जी ले कुछ पल अपने लिए
जी ले कुछ पल अपने लिए थम चुका वक़्त की बर्फीली हवाओं का दौर पिघल चुकी संघर्षों की बदली भागमभाग की चट्टानें शोर था विकट, घनघोर निकट, एक सूक्ष्मतम तंतु ने भेद डाले, असमंजसों के जाल अर्श से पाताल? मनुष्य! कुछ थमो तुम, करो आत्ममंथन मथा ज्यूं समुद्र को, पाया अमृत समुद्रमंथन असुर है! यह…