पुनः पर्यावरण चिंतन

पुनः पर्यावरण चिंतन ५ जून विश्व पर्यावरण दिवस के नाम समर्पित है। फिर वही पत्र-पत्रिकाओं में कुछ संबंधित चित्र, आलेख, संचार माध्यमों में कुछ चर्चा- परिचर्चा, कुछ सरकारी घोषणाएं और कार्यक्रम। आवश्यकता है हम आमजन पर्यावरण को इसके स्थूल रूप से पृथक इसके वास्तविक रूप में ग्रहण करें। पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर…

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सीमा भाटिया की कविताएं 

सीमा भाटिया की कविताएं    1.उद्घोष    धूल धूसरित यह धरा बार-बार है पुकार रही युवा शक्ति को फ़िर से नव चेतना हेतु ललकार रही   मस्तक पर तिलक मेरा करो और जोश का वरण करो रिपु को मिटाने के लिए अस्त्र शस्त्र अब धारण करो मातृ भूमि की रक्षा हेतु लश्कर अपने बल संवार…

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उम्मीदें अभी बाकी हैं

उम्मीदें अभी बाकी हैं जितनी तेजी से मानव सभ्यता का विकास हुआ है, उतनी ही तेजी से प्रकृति और प्रदत प्राकृतिक संसाधनों का दोहन। शोध और अध्ययन भी अनवरत जारी हैं और सामने आने वाले निष्कर्ष कई बार चिंता और डर से युक्त परिस्थिति पैदा कर रहे हैैं। वैश्विक तापमान में वृद्धि एक बड़ी समस्या…

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हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता

हिंदी चीनी भाई भाई के नारों से दूर है हमारा रिश्ता चीन और भारत का बहुत पुराना ऐतिहासिक रिश्ता है। मौर्य काल से नेहरू मोदी तक रिश्तों का सफर रहा है। पहली सहस्राब्दी के दौरान, दोनों ही आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे और 19 वीं सदी के अंत और 20 वीं सदी की…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अरूणा आसफ़ अली

भारत रत्न अरूणा आसफ़ अली आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष में जब हम देश भर में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं । तब अपनी मातृभूमि को सौभाग्यशालिनी कहने से मन को असीम प्रशंसा होती है। भारत भूमि सदा विशेष रही है ।अपनी धन संपदा, वनसंपदा, खनिज भंडारों और प्राकृतिक सौंदर्य और विविधता के क्षेत्र…

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कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव?

कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव? जब चारों तरफ मचा हो हाहाकार, पूरे विश्व में कोरोना नाम के इस मर्ज ने आफत मचा रखी है।वैज्ञानिकों की एक साल की मेहनत,वैक्सीन के रूप में मिली है लेकिन अभी भी पूर्णत संतुष्टि नहीं मिल पाई । लोग वैक्सीन लेने के बाद भी इस रोग की चपेट में आ…

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कैसे लिखूं तुम्हें मैं

कैसे लिखूं तुम्हें मैं कैसे लिखूं तुम्हें मैं, कैसी तस्वीर बनाऊँ? मन और काय की भाषा, परिभाषा लिख न पाऊँ। उंगली थाम सिखाया चलना, सतपथ की दिशा बताई। साहस नित ही रहे बढ़ाते, तुमने जीत की राह दिखाई। हर कठिनाई सरल बनी, हर सम्भव हल बतलाया। संस्कार भरे संस्कृति सिखलाई, स्वाभिमान का अर्थ बताया।। उसी…

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बस इतना सा

बस इतना सा नाम – सीमा भाटिया जन्मतिथि – 5 फरवरी, 1969 शिक्षा – स्नातकोत्तर (हिन्दी) लेखन की विधाएँ – गद्य और पद्य दोनों में प्रकाशित पुस्तकें – सांझा संग्रह_ संदल सुगंध, लम्हों से लफ्ज़ों तक, सहोदरी सोपान, अल्फाज़ ए एहसास (काव्य संग्रह) सफर संवेदनाओं का,आसपास से गुजरते हुए, लघुतम-महत्तम, सहोदरी लघुकथा २, लघुकथा कलश,…

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