शार्दुला की कलम से

सच कहूँ तेरे बिना! सच कहूँ तेरे बिना ठंडे तवे सी ज़िंदगानी और मन भूखा सा बच्चा एक रोटी ढूँढता है चाँद आधा, आधे नंबर पा के रोती एक बच्ची और सूरज अनमने टीचर सा खुल के ऊंघता है ! आस जैसे सीढ़ियों पे बैठ जाए थक पुजारिन और मंदिर में रहे ज्यों देव का…

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तड़प

तड़प यादों की धूप में बैठी अंजली का मन साइबेरिया के पंछी की तरह इस शहर से उस शहर उड़ रहा है । अपनी बालकनी से ही न जाने कहाँ कहाँ की सैर कर रही है ।आज उसका मन फिर से विचलित हो रहा था। उसे आज राज की यादें आ रही थी । गाँव…

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फूल का इंतजार

फूल का इंतजार आज फूल के कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे थे | मिट्टी और ईट के उसके कच्चे पक्के घर में खुशियाँ इस तरह उतर आईं थीं | मानो सितारों की जगमगाहट उतर कर जमीन पर आ गई हो | हमेशा चिढ़ी सी रहने वाली दादी ने भी आज उसके गाल को चूमकर…

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संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है

  संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है।   क्या कहूँ, मैं कौन हूँ! कैसे करूँ, मैं स्वयं को परिभाषित! वर्षों की चिंगारियों की धुंध में, सुलगती आग, संवेदना की ज्वार हूँ। जटिल संघर्षों से उपजी, मौन अकुलाहट….! संभ्रांत, मर्यादित….. शब्दों की व्रिहद अभिव्यक्ति, “सरस व्यवहार हूँ मैं।” अपनी लिखी कविता की इन्हीं पंक्तियों के…

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उमस में भी टिके रहें

  उमस में भी टिके रहें आप बरसात के मौसम को पसंद तो खूब करती हैं, लेकिन इस मौसम में पैदा होने वाली उमस आपको इसलिए पसंद नहीं, क्योंकि वह मेकअप को टिकने नहीं देती. उमस के मौसम में फाउंडेशन मेल्ट हो जाते हैं और आई लाइनर फैल जाता है, वहीं लिपस्टिक चिपचिपे हो जाते…

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भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन

भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन कोविड-19 से उपजी समस्याओं और दुश्चिंताओं के बीच देश 72वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में है।धर्मनिरपेक्ष ,समाजवादी और लोकतान्त्रिक गणराज्य भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्र-ध्वजारोहण किया जाता है।सभी भारतीय नागरिकों द्वारा यह…

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तुम सब कैसे जान जाती हो

जब जब उदास होती हूं पर तुम्हें ना बताती हूं, क्यों दर्द दूं अपने गम को बताकर इसलिए तुमसे छुपाती हूं, पर जादूगरी कैसी तुमको आती है मां !तुम सब कैसे जान जाती हो … जागती हूं में रातों को जब नयनों में समंदर लिए, तुम भी तो फिक्र में मेरी रात आंखों में बिताती…

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बेटियाँं

बेटियाँं बेटियाँ—उफ़!ये बेटियाँ क्यों इतनी प्यारी होती हैं बेटियां? पिता की लाडली मां की आंखों की नूर होती है बेटियां क्यों इतनी प्यारी होती हैं बेटियां? कभी पकड़कर आँचल माँ का चलती थी लड़खड़ाते कदमों से हो जाती हैं सयानी क्यों इतनी जल्दी ये बेटियाँ? सखियों सी माँ के साथ खिलखिलाती हैं बेटियाँ पिता की…

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Awakening

Awakening conscience which flows through the veins doesn’t allow forgetting about oneself despite this you sleep with the hard sleep of Jonas you don’t dump the world on the other side of your eyelids you remain motionless dying while alive Izabela Zubko Poetess, journalist and translator Warsaw, Poland translate by: Anna Meysztowicz 0

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बिना पते की चिठ्ठी

बिना पते की चिठ्ठी मेरे घर के आगे एक छोटा बगीचा है जिसमें मैंने नारियल, नींबू, अमरूद, चम्‍पा, रातरानी, आम के पेड़ लगा रखे हैं। छोटी क्‍यारियों में गेंदा, चमेली, उड़हुल के फूल हैं। उड़हुल के भी कितने रंग है ना। जब छोटी थी तब केवल लाल या गुलाबी रंग के उड़हुल के फूल हुआ…

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