैयार किया। बचपन में पिता के निधन के बाद, उसकी माँ ने उसे अकेले पाला था। रिश्तों का उसका अनुभव सीमित था। समुद्र तट पर बसे इस छोटे से शहर में एक वृद्धाश्रम था, जिसका नाम था ‘शांतिवन’…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राजा राम मोहन राय

नवजागरण युग के पितामह- राजा राम मोहन राय राजा राम मोहन राय 18 वी सदी के महापुरुष,आधुनिक समाज के जन्मदाता,ब्रह्म समाज के संस्थापक,देश को जगाने वाले स्वतंत्रता सेनानी,बहुआयामी समाज सेवी, भारत भाषायी प्रेस प्रवर्तक तथा बंगाल के नवजागरण युग के पितामह। स्वर्गीय राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को राधा नगर जिला मुर्शिदाबाद,…

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कैसे रहा जाएं बी पॉजिटिव

कैसे रहा जाएं बी पॉजिटिव व्यथित मन परमात्मा की क्रूर करनी के आगे लाचार हूं,आहत हूं और उसकी निष्ठुरता से बेहद नाराज भी हूँ कि ऐसा क्यों किया। रोज इतने जनों को एक-एक कर जाते हुए देख कर, सुन कर मन मे न चाहते हुए भी निराशा आ ही जाती थी,पर थोड़ी देर बाद सोचती…

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खुसरो दरिया प्रेम का…

खुसरो दरिया प्रेम का… हर जानी-अनजानी, प्रेम कहानी, तुम जानो या मैं जानूँ की तर्ज पर एक निजी कहानी है। हर दार्शनिक, हर कवि, हर व्यक्ति ने इसे अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश की है, समझना चाहा है। क्या है आखिर कई कई अहसासों से भरा यह सतरंगी प्रेम? महज एक आकर्षण जो ईर्षा,…

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अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

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प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना 

प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना  हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…

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महिला दिवस के बहाने..

महिला दिवस के बहाने.. तू जिन्दगी का कोमल अहसास है, छुएँ तुझे तो सारा आकाश है, लगती किसी कविता सी, मन के बहुत पास कोई ,अधूरी प्यास हो तुम घर, अंगना दौड़ती ममता की छाँव बनी तुम, माँ हो, प्रिया, बहन, पत्नी, बेटी मेरी, जिन्दगी के टूटते संबंधों में , संजीवनी सी रिश्तों की सांस…

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उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है

उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ? सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोता क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ?…

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