लघुकथा- माँ के साथ फोटो

लघुकथा- माँ के साथ फोटो बड़ा ही अजीब आदमी है हमारा बॉस। अभी पिछले साल ही ट्रांसफर होकर आया था। उसका हर काम ही अलग निराला होता है, जाने कहाँ से उसे क्या विचार आ जाते हैं, बड़ी IIM से MBA करके आया हुआ है, उसकी नियुक्ति,ऑफिस में कर्मचारियों में बढ़ते हुए डिप्रेशन को कम…

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माँ

माँ माँ तो केवल माँ होती है , हर सुख -दुख में ठंडी छाँव होती है । गरम थपेड़े सहकर भी बच्चों की रहनुमा होती है । सूरज की पहली किरण वह , चाँद की चमकती रोशनी वह, नीले आसमान -सी विशाल वह , हवा का सुगंधित झोंका वह , ममता से भरी गागर वह…

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राम और राजनीति

राम और राजनीति संस्कृत के रम् धातु से बने कण-कण में बसने वाले राम,शब्द और नीति दोनों ही दृष्टियों से राजनीति की हवा में रचे बसे नजर आते हैं।राम की राजनीति को दो प्रकार से देखा जा सकता है। ‘राम की राज-नीति’ और ‘राम की राजनीति’। राम के नाम पर की जाने वाली राजनीति आज…

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माँ

माँ मां! मां! मुझे तुमसे कुछ कहना है आईने में जब-जब निहारती हूँ ख़ुद को मैं स्वयं में बस तुम्हारी ही छवि पाती हूँ स्वयं के प्रति तुम होती थी लापरवाह जब काम और व्यस्तता का देकर हवाला तुम निपटाकर चौके चूल्हे के काम को नहा धोकर और पूजा का थाल सजाकर तुम माथे पर…

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सांझ जिंदगी की

सांझ जिंदगी की जिंदगी सतत परिवर्तनशील है। जन्म लेने से अंत तक, न जाने कितने अंजान रास्तों से चलते, फिसलते, ठोकरें खाते, संभलते हम निरंतर उस राह पर चलते रहते हैं, जिसकी मंजिल का हमें भी पता नहीं होता। जीवन की सांझ ढलने से पहले सोचा न था कि कभी ऐसा मोड़ आएगा, जो मुझे…

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The Storm and the Boat

The Storm and the Boat हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , (We have navigated the ship from a fierce storm,) इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | (Keep this country safe, my dear children.) तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , (You alone are the future of my…

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अमिट छाप

अमिट छाप हिंदी के महान कहानीकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म काशी के समीप लमही नमक गांव में ३१ जुलाई १८८० को हुआ था।प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।८ वर्ष की उम्र में इनकी माता एवम् १६ वर्ष की उम्र में इनके पिताजी का देहांत होने से घर का…

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कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण

कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण साहित्य संसार की प्रतिष्ठित कथाकर, जो, केवल कहानियों में ही नहीं, नाटक, उपन्यास, कविता, निबंध, पत्रकारिता,लगभग साहित्य की अधिकांश विधाओं में अपना हस्तक्षेप रखतीं हैं और अपने लेखन के लिये अनेक साहित्य सम्मान से नवाज़ी गईं हैं। प्रबुद्ध, सरल -सहज, सौम्य, चेहरे पर,निर्बाध, निश्छल हँसी ऐसे दिखती है,जैसे पूस में…

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