आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

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संवत्सर के नये सृजन का

संवत्सर के नये सृजन का संवत्सर के नये सृजन का प्राण प्राण वन्दन अभिनन्दन।। पीत पर्ण पर नन्ही कोपल, मन मन को आह्लादित करती। घनी अमा से उतरी किरणें, जन जन को संबोधित करती। पांखुर पांखुर गीत लिखें तितली फूलों का मधु रंजन।।१।। सुनहली शाटिका धृता पर कुंतल बीच पलाश सिंदूरी। कर्णसुसज्जित पारिजात ज्यूं ओढ़…

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एक स्त्री की तीन आवाजें !

एक स्त्री की तीन आवाजें !   दोपहर की चाय जब तक उबलती, तब तक सीमा खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाती। सामने स्कूल से लौटते बच्चे, दूध वाला, दोपहर की सुस्ती में पसरे कुत्ते और बगल की अरोड़ा आंटी की आवाज़ें – सब रोज़ की तरह चल रहा होता, पर सीमा की…

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Be positive …The Gita

Be positive …The Gita Many pandemics have come and gone wreaking havoc on humanity. It is the choices we as civilizations have made that has brought on these calamities on ourselves. From 1918, the influenza type pandemics started. Remember the H1N1 pandemic in 1918 followed by years of pandemics in 1957,1968, 1977 the Spanish flue,…

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बाल गणपति

बाल गणपति निरखत मैया हांसे अति लो आया मेरा बाल गणपति ।। झमक झमक झम – घुंघरू बाजे धमक धमक धम- ढ़ोलक साजे ध्रातिट ध्रातिट -पग चालन गति लो आया मेरा बाल गणपति ।। थुलथुल दुलदुल – चित्त का चोर मृदुल छवि- छाये चहुँ ओर चिहुंक चिहुंक – नटखट वो कति लो आया मेरा बाल…

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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर रामधारी सिंह दिनकर जिन्हें हम ‘जनकवि’ और ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से भी जानतें हैं और जो बिहार ही नहीं वरन् पूरे भारत के साहित्यिक आकाश में सूर्य के समान दैदिप्यमान नक्षत्र थें, हैं और रहेंगे… यथा नाम तथा गुण…. । यूं तो दिनकर की ख्याति एक वीर रस के कवि के…

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पर्यावरणविद

पर्यावरणविद राखी का त्यौहार आने में भले ही 2 महीने पड़े हों लेकिन भाई-बहनों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। खासकर जो बहनें अपने भाईयों से मिलो दूर बैठी हैं वो राखी से एक महीने पहले ही उन्हें राखी भेज देंगी। बात अगर राखी ट्रैंड की करें तो आजकल हर कोई इको-फ्रैंडली राखी में…

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कितनी और कैसी: आजादी ?

कितनी और कैसी:: आजादी ? आधी आबादी की आजादी कैसी और कितनी? इस पर हमेशा बात होती रहती है। कानूनी और संवैधानिक फ्रेम में सब कुछ बहुत आदर्श लगता है। समानता, स्वतंत्रता, और न्याय पाने के अधिकार सभी के लिए हैं। न्यायपालिका से संरक्षित भी हैं।लेकिन क्या स्त्री क्या पुरुष, दोनों के लिए ये किताबी…

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