जन्मकुंडली बनाम मानव चोला

जन्मकुंडली बनाम मानव चोला अद्भुत है यह मानव चोला। और उससे भी अद्भुत हैं यह ज़िंदगी। हमें ज़िंदगी का राज़ पाने के लिए ज़िंदगी को ज़िंदगी से जोड़े रखना होता है। इसी जोड़ के लिए ज्योतिष विज्ञान में जन्मपत्रिका, एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य निभाती है। यहाँ कुछ प्रश्न उत्पन्न होते हैं- जैसे…

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आज़ाद भारत में नारियों की आज़ादी कितनी?

आज़ाद भारत में नारियों की आज़ादी कितनी? डॉ भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन में नया संविधान बन कर तैयार हुआ जिसमे सदस्य माननीय जवाहर लाल नेहरू सरदार बल्लभ भाई पटेल,मौलाना अबुल क़लाम आज़ाद थे। भारतीय संविधान को सभा द्वारा 26 जनवरी 1949 को अपनाया गया था लेकिन लागू…

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तुम पास नही फिर भी पास हो

मेरी माँ, माँ तुम पास नही फिर भी पास हो, माँ तुम हमेशा उस जहां में भी जा कर मेरे पास हो, तुम्हे क्या लिखूं माँ आपने हमे लिखा है। मैं कभी सोची ही नही थी एक दिन मैं आपसे कभी दूर जाउंगी मुझे याद है वो दिन जब मेरी शादी ठीक हुई थी और…

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मैं आप की बेटी हूँ

मैं आपकी बेटी हूँ मैं उन सब बेटियों की तरफ से लिख रही हूँ जिन्हें अपनी बात रखने का कभी मौका नहीं मिला। कभी संकोचवश, कभी आदतन। घर की दहलीज के भीतर रहने वाली बेटियाँ, कदमताल पर आगे चलने वाली बेटियाँ — कुछ व्यथाएँ अनकही रह गई। लेकिन बाबा, अब्बू, बाबू जी, पापा की लाड़ली…

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जीवन के अस्मरणीय पल

जीवन के अस्मरणीय पल समकालीन हिंदी लेखन जगत के एक अग्रणी हस्ताक्षर ममता कालिया जी को कौन नहीं जानता। उनसे मेरा सम्बंध मेरी पहली कहानी ‘वे चार पराँठे‘ से जुड़ा है।यह कहानी जुलाई 2007 में ममता कलिया जी तथा रविंद्र कलिया जी की बिर्मिंघम के एक कहानी कार्यशाला से ऊपजी थी। कार्यशाला पूरे वीकेंड की…

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सेवानिवृत्त

सेवानिवृत्त   “कनिका एक गिलास पानी लाना। आज बहुत थक गया हूँ ।” सोफ़े पर बैग रखते हुए युग ने अपनी पत्नी से कहा । “आप बैठिए । अभी लाई ।” कनिका ने युग से कहा । कनिका ने ट्रे में रखे पानी के गिलास और सोनपापड़ी को आगे बढ़ाते हुए युग से कहा, “…

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कटहल

कटहल राम प्रसाद जी का परिवार बनारस शहर के प्रसिद्ध रामघाट पर गंगा जी के किनारे स्थित पक्का महाल सिंधिया हाउस के पुरानी हवेली के दो कमरों में किराए पर रहते थे।उनके परिवार में पत्नी बेटा ,बहू तथा छोटा नाती कुल पांच लोगों का परिवार था।उस समय लोगों में बहुत एकता,प्रेम, भाईचारा व अपनापन हुआ…

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