मेरी माँ

मेरी माँ ऐसी मेरी माँ , ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ गुणों की खदान, मेरे परिवार की पहचान, जीवन के मूल्यों का पाठ पढ़ाती, शिक्षक होने का सही अर्थ दर्शाती ऐसी मेरी माँ, ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ।। इसका जीवन संघर्षों की कहानी, हँस हँस कर सुनाती,…

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क्यों हिंदी

क्यों हिंदी क्यों भाषा सुंदर भाती नही कतराते हैं सोचने की बात पले हैं बोल हिंदी है कुष्ट संकीर्ण मानसिक विचार दिखे क्यों होये सोचे करे सम्मान हिंदी हो घर शिक्षा हो मान उपयोग सोच विचार देवनागरी है मीठी भाषा है हिंदी है हिंदी सदियों मनोहर सदियों से नकल करें लोग गर्व करें हिंदी छोड़…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- बाल गंगाधर तिलक

लोकमान्य-बाल गंगाधर तिलक १८५७ की क्रांति क्यों विफल रही ? क्यों तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान विफल हुआ ? क्योंकि हम एक साथ लड़े ही नहीं !! कौन है ये ब्रिटिश ? कौन सा है उनका ब्रिटेन देश ?? अगर हम सब भारतीय एक साथ थूंकेगे तो उनका देश बह जाएंगा ! ऐसे कड़े…

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जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स

जुझारू नेत्री-रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स (4 फ़रवरी 1913 – 24 अक्टूबर 2005) अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने “द फ़र्स्ट लेडी ऑफ़ सिविल राइट्स” (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और “द मदर ऑफ़ द फ्रीडम मूवमेंट” (आज़ादी लहर की माँ) नामों से पुकारा। रोजा पार्क्स…

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श्रमदान

श्रमदान आधी आबादी करती श्रमदान बिन वेतन ताजमहल यादगार निशानी “कटते हाथ” होते हैं पूरे मजदूरों के हाथों स्वप्न हमारे आनंदबाला शर्मा साहित्यकार जमशेदपुर, झारखंड 0

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गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र

गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र जहाँ आज भी धर्म पर होते बवाल कई न आज़ादी मंदिर की न आज़ादी मस्ज़िद की न ही गुरुद्वारे गिरजाघर की बंटे धर्म , मज़हब सारे यूँ देश में अपने ही ।। गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र जहाँ नहीं महफूज़ लड़की कभी कोख में कभी घर में कभी…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी भारतीय समाज में भारतीय संस्कारों को सही स्वरूप में जन मानस के समक्ष लाने में मुंशी प्रेमचंद के अवदान को हम “मील का पत्थर” मानते हैं । उनका साहित्य उस आम समाज की कहानी कहता है जो रहता तो हर काल में है परन्तु उसे कलम बद्ध करना अपनी जिम्मेदारी समझी…

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