उत्तराखंड की दिवाली

उत्तराखंड की दिवाली वर्षों तक उस बैलों की जोड़ी के कंधों पर हल रखकर खेत जोते गए। खेती में दिन-दूनी रात चौगुनी उन्नति होती गई। अपने साथी ग्वारा के साथ ही बुल्ला भी उस घर के लोगों की जान था। लेकिन एक दिन जंगल से घास चरकर लौटते समय बुल्ला की आंख में किसी पेड़…

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मेरा परिचय

मेरा परिचय कहाँ- कहाँ देखूँ निज छवि अपनी, किस-किस से बाँधू निज परिचय मैं? कहाँ-कहाँ ढूँढू निज आधार अपना, किस -किस के आगे शीश नवाऊँ मैं? दिया अस्तित्व को स्वरूप जिन सबने, कहता है मन सबको, निजपोषक अपना। परिचयदात्री स्नेह-धूप में बनी मेरी हर परछाई, वह घना बरगद जिसकी छाँव तले जीवन सुस्ताई। परिचय देती…

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IN THE NAME OF SPARROW

IN THE NAME OF SPARROW Yes, they were integral part of domestic life in a family of Orientation ,ever since one gained consciousness. In the course of primary socialisation during the formative years,it was a common sight to see these cute,harmless,flying creatures,chirping, jumping and producing soothing sound in the courtyard. Of course,Crows too would come…

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1962 के अविस्मरणीय यादें

1962 के अविस्मरणीय यादें वर्तमान में हिन्दुस्तान बहुत सारी मुश्किलों और चुनौतियों से जूझ रहा है।हमारा देश इस मुश्किल घड़ी में सिर्फ एकता, अखंडता, सतर्कता और जागरूकता से ही विजयी होगा। ऐसा ही मुश्किल समय 1962 मे भारत चीन युद्ध के दौरान आया था जिसका हम हिंदुस्तानियों ने एकता बनाए रखते हुए डट कर मुकाबला…

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दिव्या जी को जितना मैंने जाना

दिव्या जी को जितना मैंने जाना मिलना मिलाना कहते हैं ईश्वर के हाथों का खेल है और जीवन के किस मोड़ पर किसी ऐसी शख्सियत से भेंट करवा दें कि लगे जैसे आपको तो बहुत पहले से जानते हैं| प्रवासी हिंदी साहित्य लेखन की प्रतिनिधि साहित्यकार जिनका रचना संसार बहुआयामी है, सुश्री दिव्या माथुर जी…

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मेरे प्रथम गुरु

मेरे प्रथम गुरु हर छोटी बड़ी बात वो समझाते हैं प्यार से, कभी किसी गलती पर आंखे दिखाते , कभी हाथ फेरते सर पर मेरे दुलार से, मनुहार से!! जीवन की हर पेचीदगी उनके मार्गदर्शन से ही हल हुए उनकी सही दिशा -दर्शन से निर्बल हौसले मेरे सबल हुए!! तुम केवल कर्ता हो अपने सुकर्म…

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कालांतर में बौद्ध और जैन धर्मस्थली

कालांतर में बौद्ध और जैन धर्मस्थली अयोध्या एक अद्भुत विरासत जिसे प्रभु राम की नगरी के रूप में जाना जाता है। अयोध्या जिसके कण कण में राम समाये हुए हैं, वहां के लोगों के रोम रोम में राम निवास करते हैं। सनातनियों को अयोध्या अपने प्राणों से भी प्यारा है। सच कहूं, तो उन्हें ही…

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“गृहस्वामिनी को वार्षिकोत्सव की शुभकामना”

“गृहस्वामिनी को वार्षिकोत्सव की शुभकामना”   वार्षिकोत्सव के संग आज़ हर घर पहुंची गृहस्वामिनी, साहित्य कर्म मानवता धर्म को समर्पित हमारी यह दैनंदिनी। महिलाओं की यह पत्रिका महिलाओं की यह सहगामिनी, महिलाओं द्वारा हीं है संचालित साहित्य समृद्धशालिनी।   सफर संघर्ष भरा शुरू हुआ था छ: बरस कहीं पहले, एक-एक कलम के सिपाही जोड़ काम…

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श्रद्धांजलि

वह कैसे नवयुवक थे जिन्हें चाहिए थी आजादी हर हाल में हर कीमत पर उन्हें चाहिये थी आजादी वह दूसरो युवकों से थे अलग नायको में नायक थे जिन्हें चाहिए थी हर हाल में हर कीमत पर आजादी उनकी चाहत न कोई हीर थी न लैला उनकी चाहत थी हर हाल में हर कीमत पर…

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