लौ बन कर मैं जलती हूँ 

लौ बन कर मैं जलती हूँ      दीपक बन जाएँ यादें पुरानी लौ बन कर मैं जलती हूँ दो हज़ार बाईस बस था जैसा भी था जैसे तैसे बीत गया कुछ अच्छा होने की आशा में ना जाने क्या क्या रीत गया पाँव पखारूँ अश्रू के गंगाजल से ,लो अब मैं चलती हूँ दीपक…

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अयोध्या

अयोध्या राम लल्ला को उनकी जन्मभूमि मिल गई और भारत को उसका सुकून। खुरच-खुरच के दर्दीली बन गई चमड़ी साफ, सुथरी और सुंदर हो गई। प्रजातंत्र है भई! देर लग सकती है पर काम हो जाता है। ज़मीन के नीचे छुपे तथ्यों को खींच कर ऊपर लाने की ज़रूरत थी। फ़ायदा ये हुआ कि अब…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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An Unsolved Puzzle

An Unsolved Puzzle (This story is inspired by real events but the characters are imaginary.) “Please sit down Mrs Chaudhary”, the genial senior psychiatrist in the Ranchi Mental Hospital was inviting Latika Chaudhary – an inmate of the asylum – to come in and make herself comfortable. I found an elegant woman in her mid…

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कैसे लिखूं तुम्हें मैं

कैसे लिखूं तुम्हें मैं कैसे लिखूं तुम्हें मैं, कैसी तस्वीर बनाऊँ? मन और काय की भाषा, परिभाषा लिख न पाऊँ। उंगली थाम सिखाया चलना, सतपथ की दिशा बताई। साहस नित ही रहे बढ़ाते, तुमने जीत की राह दिखाई। हर कठिनाई सरल बनी, हर सम्भव हल बतलाया। संस्कार भरे संस्कृति सिखलाई, स्वाभिमान का अर्थ बताया।। उसी…

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एक शिक्षिका ऐसी भी

एक शिक्षिका ऐसी भी बात उन दिनों की है जब मेरी नियुक्ति मुम्बई के एक प्रसिद्ध कनिष्ठ महाविद्यालय में हुई थी।परिवार,दोस्त,रिश्तेदार सभी प्रसन्न थे कि सरकारी नौकरी मिल गयी,अब जिंदगी आराम से गुजरेगी।काम हो ना हो,तनख्वाह तो शुरू ही रहेगी।आज भी सरकारी नौकरी के प्रति लोगों की मानसिकता में अधिक अन्तर या बदलाव नहीं आया…

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मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज

‘मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज’ इंसान की विनम्रता है कि पंचतत्त्वों से निर्मित अपने शरीर को वह मिट्टी मानता है,अपने आराध्यों की कल्पना भी वह मिट्टी से ही साकार करता है,किंतु इन मूर्तियों के लिए मिट्टी एकत्रित करना खासा मुश्किल भरा काम है। नवरात्र में जगतजननी मां दुर्गा की मूर्ति के लिए दस…

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माँ

(माँ…) नौ महीने माँ के गर्भ में एक ख्वाब पनपता है मन्द मन्द पल दिन और महीने माँ का सुखद वज़ूद साकार होता है. 🌱 गुजरना वो नौ महीने का आह !! वो पहला !!! …अहसास सकुं भरा.. दुसरा उलझनों का सहना.. अपने होने का अहसास दिलाना.. हर चेहरे पर नई खुशी भर जाना. गर्भ…

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