आशा

आशा जीवन में अंधकार हो चहूँ और अविकार हो तुम आशा का दामन थामे रखना बिजली कड़कड़ाये या मेघ गरजें सूरज की हो तपिश या आस्माँ बरसे तुम आशा का दामन थामे रखना हर तरफ़ चीत्कार का है मंज़र इंसान क़ैद में कैसा है ये क़हर तुम आशा का दामन थामे रखना ऑक्सीजन का कालाबाज़ार…

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आया मौसम प्रेम का…

आया मौसम प्रेम का… रोज़ डे 1 शीत ऋतु की उजली धूप सा चमके है तेरा रूप….. हर लो मेरा उर-तिमिर प्रिय स्वीकारो यह वृतपुष्प 2 हृदय तल में ले उद्वेग कई सतह पर मैं रहा संभ्रांत जीवन रण के कोलाहल से तन जर्जर मन हुआ क्लान्त बिसरी सुधि की पुस्तिका से झांक उठा तब…

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आह्वान

आह्वान नारी अबला नहीं , तुम हो सबल। शक्ति से भरपूर। सृजन करती हो, सृष्टि करती हो, रचनाकार हो इस धरती की। जीवन नहीं है एक अंतहीन अंधेरी सुरंग, उसे तुम आलोकित करो अंत:तिमिर का नाश करो। अपने अंदर का विश्वास जगाओ। रश्मि किरणों का अहसास करो, विधु की शीतलता का भी तुम विस्तार करो।…

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हिंदी अपने राजभाषा के गौरव से बहुत दूर

हिंदी अपने राजभाषा के गौरव से बहुत दूर वैचारिक संप्रेषण के लिए भाषा को आवश्यकता होती है। धरती पर जब से मनुष्य का अस्तित्व है तभी से वह भाषा का प्रयोग कर रहा है। ध्वनि एवं संकेत दोनों रूपों में वैचारिक आदान-प्रदान होता रहा है। भारत भाषा और बोलियों की दृष्टि से समृद्ध देश है।…

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संवाद

संवाद “अरि ओ पिंकी,सुना है तेरे पड़ोस में एक नई फैमली रहने आई है,कैसा है वह परिवार?” रिंकी ने घर मे घुसते ही अपनी सहेली पिंकी से पूछा। पिंकी अपनी प्यारी सहेली को देख बहुत खुश हुई,और बोली” मैं सोंच ही रही थी तुम्हें इस नये पड़ोसी के विषय में बताऊँ, जैसा कि तुम्हें पता…

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Moments Of Love

Moments of Love As I hold my newborn to my breast… my heart is overflowing with Joy! As the baby suckles and nurses… my heart is filled… with so much love and tenderness! An awesome sense of responsibility floods over me… as I look upon the face of a helpless and innocent infant… that is…

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करवा चौथ का चाँद आया

करवा चौथ का चाँद आया देख सखी दूर हुआ तमस मन कमल खिला उद्गार संग घिरी थी कालिमा चहुँ ओर नभ दमके सखी चाँद आया खिल रहा था चाँद हर माह निराशा भय का जैसा प्रहर अद्भुत ज्योति है हटा धुंध करवा चौथ का चाँद आया चाँदनी की ओढ़नी लहराते नयन खिले स्निग्ध मुस्कान अमृत…

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“रामधारी सिंह “दिनकर”की काव्यगत विशेषताएँ”

“रामधारी सिंह “दिनकर”की काव्यगत विशेषताएँ” स्वतंत्रता से पहले एक विद्रोही कवि और स्वतंत्रता के उपरांत एक राष्ट्रकवि के रूप में स्थापित माने जाने वाले रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, लेखक और निबंधकार हैं।जहाँ उनकी कविताएँ वीर रस, ओज, क्रांति और विद्रोह के स्वरों से भरी हैं, वहीं उनके काव्य में श्रृंगार,सौंदर्य और…

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भारतीय नववर्ष की अनमोल वैज्ञानिकता

भारतीय नववर्ष की अनमोल वैज्ञानिकता हमारा ” नव-वर्ष चैत्र मास, शुक्ल पक्ष प्रथमा से मनाया जाता है..” संवत्सर-चक्र के अनुसार सूर्य इस ऋतु में अपने राशि-चक्र की प्रथम राशि मेष में प्रवेश करता है। भारतवर्ष में वसंत ऋतु के अवसर पर नूतन वर्ष का आरम्भ मानना इसलिए भी हर्षोल्लास पूर्ण है क्योंकि इस ऋतु में…

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पचास की दहलीज पार करती औरतें

पचास की दहलीज पार करती औरतें ये पचास की दहलीज पार करती औरतें वाकई बहुत विचित्र होती हैं, एकदम समझ से परे.. कई बार लगता मानों समेटे हों कितने गहरे राज अपने भीतर बिल्कुल सीप में मोती के मानिंद.. दबाए रखती हैं कितने एहसास चेहरे पर बढ़ती झुर्रियों में और फिर उन्हें में मेकअप की…

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