निर्मला : एक औरत

निर्मला : एक औरत मुंशी प्रेमचंद, जो कि कलम के सिपाही, के नाम से भी जाने जाते हैं, ने हिन्दी साहित्य की अभूतपूर्व सेवा की है। उर्दू और हिन्दी में लिखी उनकी 300 कहानियों और करीब 45 उपन्यासों ने सौ वर्षों से अधिक समय से साहित्य प्रेमियों को गुदगुदाया है, उत्साहित किया है, प्रेरित किया…

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आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

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अम्फन के बाद की शाम

अम्फन के बाद की शाम आज शाम आकाश , उजले-नीले बादलों से आच्छादित। यूँ प्रतीत हो रहा जैसे मानो, प्रकृति अपने आलय के छत को, सजा रही अनेक गुब्बारों से। जो हवा के साथ गतियमान हैं, कभी बदलते आकार, रंग कभी। सजावट की गुणवत्ता नाप रहे हो जैसे , किसी गृहस्वामिनी के गृह -सज्जा के…

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मेरी भूलों को कर दो माफ

मेरी भूलों को कर दो माफ तुम्हारे प्रेम में आकंठ डूबी थी मैं , कभी किसी बात पर रुठी न थी मैं, तुमने मेरे पंख काट कर सहेज दिये थे , बिना पंखों के भी खुश थी मैं तुमने कहा था कि पहले तुम गगन छू लोगे , अपने सपने पूरे कर लोगे , मैंने…

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बंद चेहरों का शहर

बंद चेहरों का शहर (कोरोना संस्मरण) जनवरी 2020 : कोरोना का नाम पहले नहीं सुना था लेकिन खबरों में चीन के वुहान की हल्की-फुल्की बातें सामने आ रही थी। चीन दूर है, यहाँ उसकी हवा नहीं आएगी। मन को आश्वस्त किया। राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस की चाय का आनंद लिया। दबे स्वरों में लोगों…

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बसंत

बसंत आया बसंत हर्षित हुए अनंग धरती का मगर देख हाल सिकुड़ा किंचित मस्तक भाल दिल्ली में जब देखा तनाव बदले अपने मन के भाव किया उन्होंने एक एलान लड़ूंगा अबकी मैं भी चुनाव दिखाऊंगा अपना प्रभाव रति लाना मेरा धनुष बाण सुनो सब मेरा संकल्प पत्र मैं ही हूं बस तुम्हारा विकल्प तुम भी…

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बोनस

बोनस आज षष्ठी का दिन है। कीर्ति सुबह उठते ही खुशी से उछलने लगी है। कारण आज बाबा को बोनस मिलने वाला है। बाबा बोनस लेकर आएँगे और फिर दुर्गा पूजा के कपड़े आएँगे। उसके बाबा दार्जिलिंग के एक चाय बागान में नैकरी करते हैं। वह फुदकती हुई अपनी माँ कुमारी के पास पहुँची और…

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रूपांतर

रूपांतर सोचती है सारा काम निपटा कर ही जाए पर हो नहीं पाता उससे। बॉस के दिए फ़ाइलों की संख्या कम है पर बहुत कुछ निपटाना है उनमें। काम मिलता उसे ज़्यादा है, जानती है वह, क्योंकि ज़िम्मेदार है, कर्त्तव्यनिष्ठ है। हरिनारायण बॉस ज़रूर हैं पर उसका कष्ट समझते हैं समझाते भी हैं। एकल अभिभावक…

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