मज़दूर

मज़दूर हालातों से होकर मजबूर ही बनता है कोई मज़दूर पेट की आग बुझाने को ही रहता है घर से कोसों दूर करता है मेहनत इतनी पड़ जाते हैं छाले हाथ पांवों में रहता है फिर भी वो सदा तनाव और अभावों में गर इस जहां में मज़दूर ना कोई होता ना होती गगनचुंबी इमारतें…

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माँ

मां ममता,प्रेम, समर्पण,स्नेहिल संबंधों का आधार हो मां माया,ममता,खुशियां और शीतल छांव तुम हो मां तुम हो मां तो सारी खुशियां सारी मिल जाती है मां की छाया में आकर शीतल छांव मिल जाती है तेरी आलिंगन में आकर मां दर्द सारा मिट जाता है मैं से हम होकर ये दिल सचमुच खिल जाता है…

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विकास का प्रयास 

  विकास का प्रयास कॉग्रेस के 65 साल सरकार के बाद भी देश बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा और कुपोषण से ग्रस्त था देश। लेकिन हमारी सरकार जब से आई ,बेरोजगारी दूर करने के लिए स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा लोन योजना, कौशल विकास जैसे योजनाओं को लागू कर युवाओं को प्रशिक्षित कर स्वयं रोजगार पैदा कर बेरोजगारी दूर…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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हँसी बेगम बेलिया

  हँसी बेगम बेलिया ज़िद में ही मौसम ने हवाओं को छू लिया हरे-हरे पातों में हँसी बेगम बेलिया सड़कों पर चिड़ियाएँ पेड़ से नहीं उतरीं खाली पाँवों चलती धूप भी नहीं ठहरी साथ रहती समय के नहीं कुछ भी किया चाँदनी में भींगी पानी नाली नदियाँ रिश्ता ही बनाती है ये आती जो सदियाँ…

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देह से इतर स्त्री ……….!!

देह से इतर स्त्री ……….!! एंगेल्स ने कहा है कि मातृसत्ता से पितृसत्तात्मक समाज का अवतरण वास्तव में स्त्री जाति की सबसे बड़ी हार है। मानविकीविज्ञान शास्त्र (Anthropology) के विचारक ‘लेविस्त्रास’ ने आदिम समाज का अध्ययन करने के बाद कहा-‘सत्ता चाहे सार्वजनिक हो या सामाजिक, वह हमेशा पुरुष के हाथ में रही है। स्त्री हमेशा…

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 चूड़ी वाले हाथ   

 चूड़ी वाले हाथ      रायदा….. 25 या 30 खपड़ैली झोपड़पट्टी वाला, शहरी चमक दमक से दूर, अशिक्षा और अज्ञानता की बेडि़यों में जकड़ा हुआ एक बेहद छोटा सा गाँव……. सरकारी कागजों में इस गाँव के हर घर में बिजली आ चुकी है, लेकिन सरपंच जी का घर छोड़, सभी घरों में आज भी लालटेन ही…

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सौगात

सौगात पिछले बत्तीस सालों में यहाँ बहुत कुछ बदल गया है। अपनी सेकेंड हैंड गाड़ी का दरवाजा बंद करते हुए डॉ. शुक्ला ने सोचा और फिर साँसे भरकर गाड़ी से सामान निकालने लगे। ऑफिस का बैग, जो अक्सर ही खाली होता है, टिफिन रखने वाला जूट का थैला, जो अब मटमैला हो चुका है और…

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