उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है
उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ? सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोता क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ?…