Happy Anniversary

जीवन साथी जीवन पथ पर अकेली थी . अल्हड सी थी अलबेली सी … चलते चलते अनजानी राहों पर .. मिल गए एक दिन तुम यूँ ही … मेरे जीवन साथी बन कर … बन मांझी पतवार थाम कर … उतर पड़ी जीवन नदिया में …. हाँथ थाम कर चल दी तुम संग .. जिधर…

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कोरा कागज

कोरा कागज सफेद गंदगी से कोसों दूर, दो मोटे तहों के बीच सहेज कर रखी, काली धब्बे स्याह से बची । कोरा कागज था सिर्फ कोरा। जमाने की गंदगी से महरूम था वह, रोडे हिचकोले को जानता नहीं था पहचानता नहीं था। अनगिनत लिखावटों से घिरा है अब वह। रंग रूप से अपना स्वरूप खो…

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सतह की धूप

सतह की धूप नीरजा फूले नहीं समा रही थी। चारों तरफ बधाईयों का तांता लगा हुआ था। ममी – पापा उसे गले लगा के बैठे थे। पूरे जिले में सबसे अच्‍छे नम्‍बर लाकर वह पास हुई थी बारहवीं क्‍लास में। टेबल पर लड्डू के डिब्‍बे रखे थे। किसी ने गले में गेंदे की माला डाल…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ ‘

‘ तेरे जैसा दोस्त कहाँ ‘ मित्रता किसी भी इन्सान के जीवन की एक बेशकीमती धरोहर है।ईश्वर ने जिन्हें रक्त सम्बंध से नहीं बाँधा, उसे हमने प्रेम और अपनेपन से सींचा है और उसे ताउम्र विश्वास के धागे में पिरोकर हीरा की भांति सँजो कर रखा है। मित्रता ऊंच-नीच,जात-पांत,धर्म और उम्र के बंधन से परे…

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कैसे रहा जाएं बी पॉजिटिव

कैसे रहा जाएं बी पॉजिटिव व्यथित मन परमात्मा की क्रूर करनी के आगे लाचार हूं,आहत हूं और उसकी निष्ठुरता से बेहद नाराज भी हूँ कि ऐसा क्यों किया। रोज इतने जनों को एक-एक कर जाते हुए देख कर, सुन कर मन मे न चाहते हुए भी निराशा आ ही जाती थी,पर थोड़ी देर बाद सोचती…

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चाहतें

चाहतें सुबह की चाय के लिए बालकनी में पहुँचते ही ,अवि समझ गया कि कल … नहीं सिर्फ़ कल नहीं ,कई दिनों के कड़वे पलों का भारीपन है। माँ के सामने चाय का प्याला अनछुआ ही पड़ा था और शिवि की आँखों का प्याला छलकने को आतुर ! बड़े ही सहज भाव से उसने चाय…

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यू आर माई वेलेंटाइन…..

यू आर माई वेलेंटाइन….. चाय के कप के साथ रखे अखबार पर छपी तारीख और फेसबुक ने याद दिलाया आज का दिन। चाय कड़क और मीठी लगने लगी, एक तमन्ना मन ही मन भाप सी ऊपर उठने लगी। ‘सुनिये जरा…’ पुकारा हमने। ‘क्या है जी… बच्चों को दूध-चाय देना है। नाश्ते की भी तैयारी करना…

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तुम सक्षम हो माही!

तुम सक्षम हो माही!   दिन बीतते चले जाते हैं कई दफा यूँ ,जैसे सिर्फ घड़ी की सुईयां सरक रहीं हैं अपनी नियति के अनुसार .. पर वक़्त थम गया है कहीं पर और आपका मन मस्तिष्क भी, एक अजीब सी नीरवता चारों ओर संलिप्त है इसीलिए बहुत कुछ घटित होता रहता है आपके आसपास,…

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मंजु श्रीवास्तव ‘मन’ की कविताएं

मंजु श्रीवास्तव ‘मन’ की कविताएं १.चाँद  चाँद के रूप का क्या कहना है , चाँद आसमां का गहना है , रात निखरती चाँद के संग में, क्योंकि वह उसकी बहना है।   चाँद न होता, अमा न होती, बस तारों की सभा ही होती, बुझा बुझा सा गगन सिसकता, कभी रात फिर जवाँ न होती…

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