शिक्षा – क्या और क्यों

शिक्षा – क्या और क्यों इसी वर्ष जनवरी के महीने में एक अन्तरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस के दौरान नागालैंड के राज्यपाल पी बी आचार्य को सुनने का मौका मिला । अपने संभाषण के दौरान उन्होंने जो एक बहुत गूढ बात कही वो ये थी कि ” शिक्षित वो नहीं जिसके हाथ में सर्टिफिकेट का भंडार हो बल्कि…

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सैनिक का संदेश

सैनिक का संदेश घर से निकला था, मादरे वतन की हिफाजत में। मेरे इरादे और हौसलों में, जीत का ही जुनून था। ये तो मिट्टी का कर्ज़ था, जो लहु देकर जा रहा हूँ । सौंप कर जा रहा हूँ , ये वतन तेरे हाथ में, ए- मेरे नौजवान साथियों । मैं सरहद देखता हूँ…

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एक लौ उम्मीदों की

एक लौ उम्मीदों की धरती से लेकर आसमां तक उदासियों का मंजर फैला है हर तरफ़ हैं खबरें मौत की हर तरफ़ आंसुओं का रेला है सोचा था संभल जाएंगे हम धीरे-धीरे ज़िन्दगी की उधड़ी तुरपाईयों को जतन से सी लेंगे हम धीरे-धीरे पर इम्तहान की हद अभी बाकी है कुछ कर्ज़ की किश्त अभी…

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फ्योंली से अनमोल कोई फूल नही

फ्योंली से अनमोल कोई फूल नही यह तब की बात है जब यह माना जाता था कि हिसंक से हिंसक वन्यजीव भी मानव मांस नहीं खाते हैं। उसी जमाने में एक बहुत प्यारी सी लड़की हुई थी -फ्योंली। उसे प्रकृति से बहुत प्रेम था। यूं ही विचरते-विचरते एक दिन वह किसी जंगल में भटक गई।…

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एक दूसरे के साथ जीना

एक दूसरे के साथ जीना प्रेम करने से पूर्व मैं तुम्हें जानती नहीं थी , मैं तुम्हें नहीं जान पाई प्रेम करने के बाद भी , पर इस जानने और न जानने के बीच , रास्ते में आई रिश्तों की पगडंडी ने, थक चुके मेरे मन को ये सिखा दिया है कि , प्रेम का…

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तुम पास नही फिर भी पास हो

मेरी माँ, माँ तुम पास नही फिर भी पास हो, माँ तुम हमेशा उस जहां में भी जा कर मेरे पास हो, तुम्हे क्या लिखूं माँ आपने हमे लिखा है। मैं कभी सोची ही नही थी एक दिन मैं आपसे कभी दूर जाउंगी मुझे याद है वो दिन जब मेरी शादी ठीक हुई थी और…

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प्रेम की पूरकता

प्रेम की पूरकता तुम कोई गीत लिखो तुम कोई गीत लिखो, और मै गाऊं, गीत माटी के, गीत फसलों के, गीत सुबह-शाम ,गोधूली-विहान के. तुम कोई सूरज गढ़ों, और मै .. किरणों का परचम सजाऊं, मन की मञ्जूषा में यादों के साये हैं, भूले बिसरे नगमे बादल बन छाये हैं, जीवन के आँगन में तुम,…

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न्याय

न्याय शहर के पाॅश इलाके में बड़ी कोठी, गेट पर खड़े चौकीदार,घर में नौकर- चाकर, शान और शौकत, सजा हुआ बगीचा, किसी चीज की भी कमी नहीं, होगी भी क्यों ना, यहां के डी.एम का जो बंगला था।दरवाजे पर बड़ा सा नेम प्लेट लगा था सुनहरे तख्त पर काले अक्षरों में लिखा था “अनामिका चौधरी”…

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मेरे पापा

मेरे पापा कई बार जब मतलबी बनना चाहा, मेरे पापा की परछाईं ने मुझे बनने नहीं दिया ।। कई बार जब खुद को दोराहे पर खड़ा पाया, मेरे पापा की सीखों ने सही राह ही चुनवाया।। हर परिस्थिति में ढलना, हर संघर्ष से जूझना इस लायक पापा ने ही बनाया ।। ईमानदारी और सच्चाई के…

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