मन और गुलाब

मन और गुलाब मन गुलाब सा कोमल सुरभित, आज कर रहा स्नेह निवेदित संग साथ का सुख चाहें हम मेरी कविता तुम्हें समर्पित मन वाणी और भाव हृदय के आज सभी तुमको को है अर्पित यह गुलाब सी रंजित कविता बने दोस्ती की मिसाल जब हम तुम बंधे एक बंधन में गुथे हुए फूलों से…

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Be positive …The Gita

Be positive …The Gita Many pandemics have come and gone wreaking havoc on humanity. It is the choices we as civilizations have made that has brought on these calamities on ourselves. From 1918, the influenza type pandemics started. Remember the H1N1 pandemic in 1918 followed by years of pandemics in 1957,1968, 1977 the Spanish flue,…

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लॉकडाउन में पेरेंट्स और बच्चे

लॉकडाउन में पेरेंट्स और बच्चे कोरोना वाइरस के बचाव के लिये होने वाले लॉकडाउन का बच्चों पर सीधा – सीधा असर है और पैरेंट्स भी परेशान हैं कि इस समय का सदुपयोग कैसे किया जाय। आईये इस विषय पर कुछ चर्चा करें । इस लॉकडाउन से हर उम्र के बच्चों के लाइफस्टाइल में अचानक ही…

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विनायक पूजन

विनायक पूजन तीज त्यौहार की रौनक कुछ ऐसी आई , संग पार्वती गजानन लाई। कितनी अद्भुत लीला है, बरसो बाद ये नज़ारा है। ना ही ढोल और ताशे है, ना ही बाप्पा का नारा है। सूनी आंखें पंडाल नदारत, मंदिर में मीलों की सूनी कतार नदारत। ना वो मोदक ना वो वेंडी , मूर्तिकारो के…

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लैंडलाइन प्रेम

लैंडलाइन प्रेम   यह प्रेम कहानी उस ज़माने की है जिस वक़्त मोबाइल फोन नहीं थे और लैंड लाइन के फोन के तारों के इर्द-गिर्द घूमती थी यह दुनिया। लैंड लाइन का फोन भी हर किसी के घर में नहीं होता था और लैंड लाइन का फोन रखना एक रुतबे की बात मानी जाती थी।…

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मार्गरेट हिल्डा थैचर

मार्गरेट हिल्डा थैचर मार्गरेट हिल्डा थैचर (रॉबर्ट्स), (बैरोनेस थैचर) का जन्म 13 अक्टूबर 1925 को हुआ था। मार्गरेट थैचर एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और राजनेता थीं, जिन्होंने 1979 से 1990 तक यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री और 1975 से 1990 तक कंज़र्वेटिव पार्टी की नेता के रूप में कार्य किया। वह पहली महिला ब्रिटिश प्रधानमंत्री थीं…

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सूरदास

सूरदास हिंदी – उर्दू साहित्य के विराट नभ पर दिवाकर सा दैदीप्यमान एक नाम – मुंशी प्रेमचंद । प्रेमचंद एक ऐसे कथाकार थे जिन्होंने साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाते हुए , अपनी कहानियों और उपन्यासों में किसानों, दलितों, श्रमिकों की दयनीय स्थिति का और स्त्री शोषण का मार्मिक चित्रण किया । उनकी…

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एक होली ऐसी भी

एक होली ऐसी भी हो उठता है आसमान लाल पीले गुलाबी रंगों से सराबोर जब फागुनी बयार और शुष्क पत्तों का शोर हृदय को देता है झकझोर जब फगुआ के गीतों के बीच अश्रुओं की अविरल धारा नयनों को देती है सींच जो मां की आंखों का तारा था एक पत्नी का अभिमान सारा था…

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बंद चेहरों का शहर

बंद चेहरों का शहर (कोरोना संस्मरण) जनवरी 2020 : कोरोना का नाम पहले नहीं सुना था लेकिन खबरों में चीन के वुहान की हल्की-फुल्की बातें सामने आ रही थी। चीन दूर है, यहाँ उसकी हवा नहीं आएगी। मन को आश्वस्त किया। राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस की चाय का आनंद लिया। दबे स्वरों में लोगों…

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करिआ फुआ

करिआ फुआ माँ, आज करिया फुआ नहीं आई ? मैं शहर से उनके लिए उनके मनपसंद रंग की साड़ी लाया हूँ । सुमित मैं तुम्हें बताना भूल गई थी वह पिछले दो हफ्ते से घर पर नहीं आ रही है बहुत बीमार है। ठीक है, मैं उनके घर जाकर ही उनसे मिल कर आता हूँ।…

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