मुझे नहीं मिले गुलाब

“मुझे नहीं मिले गुलाब” आँखों की पुतलियों का रंग कत्थई था होंठों की फ़लियाँ मूंगिया रंगीं थीं गालों पर चम्पई असर लिये मैं प्रेमिका बनी शब्दों की चाल ढाल भाषा मेरे लिए हमेशा शालीन रही सिंगार और श्रंगार हमेशा सौम्य रहा प्रथम पुरूष की तरफ आकर्षण प्रकृति की तरह हुआ और प्रेम में मैं पृथ्वी…

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धीरे धीरे रे मना

धीरे धीरे रे मना “अरे चुन्नू ! क्या सारा दिन खेलते रहोगे। आज तो सूरज उगते ही अपना क्रिकेट बल्ला सम्भाल लिया। पता है, बारह माही परीक्षा सर पर आ गई है।पढ़ाई के लिए स्कूल ने तुम्हें छुट्टी दे रखी है।और मैं भी तुम्हारे लिए घर पर हूँ, ऑफिस से छुट्टी लेकर। छः माही का…

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“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता”

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते  तत्र देवता” नारी के बिना इस सृष्टि की कल्पना करना संभव ही नही है। युवा हो या अधेड़ या हो वृद्ध। सभी पुरुषों को यह समझना जरूरी है। आज छोटी बच्चीयों से लेकर वृद्ध महिलाएं सुरक्षित नही है ,यह 21 वी सदी में रहते हुए भी बड़ी वेदना की बात है।…

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एक खत

एक खत एक पाती माँ के नाम माँ,कहते है इस बेहद खूबसूरत शब्द की सरचना ईश्वर ने तब की जब उन्हें लगा की वह सब जगह नही पहुँच सकते,और फिर उन्होंने हम सब के लिए माँ बनाई!! सम्पूर्ण सृष्टि आकाश गंगा तारा मण्डल और ब्रह्माण्ड की सृजनकर्ता #माँ,वह ध्वनि है #ॐ सी, ओंकार सा वक्त…

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बुद्ध

बुद्ध “बुद्धं शरणं गच्छामि ऽऽऽ, धममं शरणं गच्छामि ऽऽऽ, संघं शरणं गच्छामि ऽऽऽ॥” महलों में पाया जन्म भोगी विलासी ना बने बुद्ध थे वे, सब त्याग वनवासी हो चले। बैठ वर्षों तप किया आत्मज्ञान प्रज्ज्वलित हुआ बोधिवृक्ष की छाया में बुद्ध वचनों से शिष्यों का उद्धार हुआ। उपदेश से उनके प्रभावित हो त्याग हिंसा की…

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संघर्ष अदृश्य शत्रु से

संघर्ष अदृश्य शत्रु से कोविद 19 एक सूक्ष्म जीवाणु जो वैश्विक आपदा के रूप में समस्त विश्व के मानव जाति को धीरे धीरे अपने शिकंजे में जकड़ता जा रहा है।एक अदृश्य शत्रु आज मानव सभ्यता के समक्ष एक चुनौती है, न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक…

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आत्मिक प्रेम

आत्मिक प्रेम   राजमहल का उद्यान- प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों से होती हुई तितलियों की परिक्रमा, मधुप का गूँजन, सरोवर की शीतलता और शीतल मंद सुरभित वायु उस रमणी को याद करने पर मजबूर कर दिया, जिसकी चर्चा तीनों लोकों में है। निषध देश का राजकुमार नल अंतःपुर के उद्यान में…

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छठ पूजा विशेषांक

छठ पर्व : भावनाओं का ज्वार पवित्र कार्तिक मास आते ही वातावरण ज्योतिर्मय होने लगता है… शक्तिदायिनी माँ दुर्गा के आगमन के बाद से ही मातृ शक्ति का एक प्रवाह मन की भावनाओ को झंकृत करने लगता है … बंगाल की कोजागरी लक्खी पूजा, काली पूजा, जगद्धात्री पूजा तो अन्य स्थानों पर धन की देवी…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- भीकाजी कामा

मेडम भीकाजी रूस्तम कामा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रवादी आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं। भीकाजी कामा का जन्म 24 सितंबर, 1861 को बंबई (मुंबई) में पारसी समुदाय के एक अमीर एवं मशहूर शख्सियत भीकाई सोराब जी व जीजा बाई पटेल के घर हुआ था। उनका परिवार आधुनिक विचारों वाला था और इसका उन्‍हें काफी लाभ…

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क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया (इस लॉकडाउन में) विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण जिस दिन पूरी तरह से लॉकडाउन की घोषणा की गई, लगा जीवन थम गया। जीवन की बिल्कुल ही नई परिस्थिति और डर ने मिल कर एक अजीब सा माहौल बना दिया था जो खुशगवार तो नहीं था, सबकुछ उलट पुलट सा गया था।…

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