सब माया है

सब माया है वह अकेला रह गया था। सोने के पिंजरे और सोने की कुर्सी पर बैठा ‘अकेला आदमी’। वह हमेशा से अकेला नहीं था। अपने भरे पूरे परिवार में पांच बहनों के बीच इकलौता भाई सबका लाड़ला था। पिता थोड़े कड़क स्वभाव के थे, सो बच्चों और पिता के बीच हमेशा एक कम्युनिकेशन गैप…

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कोरोना के बाद की दुनिया

कोरोना के बाद की दुनिया पिछली सदी के दो विनाशक महायुद्धों ने हमारी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक बदला था। विश्व इतिहास में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है जिसने राजनीति और अर्थतन्त्र के साथ लोगों का जीवन और जीने के तरीके भी बदल दिए हैं। महामारियां पहले भी आती रही…

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दधीचि के देश में

दधीचि के देश में देश युद्धस्तर पर कोरोनावायरस से लड़ रहा है।पूरे देश में आज लगभग सवा दो करोड़ लोग जो अलग-अलग स्तर के संक्रमण से गुजर रहे हैं, हमारी मदद और सकारात्मक पहल की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं, उन्हें इनकी बहुत आवश्यकता भी है। इस बीमारी के बदलते स्वरूप और…

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दस्तखत

दस्तखत   शाम के चार बज रहे थे। इस वक्त मेरे घर का बरामदा बच्चों से गुलजार रहता है। मैं बरामदें में आई तो देखी बच्चे उधम मचा रहे थे। दरी उन्होंने बिछा ली थी। मैं कुर्सी पर बैठ गयी और उन्हें शांत रहने के लिए कहा। रेखा की शरारतें जारी थीं। रेखा सबसे ज्यादा…

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जीवनादर्शों के मसीहा: लाल बहादुर शास्त्री

जीवनादर्शों के मसीहा: लाल बहादुर शास्त्री “जय जवान, जय किसान” का उद्घोष, चहुँ दिशाओं में गुंजित करने वाला। अपने छोटे -सधे डग में भी, अदम्य साहस संचित करने वाला।। जिसकी सादगी और सरलता ही, उसकी राजनीति का सिद्धांत बनी। कैसे कह दें हम कि शासन -प्रशासन, और षड्यंत्रों की हमेशा गहरी छनी।। विकट परिस्थितियों के…

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शिक्षा – क्या और क्यों

शिक्षा – क्या और क्यों इसी वर्ष जनवरी के महीने में एक अन्तरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस के दौरान नागालैंड के राज्यपाल पी बी आचार्य को सुनने का मौका मिला । अपने संभाषण के दौरान उन्होंने जो एक बहुत गूढ बात कही वो ये थी कि ” शिक्षित वो नहीं जिसके हाथ में सर्टिफिकेट का भंडार हो बल्कि…

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मार्गरेट मीड

मार्गरेट मीड सर्वविदित है कि मानव से अधिक अस्थिर मति, विविध क्रिया कलापों में व्यस्तता एवं परिवर्तित मानसिकता जैसा अन्य कोई जीव पृथ्वी पर नहीं।समय समय पर मानवशास्त्रियों ने अनेक अध्ययन और सर्वेक्षण भी किये थे,जिनके भिन्न परिणाम सामने आये थे। मार्गरेट मीड एक ऐसी मानवशास्त्री, जिन के महान व्यक्तित्व ने उन का कद इतना…

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एक नई सुबह

एक नई सुबह माना गहरा है रात का अंधियारा, है घोर तमस, नहीं गगन में एक भी तारा, छुप गया चाँद भी, ग़मों की बदलियों में, सुबक पड़ी चांदनी, बादलों का लेकर सहारा। माना तूने खोया प्यार जीवन का, कहां गया वह हँसता चेहरा, वह मीठी बातें, वह साथ तुम्हारा। इस बेरहम महामारी ने, तोड़…

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पुत्री को पत्र

पुत्री को पत्र प्रिय तान्या खुश रहो कुछ दिनों से देख रही हूँ तुम बीच बीच में बहुत भावुक हो जाती हो।कल ही तुमने बातों बातों में मुझसे कहा कि माँ कभी-कभी लगता है मैं तुम्हारेजैसी होती जा रही हूँ। अब तो वही सब करने लगी हूँ जिनका मैं कभी मजाक बनाया करती थी। माँ तुम्हारा…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिंदी हमारी भाषा हैं। हिंद की परिभाषा हैं। हिन्दी हमारी संस्कृति हैं। संस्कार का सुविचार हैं पहले तो थी दबी-दबी सी। अब सिर ताने खड़ी हैं। सहमी सी हिंदी मेरी। आज सरपट दौड़ रही हैं। राह अपनी खुद बनाती, समृद्ध हो रही भाषा हैं। जुड़ रही है हिन्दी हमारी नई टेक्नोलॉजी से। क्षेत्रों…

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