मानवाधिकारों का संरक्षण – बड़ी चुनौती

मानवाधिकारों का संरक्षण – बड़ी चुनौती मानव, मानवता और मानव अधिकारों का संरक्षण आधुनिक समय में ऐसे विषय हैं ,जिन परबुद्धिजीवियों , विचारकों , समाज सेवियों का एक बड़ा समूह बड़े गर्व के भाव के साथ ही अपनी गहरी चिंता व्यक्त करता हुआ दिखाई देता है । विश्व में विभिन्न अवसरों पर होने वाले शिखर…

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बड़ी बहू

बड़ी बहू “अरे सुनती हो अम्मा! सोनू मोनू के लिए बड़ा अच्छा रिश्ता मिल रहा है।” राम प्रसाद जी ने मां को बड़ी प्रसन्नता से बताया। उनका एक एक अंग उनकी प्रसन्नता को प्रकट कर रहा था। मां अपनी बहू को आंख के इशारे से पास में बुलाती हुई बोली,”अरे किसने बताया है रिश्ता और…

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पिता

पिता देखा है बचपन से कैसे अपनी हर ख्वाहिश को छिपा कर हम भाई बहन को दी हर सुख की छांव कभी न रुके न थके कभी न कहीं गए कभी न कोई छुट्टी बस काम और बस काम अच्छी से अच्छी शिक्षा खान पान ,पहनावा रखा हम भाई बहन का कर खुद के लिए…

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प्रतिबंध

प्रतिबंध बेटियां खिलखिलाती रहनी चाहिए बेटियों के खिलखिलाने से बसते हैं घर बेटियां मुस्कुराती रहनी चाहिए बेटियों के मुस्कुराने से बसते हैं घर.. पर बेटियों को खुलकर मुस्कुराने या फिर खिलखिलाने की इजाज़त ही कब थी? लड़कियां यू़ँ बिना बात के खीं खीं करती अच्छी नहीं लगती यहीं तो कहते रहे मां बापू चुनिया और…

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कफन

कफन उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी के, सभी उपन्यास,कहानियाँ वक्त की नब्ज को पकड़ कर लिखी गईं है।समाज का दर्पण हैं।यूँ तो मुंशी जी की सभी रचनायें अप्रतिम हैं,लेकिन जब किसी एक की पसंद का बात हो तो यकायक बिजली सी कौंध जाती है,स्मृति पटल पर वह रचना,जो किसानों के शोषण,साहूकार,जमींदारों के प्रभुत्व को दर्शाने के…

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हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद ।

हिंदी भाषा काः हिन्दुस्तानियों से संवाद । अभी तो मेरे अच्छे दिन हैं । काश ये सपना टूटे ना, हिन्दी पखवाड़ा बीते ना। अभी ही तो होंगे, काव्य गोष्ठी और पुस्तक विमोचन, और ना जाने कितने कितने? कार्यक्रमों के आयोजन । नेता हो या अभिनेता, सब अभी ही तो हिन्दी बोलेंगे, कानों में मिसरी घोलेंगे।…

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देश पर बदनुमा दाग ; कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन

देश पर बदनुमा दाग ; कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन अखंड भारत पर ग्रहण उसी समय लग चुका था जब 1947 में नेहरू जैसे रहनुमाओं ने कश्मीर को अलग से संविधान की सुविधा के रूप में 370 धारा जैसा कोढ़ दे दिया। इसी का लाभ उठाकर मजहब के नाम पर अलग होने वाले कुछ…

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चाय दिवस की बधाई

चाय दिवस की बधाई न मौसम न पहर न दुनिया की खबर ! ठहाकों की उधर उठती गिरती लहर इथर ठुनकना मुनिया का बिन बात पर.. वो बहाने से पसरना किसी का बिछावन किसी का जमीन पर! न खत्म होने वाले किस्से चौके में आज पकते पकवान औ सियासत की बहसबाजी पर.. फिल्मों की रूमानी…

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स्पेशल-वार्ड

स्पेशल-वार्ड “दीदी, माँ आएगी न….माँ मेरे पास क्यों नहीं आती?….. मुझे बहुत दर्द हो रहा है….. मुझे उसके बिना नींद नहीं आती.” पांच साल का नन्हा रोहित अस्पताल के स्पेशल-वार्ड के बेड नंबर ग्यारह पर पड़ा, आने-जाने वाली हर नर्स से यही सवाल करता, फिर सुबक-सुबक कर रोने लगता. अस्पताल के उस स्पेशल वार्ड की…

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पर्यावरण और त्योहार

“पर्यावरण और त्योहार “ डरे सहमे से पेड़-पौधे जा पहुंचे मानव के पास दीपावली करीब आ गई तो उनकी थीं शिकायतें खास.. पत्ते, शाखाएं, फूल और कलियाँ सबके सब कुछ घबराए थे नन्ही घास,बेलें, लताएँ, फल मुँह बनाए और गुस्साए थे-.. “हर तरफ दीवाली की खुशियाँ हैं पर हम सब सहमे से खड़े हैं अजीब…

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